धूर्त बिल्ली का न्याय – पंचतंत्र की कहानी | dhurt billi ka nyay Panchtantra ki kahani in Hindi

धूर्त बिल्ली की न्याय हिंदी कहनी Hindi Kahaniya – Panchatantra Moral Stories – Hindi Fairy Tales

dhurt billi ka nyay Panchtantra ki kahani

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धूर्त बिल्ली का न्याय पंचतंत्र की कहानी | dhurt billi ka nyay Panchtantra ki kahani in Hindi

एक पेड़ के नीचे गड्ढा था जिसमें एक तीतर रहता था। एक दिन तीतर भोजन की तलाश में निकला घर वापस बड़े दिनों तक नहीं आया।

उसी दौरान एक खरगोश को वह गड्ढा मिला और वह उसमें रहने लगा। जब तीतर वापस आया तो खरगोश ने उस जगह को छोड़ने से इंकार कर दिया और दोनों आपस में लड़ने लगे।

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उन दोनों ने सोचा कि कोई तीसरा ही उनके झगड़े को सुलझा सकता है। तभी एक बिल्ले ने उनके झगड़े को सुना। बिल्ले ने अपनी वेश–भूषा बदली और सन्यासी का रूप धारण कर मंत्र जाप का ढोंग करने लगा।

उसका यह रूप देखकर खरगोश कौर तीतर अपना झगड़ा सुलझाने उसके पास गए।

बिल्ले ने उसे कहा, “बच्चों में तुम्हारा झगड़ा तो सुलझा सकता हूं पर बूढ़ा होने के कारण मुझे ठीक से सुनाई नहीं देता। तुम्हें मेरे कानों के पास आकर अपनी बात कहनी होगी।”

जैसे ही खरगोश और तीतर बिल्ली के पास गए, वह उन्हें पकड़ कर खा गया।

नैतिक शिक्षा :– झूठे लोगों से सावधान रहें।

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