बाघ और यात्री पंचतंत्र की कहानी | bagh aur yatri Panchtantra ki kahani in Hindi | Tiger And Traveller

बाघ और यात्री || Tiger And Traveller || हिन्दी काहानी || Moral Stories.

bagh aur yatri Panchtantra ki kahani

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bagh aur yatri Panchtantra ki kahani in Hindi

एक बार एक बूढ़ा बाघ एक दलदल के पास से गुजर रहा था। वहां उसे एक बहुत कीमती हार मिला। उसने सोचा कि मैं किसी इंसान को इस हार के लालच में फंसा कर आसानी से मार सकता हूं।

bagh aur yatri Panchtantra ki kahani
bagh aur yatri Panchtantra ki kahani

उसने एक मुसाफिर को देखा जो दलदल के पास से गुजर रहा था। उसने उस मुसाफिर को आवाज लगाई और कहां, “मैं सोने का हार तुम्हें उपहार देना चाहता हूं। क्या तुम्हें हार चाहिए?”

वह लालची मुसाफिर बोला, “हां मुझे यह हार चाहिए, परंतु मैं तुम जैसे खतरनाक प्राणी पर भरोसा कैसे करूं?”

बाघ ने उसे फुसलाते हुए कहा, “मैं अब बूढ़ा हो गया हूं और अपने पापों के प्रायश्चित के लिए यहां खड़ा हूं। मैं तुम्हारा शिकार नहीं करूंगा, डरो मत।”

मुसाफिर ने बाघ की बातों पर भरोसा कर लिया और उसकी तरफ बढा। पास आते ही बाघ उस पर झपटा और उसे घसीटते हुए दलदल में ले गया और उसे मार डाला।

नैतिक शिक्षा :– लालच का फल हमेशा बुरा होता है।

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