चुहिया की शादी पंचतंत्र की कहानी | Chuhiya ki Shaadi Panchtantra ki kahani in Hindi

Chuhiya ki Shaadi | चुहिया की शादी

Chuhiya ki Shaadi Panchtantra ki kahani

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चुहिया की शादी पंचतंत्र की कहानी | Chuhiya ki Shaadi Panchtantra ki kahani in Hindi

गंगा नदी के किनारे एक साधु रहता था। उसके पास कई दिव्य शक्तियां थी। पर उसकी कोई संतान नहीं थी।

एक सुबह वह पूजा कर रहा था। तभी एक चील ने उसके हाथों में चुहिया गिरा दी। चुहिया बहुत डरी हुई थी। साधु ने अपनी जादुई ताकत से उसे एक लड़की बना दिया। साधु और उसकी पत्नी उस बच्ची को अपनी संतान की तरह पालने लगे जब लड़की बड़ी हुई तो साधु को उसकी शादी की चिंता हुई।

Chuhiya ki Shaadi Panchtantra ki kahani
Chuhiya ki Shaadi Panchtantra ki kahani

साधु अपनी बेटी के लिए एक ताकतवर पति चाहता था। साधु ने सूर्य देव से अपनी बेटी की शादी करने की प्रार्थना की। जब सूर्य देव आए तो साधु की बेटी ने शादी करने से इनकार कर दिया। उसने अपने पिता से कहा, “सूर्य देव में बहुत उर्जा है। मैं उनसे विवाह नहीं करूंगी।”

सूर्य देव ने बोला, “बादलों के राजा मुझसे ज्यादा ताकतवर है। वह मुझे भी ढक देते हैं।”

साधु ने बादलों के राजा को बुलाया। साधु की बेटी बोली, “बादल बहुत घने होते हैं और मुझे उनसे डर लगता है। पिताजी मैं बादल से शादी नहीं करूंगी।”

बादल ने कहा, “पवन देव मुझसे ज्यादा ताकतवर है, वह मुझे उड़ा देते हैं।”

जब साधु ने पवन देव को बुलाया तो उसकी बेटी बोली, “पिताजी यह बहुत तेज चलते हैं, मैं इनसे शादी नहीं करूंगी।”

पवन देव बोले, “पहाड़ मेरी भी गति को रोक देते हैं, वह मुझसे भी ज्यादा ताकतवर है। आपकी पुत्री के लिए वह श्रेष्ठ वर होंगे।”

साधु अपनी बेटी के साथ पहाड़ के पास गया। उसे देख कर साधु की बेटी बोली, “यह तो बहुत विशाल है और कड़े भी हैं। मैं उनसे विवाह नहीं कर सकती।”

साधु हताश हो गया और बोला, “पहाड़ों के देवता, क्या आप से ताकतवर भी कोई है?”

उन्होंने जवाब दिया, “मैं विशाल हूं, मुझे कोई नहीं हिला सकता। परंतु चूहा मेरे भीतर भी बिल बना लेता है।” साधु ने फिर चूहों के राजा को बुलाया। साधु की पुत्री को वह पसंद आ गया और वह बोली, “पिताश्री, मुझे यह पसंद है। मैं इन से ही विवाह करूंगी।”

यह सुनकर साधु ने अपनी बेटी को वापस चुहिया बना दिया। दोनों की शादी हो गई और साधु ने अपनी बेटी को आशीर्वाद देकर विदा किया। दोनों पहाड़ पर घर बनाकर रहने लगते हैं।

नैतिक शिक्षा :– आप किसी की प्रकृति को नहीं बदल सकते।

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