श्री नर्मदा माता जी की आरती – aarti narmada ji ki in Hindi

maa narmada ji ki aarti video – नर्मदा मैया की आरती

Narmada Ji Ki Aarti

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narmada ji ki aarti lyrics – मां नर्मदा की आरती

ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनंद कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर, रेवा शिव हरि शंकर, रुद्री पालन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

देवी नारद शारद तुम वरदायक, अभिनव पदचण्डी।
सुर नर मुनि जन सेवत, सुर नर मुनि शारद पदवन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

देवी धूमक वाहन राजत, वीणा वादयन्ती।
झूमकत झूमकत झूमकत, झननन झननन रमती राजन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

देवी बाजत ताल मृदंगा, सुरमण्डल रमती।
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान, तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

देवी सकल भुवन पर आप विराजत, निशदिन आनन्दी।
गावत गंगा शंकर, सेवत रेवाशंकर तुम भव मेटन्ती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

मैया जी को कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
अमरकंठ में विराजत, घाटन घाट कोटी रतन जोती॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

मैया जी की आरती निशदिन पढ़ि गावें, हो रेवा जुग जुग नर गावें।
भजत शिवानंद स्वामी, जपत हरि मन वांछित फल पावें॥

ॐ जय जगदानन्दी…॥

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नर्मदा माँ की कथा , narmada maa ki katha

माघ मास के महीने मे माघशुक्ल सप्तमी को भगवान शिव के पसीने से मां नर्मदा एक 12 वर्ष की कन्या के रूप मे प्रकट हुई थी। इसी लिए भी माह मास का महीना सबसे पवित्र माना जाता है, इस माह को देवताओं का ब्रह्मा मुहूर्त भी कहते हैं। इस महीने किए गए दान पुण्य का भी बहुत विशेष महत्व है।

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मां दिव्य आशीर्वाद से संपन्न

Narmada Ji Ki Aarti
Narmada Ji Ki Aarti

भगवान शिव के सभी अंशो मे दिव्य शक्ति होती है चाहे वे गणेश जी हों, हनुमान जी या फिर मां नर्मदा। एक समय की बात है ब्रह्रमां विष्णु सभी सभी देवी- देवता भगवान शिव के पास आए, वे अंधकासुर राक्षस का वध कर शांत- सहज समाधि मे बैठे थे। अनेक प्रकार से शिव जी की स्तुति करने पर भगवान ने आँखे खोली। सभी देवताओं ने भगवान से निवेदन किया कि “हे भगवन” बहुत से राक्षसों का वध करने के कारण हमने बहुत से पाप किए हैं। इसलिए उनके निवारण के लिए उपाय बताएं।

शिवजी के भृकुति से एक तेजोमय पसीने की बूँद पृथ्वी पर गिरी और कुछ ही देर में एक कन्या के रूप मे उपस्थित हो गई उस कन्या का नाम नर्मदा रखा गया था। सभी देवताओं ने उन्हे दिव्य आशीर्वाद दिया।

भगवान शिव के साथ ब्रह्रमां, विष्णु और सभी देवों ने उन्हे वर दिया, माघ शुक्ल सप्तमी के समय नर्मदा जी जल रूप में बहने लगी और तभी से इस दिन को नर्मादा अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। मां नर्मदा का जल बहुत ही पवित्र होता है और उनकी कृपा सभी भक्तों पर बनी रहती है।

Reference-
24 December 2020, Narmada Ji Ki Aarti, wikipedia

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