बंदर और घंटी पंचतंत्र की कहानी | bandar aur ghanti Panchtantra ki kahani in Hindi

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bandar aur ghanti Panchtantra ki kahani

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बंदर और घंटी पंचतंत्र की कहानी | bandar aur ghanti Panchtantra ki kahani in Hindi

एक बार बंदर के झुंड को एक बड़ी सी घंटी मिली। वह उसे लेकर जंगल में चले गए। उन्होंने उसे एक मंदिर के खंडहर में रख दिया और रोज श्याम उसे बजाते। घंटी की आवाज से बंदरों को मजा आता था।

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अंधविश्वासी गांव वालों को लगा की जंगल में कोई भूत है, जो ऐसी आवाजें निकालता है। उन्होंने उस रास्ते से रात के समय जाना छोड़ दिया।

एक समझदार बुढ़िया इन सब बातों में यकीन नहीं करती थी। उसने जंगल में जाकर देखा। उसने पाया कि यह तो कुछ बंदर है जो घंटी बजाकर शोर करते हैं।

उसने वापस आकर गांव वालों से कहा, “अगर तुम मुझे कुछ फल दोगे तो मैं एक पूजा करके जंगल के भूत को भगा दूंगी।”

गांव वाले उसकी बात मान गए। अगले दिन वो फलों की टोकरी लेकर जंगल में गई। जब बंदरों ने खाने के लिए फल देखें, तो वह घंटी छोड़कर, टोकरी पर टूट पड़े। बढ़िया ने चुपके से जाकर घंटी उठा ली। इस तरह उसने जंगल के भूत को भगा दिया।

नैतिक शिक्षा :– समझदारी और साहस से हर मुश्किल आसान हो जाती है।

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