sos full form in hindi – एसओएस का फुल फॉर्म क्या होता है और इसकी शुरुआत

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(Full form of SOS) एसओएस का फुल फॉर्म क्या होता है एस ओ एस (SOS) का नाम तो आपने बहुत बार सुना होगा लेकिन अगर आप इसका पूरा नाम और मतलब नही जानते तो आपके मन मे ये विचार भी आता होगा कि एस ओ एस “S O S” का फुल फॉर्म क्या होता है और इसका मतलब क्या होता है? तो आज हम आपको इस लेख मे एस ओ एस के संबंध मे सारी जानकारी दे रहे हैं।

भूतकाल मे इसका नाविकों द्वारा “By sailors” सबसे ज़्यादा उपयोग किया जाता था। क्योंकि उस समय वह आसानी से भटक जाते थे और उन्हे ढूंढना भी मुश्किल हो जाता था। कई बार तो किसी को ढूंढा ही नही जा सकता था। ऐसी स्थिति मे उन्हे सिर्फ एस ओ एस SOS सिगनल के द्वारा ही ढूंढा जा सकता था। तभी से इसका इस्तेमाल किया जाने लगा और लोगों ने इसे अपने तरीके से नाम देना शुरु कर दिया था।

जैसे – सेव अवर सोल, (Save our soul) सेव अवर शिप (Save our ship) और सेंड अवर सकोर (Send our succor) जिनमे से मुख्य रुप से ये नाम प्रसिद्ध हैं। अगर देखा जाए तो एस ओ एस का कोई एक फुल फॉर्म नही होता है बल्कि इसके कई सारे नाम होते हैं।

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What is the full form of SOS? एस ओ एस का फुल फॉर्म क्या होता है, sos ka full form kya hai

full form of SOS Save our soul
full form of SOS in Hindi हमे बचाओ
invention April 1, 1905
introduced by German government
full form of SOS

एस ओ एस (S O S) का फुल फार्म होता है “सेव अवर सॉल” (Save our soul) जिसे हिन्दी मे कहते हैं “हमे बचाओ” और जिसे इंग्लिश मे कहते हैं। “Save Our Souls” यह एक प्रकार का सिग्नल (Signal) है जिसकी मदद से मुसीबत मे फसे हुए लोगों की जान बचाई जा सकती है। (The lives of people trapped in the matter can be saved)

ऐसे कई प्रकार के सिगनल, (Signal) साइन (Sign) या फिर सिंबल (Symbol) होते हैं जिन्हे देखकर ये समझा जा सकता है कि यह मदद के लिए हैं और कोई परेशानी मे है और वो मदद के लिए पुकार रहा है। चाहे आप तक सामने वाले की आवाज़ पहुँचे या नही पहुँचे। लेकिन उन्हे देख कर ये समझ आता है कि उन्हे मदद की आवश्यकता है।

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SOS Meaning in Hindi – S O S का फुल फॉर्म – SOS Signal Full Form- SOS Emergency Full Form

Full form of SOS

20 वी शताब्दी के आस – पास वायरलेस रेडियोग्राफ मशीनों ने पहली बार जहाज़ो पर अपना रास्ता बनाया तो खतरे के समय सीवन को ध्यान आकर्षित करने के लिए संकट सिगनल और मदद मांगने का एक तरीका चाहिए था। एक तरीका जो स्पष्ट रुप से और तेजी से संचारित हो और जो अन्य संचारो को भ्रमित न करे।

सबसे पहले विभिन्न देशों के अपने “इन हाउस” In house संकट संकेत हुआ करते थे। जैसे अमेरिकी नौसेना ने एन सी (NC) का उपयोग किया। यह अंतर्राष्ट्रीय सिगनल कोड से संकट के समय समुंद्री सकेंत था।

मार्कोनी कंपनी, जिसने अपने उपकरणों और टेलीग्राफ और ऑपरेटरों को विभिन्न जहाज़ो को पट्टे पर दिया था। 1905 मे सीओडी COD का इस्तेमाल किया। इस प्रकार कई संकेतों के होने से भ्रम पैदा होता था। और संभवत: यह खतरनाक भी था।

तब एस ओ एस का गठन रेडियो नियमों मे जर्मन सरकार द्वारा 1 अप्रैल 1905 मे किया गया था। और फिर इसके तीन वर्ष पश्चात ये डिस्ट्रेस कोड Distress code के स्टैंडर्ड के रुप मे वर्ल्ड वाइड अपनाया गया। ये उन नाविको के लिए बहुत मददगार था जिनके खो जाने के बाद उनका मिलना मुश्किल था। तब से लेकर इसका उपयोग सिगनल भेजने के लिए किया जाता है। इसका फुल फॉर्म होता है “Save Our Souls”

सन 1906 मे बर्लिन मे वायरलेस टेलीग्राफ कंवेशन बुलाई गई और प्रतिनिधियों ने एक अंतरराष्ट्रीय मानक संकट कॉल स्थापित करने का प्रयत्न किया।

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What is SOS? एसओएस क्या होता है? – sos alert full form

full form of sos
full form of SOS

एसओएस संकट के लिए अंतराष्ट्रीय नाम है। लेकिन इसका उपयोग कब शुरु हुआ? रेगिस्तान के कार्टून, समुंद्री फ़िल्मे और इयरवार्म मे प्रसिद्ध एसओएस का उपयोग आपात काल के लिए किया जाता था। एस ओ एस एक SOS कोड वर्ड होता है। जिसका उपयोग संकट की स्थिति मे किया जाता है। अगर किसी को सहायता की आवश्यकता होती है तो वह इस कोड का उपयोग करता है। और इसके ज़रिए मदद के लिए सिगनल देता है कि वह व्यक्ति खतरे मे है और उसे मदद की आवश्यकता है।

एसओएस को लिखने का तरीका थोड़ा सा अलग होता है। इसके उपर बार लगाकर लिखा जाता है। जैसे (“…SOS…”) एस ओ एस एक अंतर्राष्ट्रीय मोड कोड होता है। इस डिस्ट्रेस कोड को इस प्रकार से बनाया दया है जिससे की इसे भेजने मे आसानी हो। इसमे सबसे पहले तीन डोट्स फिर तीन डेश और फिर से तीन डोट्स होते हैं। इसमे पहले और बाद के तीन डोट्स एस को प्रदर्शित करते हैं और बीच के तीन, डेश, ओ को प्रदर्शित करते हैं। (“…-…”)

कुछ समय पहले तक इस कोड का उपयोग इसलिए किया जाता था क्योंकि पहले लोग इधर- उधर आसानी से गुम हो जाते थे। और उन्हे ढ़ूँढना मुश्किल होता था। तब उन्हे इसी एसओएस सिगनल के माध्यम से बचाया जाता था। तब से इसका नाम सेव अवर सोल, सेव अवर शिप और सेंड अवर सोकर है।

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How to send SOS signal? SOS सिगनल कैसे भेजा जाता है

एक एसओएस सिगनल को भेजने के कई तरीके होते हैं। जिनमे से कुछ तरीके हम आपको नीचे बता रहे हैं। जिसकी सहायता से आपको जब भी ज़रुरत हो आप सिगनल का उपयोग करके अपनी सहायता के लिए बुला सकते हैं।

SOS Signal By Tapping – S O S सिगनल टेपिंग के द्वारा

SOS टेपिंग सिगनल भेजने के लिए बहुत अच्छा तरीका है। टेपिंग बात करने का एक माध्यम है। जिससे आप बिना कुछ बोले या बिना कोई इशारा किए सामने वाले से बाते कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए यह भी आवश्यक हो जाता है कि उसे भी टेपिंग आनी चाहिए।

जब भी आप खुद को ऐसे स्थान पर पाएं जहा आपको ऐसा महसूस हो कि आप फस गए हैं। या फिर आप किसी को अपनी मदद के लिए भी न बुला सकें जैसे- अपहरण, कहीं पर फस जाना या दब जाना आदि। उस समय बिना किसी को पुकारे या बिना किसी की सहायता के आप अपने लिए मदद बुला सकते हैं।

SOS Signal By light – S O S सिगनल लाइट के द्वारा

इसके माध्यम से भी आप संदेश भेज सकते हैं। इसके नाम से ही स्पष्ट हो रहा है। इसका उपयोग करके आप अपने आप को अंधेरे मे सुरक्षित कर सकते हैं। जैसे अगर आप किसी अंधेरे वाले जगह पर फसे हो तो आप अपने मोबाइल की या किसी प्रकार की आग जला कर सुरक्षा मांग सकते हैं।

SOS Signal By the mirror – SOS सिगनल मिरर के द्वारा

आप अगर कभी परेशानी मे फसे हो तो मिरर की सहायता से भी एसओएस सिगनल भेज सकते है। लेकिन इसके लिए सन लाइट Sun light का होना बहुत आवश्यक है। लेकिन यह भी ज़रुरी नही है कि आप एक मिरर का इस्तेमाल करें। आप किसी भी रिफ्लेक्ट Reflect करने वाली चीज़ का इस्तेमाल कर सकते हैं। जिससे सामने वाले को सिगनल पहुँचाया जा सके।

SOS Signal By smoke – SOS Alert स्मोक के द्वारा

स्मोक भी एक माध्यम है जिसके द्वारा सिगनल भेजा जा सकता है। इसके लिए आप किसी भी कोलोरेड स्मोक का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर स्मोक का रंग लाल है तो यह और भी अच्छी बात है। क्योंकि रेड रंग का प्रकीर्ण बहुत कम होता है। और इसलिए ही यह दूर से भी दिख जाता है।

इस लेख मे हमने आपको एसओएस क्या होता है? इस का फुल फॉर्म क्या होता है What is the full form of SOS? इस का फुल फॉर्म होता है (Save our soul) इसको भेजने के माध्यम और इसकी स्थापना आदि के बारे मे जानकारी दी है अगर आप इससे संबंधित कोई सलाह देना चाहते हैं तो हमे नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स मे कमेंट कर सकते हैं।

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SOS FAQ in Hindi

What is sos full form in medical? – मेडिकल में SOS का पूर्ण रूप क्या है?

एसओएस लैटिन भाषा से लिया गया है जिसका अर्थ है “सी ओपस सिट।” चिकित्सीय शब्दों में, एसओएस के अलग-अलग अर्थ हैं जैसे कि सर्जिकल परिणाम प्रणाली (Surgical Outcome Systems), SOS: का मतलब है इमरजेंसी यानी जरुरत पड़ने पर ही दवाई लें (यह आमतौर पर नुस्खे लिखते समय उपयोग किया जाता है।), महत्वपूर्ण अन्य पैमाने (Significant Others Scale) ,

How do you tapp SOS? – आप एसओएस सिगनल टैप कैसे करते हैं?

मोर्स कोड की भाषा में, “S” तीन छोटे बिंदु हैं / और “O” अक्षर तीन लंबे डैश हैं / “S” तीन छोटे बिंदु हैं । उन्हें एक साथ रखें और इस प्रकार आप एस.ओ.एस. को टैप कर सकते हैं

What is SOS in Mobile – मोबाइल में SOS मैसेज या कॉल कैसे करें

इंडिया में सिंगल एमेर्जेंसी नंबर है “112”। अगर आप किसी मुश्किल में या इमरजेंसी में है तो आप मदत लेने के लिए “112” नंबर अपने मोबाइल से डायल कर सकते हैं। यह सुविधा सारे 36 states में उपलब्ध है। हर android और apple मोबाइल में सॉस मैसेज भेजने की सुविधा भी होती है। आप अपने मोबाइल मैन्युअल में देख सकते हैं इनको एक्टिवटे कैसे करना है।

What is SOS in emergency? – आपातकालीन स्थिति में एसओएस क्या है?

हालांकि आधिकारिक तौर पर एसओएस केवल एक विशिष्ट मोर्स कोड अनुक्रम है जो किसी भी चीज़ के लिए संक्षिप्त नाम नहीं है, लोकप्रिय उपयोग में यह “सेव अवर सोल्स” और “सेव अवर शिप” जैसे वाक्यांशों से जुड़ा हुआ है। एसओएस को अभी भी एक मानक संकट संकेत के रूप में मान्यता प्राप्त है जिसे किसी भी सिग्नलिंग पद्धति के साथ उपयोग किया जा सकता है।

How do you respond to SOS? – आप एसओएस का जवाब कैसे देते हैं?

एसओएस को रेडियो पर “संकट कॉल” के रूप में भेजा गया है, “संकट संदेश” के बाद, कॉल और संदेश को स्वीकार करने और हाथ में संचार विधियों का उपयोग करके इसे रिले करने के लिए उचित प्रतिक्रिया है।

Reference-
2020, sos, wikipedia

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