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श्री राम चंद्र कृपालु भजमन Shri Ram Chandra Kripalu with Lyrics I SURESH WADKAR (Video)

Ramchandra ji ki aarti lyrics In Hindi

॥ आरती श्री रामचन्द्रजी ॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन,हरण भवभय दारुणम्।
नव कंज लोचन, कंज मुख करकंज पद कंजारुणम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि,नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहुं तड़ित रूचि-शुचिनौमि जनक सुतावरम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

भजु दीनबंधु दिनेशदानव दैत्य वंश निकन्दनम्।
रघुनन्द आनन्द कन्द कौशलचन्द्र दशरथ नन्द्नम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

सिर मुकुट कुंडल तिलकचारू उदारु अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शर चाप-धर,संग्राम जित खरदूषणम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

इति वदति तुलसीदास,शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कंज निवास कुरु,कामादि खल दल गंजनम्॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

मन जाहि राचेऊ मिलहिसो वर सहज सुन्दर सांवरो।
करुणा निधान सुजानशील सनेह जानत रावरो॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

एहि भांति गौरी असीससुन सिय हित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनिमुदित मन मन्दिर चली॥

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन…॥

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श्री रामचन्द्रजी की आरती

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Ramchandra Ji Ki Janam Katha (Ramayan)

भारत मे जब भी न्याय के राज्य की बात आती है तो राम राज्य की बात होती है। श्री राम भगवान और सीता माता की कहानी सर्व प्रचलित है। अपने पिता के वचन के पालन के लिए 14 वर्ष का बनवास काटा। श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं।

लंका के रावण द्वारा सीता माता को उठा ले जाने पर राम चंद्र ने हनुमान जी की सहायता से समुद्र मे बांध बनाकर लंका पर चढ़ाई की और लंका पती रावण का वध कर सीता माता को छुड़ाया।

राम राज्य एक न्याय पूर्ण राज्य था उनका राज्याभिषेक बहुत कम उम्र मे हो गया था, लेकिन किन्ही परिस्थितियों के कारण उन्होनें राज गद्दी नही ली क्योंकि उनके अंदर न्याय की भावना थी, और इसलिए ही उन्होने राजा का पद छोड़ दिया। अपनी पत्नी सीता तथा छोटे भाई के साथ वन चले गए।

सभी सुख- सुविधाओं को छोड़कर वन की मुसीबतों को झेला, और उनके सामने कई समस्याएं आई लेकिन इन सभी घटनाओं का सामना करने पर भी न्याय और निस्वार्थ भावना दिखाई। हर परेशानी का सामना करने के लिए हर तरह से तैयार रहे और अपने राज्य मे न्याय स्थापित किया।

Written by Amit Singh

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