गऊ माता आरती – aarti Gau Mata Ki

आरती गऊ माता की – Gau Mata Ki aarti video

Gau Mata Ki aarti

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Gau Mata Ki aarti, Gomata Aarti lyrics –  श्री गौमाताजी की आरती

आरती श्री गैय्या मैंय्या की,आरती हरनि विश्‍व धैय्या की।

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…।

अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी,अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी।
सुर मानव सौभाग्या विधायिनी,प्यारी पूज्य नन्द छैय्या की॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…।

अखिल विश्व प्रतिपालिनी माता,मधुर अमिय दुग्धान्न प्रदाता।
रोग शोक संकट परित्राता,भवसागर हित दृढ नैय्या की॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…।

आयु ओज आरोग्य विकाशिनी,दुःख दैन्य दारिद्रय विनाशिनी।
सुष्मा सौख्य समृद्धि प्रकाशिनी,विमल विवेक बुद्धि दैय्या की॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…।

सेवक हो चाहे दुखदाई,सम पय सुधा पियावति माई।
शत्रु-मित्र सबको सुखदायी,स्नेह स्वभाव विश्व जैय्या की॥

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…।

आरती श्री गैय्या मैंय्या की,आरती हरनि विश्‍व धैय्या की।

आरती श्री गैय्या मैंय्या की…।

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भारत मे गाय को गौ माता माना जाता है। गाय एक पालतू पशु भी है, जो संसार मे सर्वत्र पाई जाती हैं। गाय का दूध भी उत्तम किस्म का होता है।

भारत मे वैदिक काल से ही गाय का बड़ा महत्व रहा है। आरंभ मे मनुष्य की समृद्धि की गणना उसकी गो संख्या से की जाती थी। हिंदू, धार्मिक दृष्टि से भी गाय को पवित्र मानते हैं तथा उसकी हत्या करना महा पातक पापों मे की जाती है।

गाय को गौ माता क्यों कहा जाता है?

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समुद्र मंथन के दौरान इस धरती पर दिव्य गाय की उत्पत्ति हुई थी। भारतीय गोवंश को माता का दर्जा दिया गया है इसलिए उन्हे गौ माता कहते हैं। हमारे शास्त्रों मे भी गाय को पूजनीय कहा जाता है, इसलिए घर मे रोटी बनाते समय पहली रोटी गाय के नाम की भी बनती है, गाय का दूध अमृत तुल्य होता है।

भारतीय गाय की दो मुख्य विशेषताएँ हैं-

1.       सुंदर कूबड़
2.       पीठ पर और गर्दन के नीचे त्वचा का झुकाव (गलकंबल)

भारत मे गाय की 30 से अधिक नस्लें पाई जाती हैं जैसे- रेड सिंधी, साहिवाल, गिर, देवनी, थार पारकर आदि नस्लें भारत में दुधारु गायों की प्रमुख नस्लें हैं।

भारतीय गाय को तीन वर्गों मे विभाजित किया जा सकता है। पहले वर्ग में वे गाएं आती हैं जो दूध तो बहुत देती हैं लेकिन उनकी पुसंतान कृषि मे अनुपयोगी होती हैं। इस प्रकार की गाए दुग्ध प्रधान एकांगी नस्ल की हैं। दूसरी गाए वे होती हैं जो दूध कम देती हैं किंतु उनके बछड़े कृषि और गाड़ी खींचने के काम आते हैं। इन्हे वत्सप्रधान एकांगी नस्ल कहते हैं। तथा कुछ गाएँ दूध भी प्रचुर मात्रा में देती हैं और उनके बछड़े भी कर्मठ होते हैं ऐसी गायों को सर्वांगी नस्ल की गाय कहा जाता है।

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Reference-
17 February 2017, Gau Mata Ki aarti, wikipedia

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