The Biography Of Sonia Gandhi | सोनिया गाँधी की जीवनी | Sonia Gandhi biography in Hindi

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सोनिया गाँधी, एक भारतीय राजनैतिक हैं और वे गाँधी – नेहरू परिवार की बहु हैं। सोनिया गाँधी, भारतीय कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने पार्टी की लीडर-शिप,  साल 1998 में संभाली, राजीव गाँधी की मृत्यु के ठीक 7 साल बाद।

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The Biography Of Sonia Gandhi | सोनिया गाँधी की जीवनी | Sonia Gandhi biography in Hindi

ससुर/ Father in lawफ़िरोज़ गांधी
सास/ Mother in lawइंदिरा गाँधी
पति/ Husbandराजीव गाँधी
बच्चे/ Childernराहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी
The Biography Of Sonia Gandhi

Early life and his Education – शुरुवाती ज़िन्दगी और उनकी शिक्षा

The Biography Of Sonia Gandhi - सोनिया गाँधी की जीवनी

सोनिया गाँधी का जन्म साल 1946 में लुसिआना में हुआ था। उनके अलावा उनकी बहनें हैं, नादिया और अनूष्का। उनकी परवरिश रोमन कैथोलिक क्रिस्चियन तरह से हुई थी। उन्होंने 13 साल की उम्र में अपनी स्कूलिंग खत्म की। वे फ्लाइट अटेंडेंड बनना चाहती थीं। साल 1964, वे कैम्ब्रिज के बेल एजुकेशनल ट्रस्ट में इंग्लिश पढ़ने गयीं।  वहीँ आने वाले समय में राजीव गाँधी से वर्सिटी रेस्टोरेंट में मिलीं जहां वो पार्ट टाइम जॉब करती थीं, जब उन्होंने ट्रिनिटी कॉलेज में दाखिला लिया।

Political Career of Sonia Gandhi – सोनिया गाँधी का पोलिटिकल करियर

सोनिया गाँधी ने अपनी सास, इंदिरा गाँधी की मृत्यु के ठीक बाद और उनके पिता राजीव गाँधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही उन्होंने भारत की जनता से मिलना शुरू कर दिया था। साल 1984 में, राजीव गाँधी जब अमेठी से चुनाव में खड़े हुए उस वक्त भी सोनिआ ने, मेनका गाँधी के विरुद्ध कई रैलीयाँ की, जिसका फ़ायदा राजीव गाँधी को चुनाव में भी हुआ। राजीव गाँधी के 5 सालों बाद, इंदिरा गाँधी का नाम बोफ़ोर स्कैंडल में आने लगा।

भारतीय जनता पार्टी ने उनका नाम दिल्ली की मतदाता लिस्ट में होने का दवा किया, हांलाकि जब तक उनको भारत की नागरिकता नहीं मिली थी। पूर्व राष्ट्रपति, प्रणव मुखर्जी ने बयान दिया की साल 1983 में उन्होंने अपना इटली का पासपोर्ट जमा कर दिया और इटैलियन लॉ के हिसाब से  भारत की नागरिक बन गयीं हैं।

साल 1991 में, राजीव गाँधी की हत्या के बाद, सोनिया गाँधी ने प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर दिया। लेकिन बाद में  पी. वी. नरसिम्हा राव को चुना गया। पहले उन्होंने पार्टी कमान संभाली और उसकेव बाद वे प्रधानमंत्री बनें। साल 1996 का आम चुनाव कांग्रेस हार गयी और कई बड़े लीडरों ने कांग्रेस को विभाजित करने वाले कई बाघी नेताओं के विरुद्ध आवाज़ उठाई।

कांग्रेस के भाग्य को बदलने के लिए उन्होंने पार्टी ज्वाइन की और साल 1998 में पार्टी की कमान उनके हाथ में आ गयी। सोनिया के पार्टी ज्वाइन करने के 62 दिनों के भीतर ही उन्हें पार्टी का अध्यक्ष बना दिया गया। साल 1999 में हुए चुनावों में दो सीटों से लड़ने का फैसला दिया और दोनों ही सीटें जीतने के बाद उन्होंने अमेठी की सीट पर बैठने का फैसला किया और बेल्लारी को छोड़ दिया। उन्होंने बेल्लारी में बीजेपी की सुषमा स्वराज को हराया।

साल 1999 में वो अपोज़ीशन की नेता बनीं। जब बीजेपी की एन. डी. ऐ. जिसका नेतृत्व अटल बिहारी बाजपेयी कर रहे थे, उन्होंने अपोज़ीशन का ऑफिस लिया। और साल 2003 में उन्होंने अटल बिहारी बाजपेयी के विरुद्ध नो- कॉन्फिडेंस मोशन चालू  किया।

साल 2004 में, सोनिया गाँधी ने पूरे देश में ” आम आदमी ” के नाम से आम जनता के लिए कैंपेन शुरू करदी। उन्होंने बीजेपी के स्लोगन ” इंडिया शाइनिंग “ की काट करते हुए बयान दिया कि ” किसके लिए इंडिया शाइन कर रहा है ? ”  इन चुनावों में सोनिया गाँधी को दुबारा जीत हासिल की।

सोनिया गाँधी से उम्मीद की जा रही थी की वो प्रधानमंत्री बनेंगी । उन्हें सर्वसम्मति से लेफ्ट के समर्थन से 15-पार्टी गठबंधन, सरकार का नेतृत्व करने के लिए चुना गया, जिसे बाद में यूनाइटेड प्रॉविन्सेस अलाइंस (यूपीए) का नाम दिया गया। एनडीए ने एक बार फिर सोनिया गाँधी के  ‘विदेशी मूल’ का विरोध किया और एनडीए की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने अपना सिर मुंडवाने और “जमीन पर सोने” की धमकी दी, अन्य बातों के बीच, सोनिया को प्रधानमंत्री बन पातीं ।

चुनावों के कई दिनों बाद, सोनिआ गाँधी ने, प्रधानमंत्री के लिए मनमोहन सिंह के नाम की सिफारिश की। साल 2006 को, गाँधी ने लोकसभा से इस्तीफा देने की घोषणा की और साथ ही ऑफिस-ऑफ-प्रॉफिट विवाद के तहत राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के चेयरपर्सन के पद को छोड़ने कका फैसला लिया और अटकलें लगाईं कि सरकार राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के चेयरपर्सन के पद से मुक्त करने के लिए एक अध्यादेश लाने की योजना बना रही थी।

उन्हें 2006 में अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली से 400,000 से अधिक मतों के अंतर से फिर से चुना गया। राष्ट्रीय सलाहकार समिति और यूपीए की अध्यक्ष के रूप में, सोनिया गाँधी ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और सूचना का अधिकार कानून बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राहुल गाँधी ने 2019 में होने वाले आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी की लगातार दूसरी हार की जिम्मेदारी लेते हुए, 25 मई को अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद, पार्टी नेताओं ने उनकी जगह एक उपयुक्त उम्मीदवार के लिए विचार-विमर्श शुरू किया। कांग्रेस कार्य समिति ने 10 अगस्त को इस मामले पर अंतिम फैसला लेने के लिए बैठक की और एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें सोनिया गाँधी को अंतरिम अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालने के लिए कहा गया, जब तक कि एक सर्वसम्मत उम्मीदवार नहीं चुना जा सकता।

फरवरी 2020 में, गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जहां उन्होंने मांग की कि गृहमंत्री अमित शाह को उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों को रोकने में विफल रहने के लिए इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती के लिए  भी कहा। 

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Personal Life of Sonia Gandhi – सोनिया गाँधी की निजी ज़िन्दगी

The Biography Of Sonia Gandhi - सोनिया गाँधी की जीवनी

साल 1968 में, सोनिया गाँधी और राजीव गाँधी की शादी हिन्दू रीती रिवाजों से हुई। उन्होंने अपने पहले बच्चे , राहुल गाँधी को साल 1970 में  हुआ। फिर साल 1972 में उन्होंने अपने दूसरे बच्चे, प्रियंका गाँधी को जन्म दिया गया। राजीव गाँधी एयर इंडिया में  काम करते हैं और सोनिया गाँधी अक्सर घर में, बच्चों का पालन पोषण किया करती थीं। जब संजय गाँधी की मृत्यु के बाद, राजीव गाँधी  मंत्री बनने के बाद भी उन्होंने घर संभालने का फैसला किया और जनता से दूर रहने फैसला किया।

साल 2011 में, सोनिआ गाँधी की सर्वाइकल कैंसर की सक्सेसफुल सर्जरी हुई। उन्हें 2004 से 2014 तक का सबसे ताक़तवर राजनेता माना गया।

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Some books on Sonia Gandhi – सोनिया गाँधी पर लिखी गयी कुछ किताबें

  • एन एक्स्ट्राऑर्डिनरी लाइफ, एन इंडियन डेस्टिनी –  रानी सिंह
    An Extraordinary Life, An Indian Destiny –  Rani Singh
  • सोनिया गाँधी : ट्रिस्ट विद इंडिया – नुरुल इस्लाम सरकार
    Sonia Gandhi: Tryst with India – Nurul Islam Sarkar
  • रेड साड़ी – जेवियर मोरो
    Red Saree – javier moro 

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References
2020, The Biography Of Sonia Gandhi, Wikipedia
2020, सोनिया गाँधी की जीवनी, विकिपीडिया

नमस्कार, मेरा नाम उत्कर्ष चतुर्वेदी है। मैं एक कहानीकार और हिंदी कंटेंट राइटर हूँ। मैं स्वतंत्र फिल्म निर्माता के रूप में भी काम कर रहा हूँ। मेरी शुरुवाती शिक्षा उत्तर प्रदेश के आगरा में हुई है और उसके बाद मैं दिल्ली आ गया। यहां से मैं अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहा हूँ और साथ ही में कंटेंट राइटर के तौर पर काम भी कर रहा हूँ।

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