आरती श्री गायत्री जी की – Gayatri Mata aarti in hindi

जयति जय गायत्री माता आरती – jayati jai gayatri mata ki aarti video – aarti gayatri mata

Gayatri Mata Ki Aarti

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jayati jai gayatri mata aarti in hindi lyrics – gayatri mata aarti lyrics

जय गायत्री माता आरती गायत्री माता की सबसे प्रसिद्ध आरती में से एक है। यह प्रसिद्ध आरती माता से सम्बन्धित अधिकांश अवसरों पर गायी जाती है।

जयति जय गायत्री माता,जयति जय गायत्री माता
सत् मारग पर हमें चलाओ,जो है सुखदाता॥

जयति जय गायत्री माता…।

आदि शक्ति तुम अलख निरञ्जनजग पालन कर्त्री।
दुःख, शोक, भय, क्लेश,कलह दारिद्रय दैन्य हर्त्री॥

जयति जय गायत्री माता…।

ब्रहृ रुपिणी, प्रणत पालिनी,जगतधातृ अम्बे।
भवभयहारी, जनहितकारी,सुखदा जगदम्बे॥

जयति जय गायत्री माता…।

भयहारिणि भवतारिणि अनघे,अज आनन्द राशी।
अविकारी, अघहरी, अविचलित,अमले, अविनाशी॥

जयति जय गायत्री माता…।

कामधेनु सत् चित् आनन्दा, जय गंगा गीता।
सविता की शाश्वती शक्ति, तुम सावित्री सीता॥

जयति जय गायत्री माता…।

ऋग्, यजु, साम, अथर्व,प्रणयिनी, प्रणव महामहिमे।
कुण्डलिनी सहस्त्रार,सुषुम्ना, शोभा गुण गरिमे॥

जयति जय गायत्री माता…।

स्वाहा, स्वधा, शची,ब्रहाणी, राधा, रुद्राणी।
जय सतरुपा, वाणी, विघा,कमला, कल्याणी॥

जयति जय गायत्री माता…।

जननी हम है, दीन, हीन, दुःख, दरिद्र के घेरे।
यदपि कुटिल, कपटी कपूत, तऊ बालक है तेरे॥

जयति जय गायत्री माता…।

स्नेहसनी करुणामयि माता,चरण शरण दीजै।
बिलख रहे हम शिशु सुत तेरे,दया दृष्टि कीजै॥

जयति जय गायत्री माता…।

काम, क्रोध, मद, लोभ,दम्भ, दुर्भाव, द्वेष हरिये।
शुद्ध बुद्धि, निष्पाप हृदय,मन को पवित्र करिये॥

जयति जय गायत्री माता…।

तुम समर्थ सब भाँति तारिणी,तुष्टि, पुष्टि त्राता।
सत् मार्ग पर हमें चलाओ,जो है सुखदाता॥

जयति जय गायत्री माता…।

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108 Gayatri Mantra Mala, गायत्री मंत्र | ॐ भूर्भुवः स्वः | Hindi Mantra

गायंत्री मंत्र बहुत ही पवित्र मंत्र है इस मंत्र की अपार शक्ति है। जिसका उच्चारण करने से मन को बहुत शांति मिलती है।

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कौन है माँ गायत्री, कैसे करते है माता की पूजा और व्रत कथा – video Gayatri Jayanti

यह हिंदू धर्म की एक देवी हैं जिसके बारे मे महर्षि विश्वामित्र के द्वारा बताया गया है। अपितु यह ब्रह्मा देव की निर्मित और पत्नी है। इसका मूल रूप श्री सावित्रि देवी है। यह एक कठोर परंतु सर्व सिद्धी दात्री देवी मानी जाती हैं। गायत्री देवी की साधना के लिए गायत्री मंत्र का जप अनुष्ठान आदि किया जाता है।

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गायत्री तत्व क्या है और क्यों इस मंत्र की इतनी महिमा है,

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आर्ष मान्यता के अनुसार गायत्र एक ओर विराट् विश्व और दूसरी ओर मानव जीवन, एक ओर देवत्व और दूसरी और भूत्तव, एक ओर मन और दूसरी ओर प्राण, एक ओर ज्ञान और दूसरी ओर कर्म के पारस्परिक संबंधों की पूरी व्याख्या कर देती है। इस मंत्र के देवता सविता हैं। सविता सूर्य की संज्ञा है, सूर्य के नाना रूप हैं। इनमे सविता वह रूप है जो समस्त देवों को प्रेरित करता है।

जाग्रत् में सवितारूपी मन ही मानव की महती शक्ति है। जैसे सविता देव है, वैसे मन भी देव है। मन ही प्राण का प्रेरक है। मन और प्राम के इस संबंध की व्याख्या गायत्री मंत्र को इष्ट है। सविता मन प्राणों के रूप में सब कर्मों का अधिष्ठाता है, यह सत्य प्रत्यक्षसिद्ध है। इसे ही गायत्री के तीसरे चरण मे कहा गया है।

सविता के भर्ग की प्रार्थना में विशेष ध्वनि यह भी है कि सविता या मन का जो दिव्य अंश है। वह पार्थिव या भूतों के धरातल पर अवतीर्ण होकर पार्थिव शरीर में प्रकाशित हो। इस गायत्री मंत्र में अन्य किसी प्रकार की कामना नही पाई जाती। यहाँ एक मात्र अभिलाषा यही है कि मानव को ईश्वर की ओर से मन के रूप में जो दिव्य शक्ति प्राप्त हुई है उसके द्वारा वह उसी सविता का ज्ञान करे और कर्मों के द्वारा उसे इस जीवन में सार्थक करे।

Reference-
12 February 2021, Gayatri Mata Ki Aarti, wikipedia

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