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The Biography of Indira Gandhi – इन्दिरा गाँधी की जीवनी

इन्दिरा प्रियदर्शनी गाँधी, भारतीय नेता और राष्ट्रीय कांग्रेस की मुख्या थीं। वे भारत की पहली और अभी तक की अकेली महिला प्रधान मंत्री थीं। इन्दिरा गाँधी, भारत के पहले प्रधान मंत्री, जवाहर लाल नेहरू की बेटी थीं।  इन्दिरा गाँधी, दूसरी सबसे लम्बे समय तक प्रधान मंत्री के कार्यकाल  संभाल ने वाली बनीं। उनसे पहले उनके पिता, सबसे लम्बे समय तक प्रधान मंत्री रहे थे। वे लाल बहादुर शास्त्री की कैबिनेट में सुचना एवं प्रधानमंत्री भी रहीं।

पिता/ Fatherजवाहरल लाल नेहरू
पति/ Husbandफ़िरोज़ गाँधी
पुत्र/ Sonsराजीव गाँधी, संजय गाँधी
पोते/ Grand sonsराहुल गाँधी, वरुण गाँधी
The Biography of Indira Gandhi

Early life – शुरुवाती जिंदगी

इन्दिरा गाँधी का जन्म, 19 नवंबर, 1917 को अलाहबाद में हुआ था। उनका जन्म कश्मीरी पंडितों के परिवार में हुआ था। वे जवाहर लाल नेहरू और कमला नेहरू की पहली बेटी थीं। उनके भाई जन्म के कुछ दिन में ही मर गए थे। इसके बाद, उनका बचपन बहुत अकेला बीता। कमला नेहरू, हमेशा बीमार रहती थीं और जवाहर लाल नेहरू, अपने राजनैतिक कामों में व्यस्त रहते थे। इन्दिरा गाँधी की शुरुवाती पढ़ाई भी घर में हुई। उनकी पढ़ाई होम ट्यूटर द्वारा ही हुई।

Education of Indira Gandhi – इन्दिरा गाँधी की शिक्षा

The Biography of Indira Gandhi - इन्दिरा गाँधी की जीवनी

इन्दिरा गाँधी ने 1934 में अपनी मैट्रिकुलेशन की परीक्षा पास की।इन्दिरा गाँधी, पढ़ने के लिए विश्व भारती, शांति निकेतन में गयी थीं। वहाँ रबिन्द्र नाथ टैगोर ने उनका नाम प्रियदर्शनी रख दिया था। जिसके बाद इन्दिरा गाँधी को हम “इन्दिरा प्रियदर्शनी गाँधी “  से भी जानते हैं।

इसके बाद वे अपनी बीमार माँ, कमला नेहरू के पास यूरोप चली गयीं और अपनी आगे की पढ़ाई, ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी से करने का निर्णय लिया। अपनी माँ की मृत्यु के बाद इन्दिरा गाँधी ने सोमरविले कॉलेज में पढ़ने का फैसला लिया। उन्होंने कॉलेज का एंट्रेंस एग्जाम दो बार दिया, लेकिन वो दोनों ही बार उसे पास करने में असमर्थ रहीं। वे इतिहास , इकॉनमी आदि जैसे विषयों में तोह अच्छा कर रहीं थी लेकिन लैटिन जो की उस एग्जाम की एक प्रमुख भाषा थी  उसे पास करने में असमर्थ थीं।

जब वे यूरोप गयीं तो काफी बीमार रहने लगीं और उनको स्वस्थ होने के लिए स्विट्ज़रलैंड जाना पड़ता था जिसके कारण उनकी यूनिवर्सिटी को  को बीच बीच में छोड़ना पड़ता था। साल 1941 वे किसी तरह इंग्लैंड गयीं और वहाँ से  भारत आ गयीं। इन्दिरा गाँधी ने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़।  बाद में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी  पोलिटिकल एंड इंटेल्लेक्टुअल स्टेटस को देखते हुए ,उनको डिग्री से सम्मानित किया।

Career of Indira Gandhi -इन्दिरा गाँधी का कैरियर

इन्दिरा गाँधी ने अपनी शादी के बाद अपने पिता प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू को उनके पहले कार्यकाल में असिस्ट किया। और साल 1950 के आखिर तक उन्होंने कांग्रेस की अध्यक्ष बनके उसकी बागडोर अपने हाथों में लेली। उनकी अगवाई वाली कांग्रेस पार्टी में, 1959 में केरल की सत्ता धारी कम्युनिस्ट को उखाड़ फेंका। सन् 1964 में ,  जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद उन्हें राजय सभा का सदस्य बनाया गया और उन्होंने, उस वक़्त के प्रधान मंत्री लाल बहादुर की कैबिनेट में सुचना एवं प्रचार मंत्री बनीं।

इन्दिरा गाँधी साल 1966 में लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु के बाद ,पहली बार प्रधान मंत्री बनीं।  उनके साथ मोरारजी जी देसाई, डिप्टी प्रधान मंत्री बनें लेकिन मीडिया और अपोज़िशन उनको कांग्रेस पार्टी की  ” गूंगी गुड़िया “ कहने लगे। 1967 में गाँधी का सही में टेस्स हुआ जब, 1967 के लोकसभा के चुनावों में उनको काम सीटें हासिल हुई क्यूंकि उस वक़्त तक चीज़ों के दाम बढ़ गए थे , बेरोज़गारी पूरे देश में फ़ैल गयी थी और साफ़ सफाई को भी नहीं सुधारा गया था। लेकिन इन्दिरा गाँधी, रायबरेली से चुन कर लोक सभा में आ गयीं। इन्ही कुछ कारणो से पार्टी ने अपनी सत्ता, कई राज्यों से गवा दी।

1971 में वे सोशलिस्ट पॉलिसी को लेकर आगे बढ़ीं और 1971 में होने वाले आम चुनावों में गरीबी हटाओ जैसा गंभीर मुद्दा लेकर प्रचार किया।  इसका फ़ायदा न सिर्फ उनको शहरों में हुआ इसके साथ साथ बाकि गाँव में भी इनका फ़ायदा इन्दिरा गाँधी और पूरी कांग्रेस पार्टी को हुआ। 

इन्दिरा गाँधी को सबसे ज्यादा फ़ायदा 1971 के  इन्डो पाक वॉर से हुआ जिसके बाद, बांग्लादेश का गठन हुआ। इसके बाद पूरे देश में सिर्फ इन्दिरा गाँधी की लहर दौड़ गयी। उस वक़्त के ऑपोज़ीशन  के नेता अटल बिहारी बाजपेयी  ने इन्दिरा गाँधी को दुर्गा की उपमा दी। अटल बिहारी बाजपेयी भी आगे जाकर भारत के प्रधान मंत्री बनें।

यहाँ पढ़ें : जवाहरलाल नेहरू की जीवनी

Emergency and post emergency tenure – इमरजेंसी  और उसके बाद का कार्य काल

1975 में अलाहबाद हाई कोर्ट नें इन्दिरा गाँधी का लोकसभा चुनाव को वोयड मान लिया क्योंकि उनपर गलत तरह से सीट जीतने का इल्ज़ाम लगा। पूरे 4 साल तक चले ट्रायल में आखिर कार इन्दिरा गाँधी को दोषी साबित किया गया। कोर्ट  ने उनकी पार्लिअमेंटरी सीट को वापिस लेलिया और अगले 6 साल तक उनको किसी भी तरह के ऑफिस को होल्ड करने से बैन कर दिया।

उन्होंने कोर्ट का ऑर्डर मानने से साफ़ इंकार कर दिया और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही।  उन्होंने कांग्रेस के फण्ड रेज़िंग पर लगे सारे इल्ज़ामों को ये कहते हुए खारिज कर दिया कि   पार्टियाँ  ऐसे ही करती हैं।

1975 में इन्दिरा गाँधी ने कई अपोज़िशन के नेताओं को अरेस्ट करने दे दिया, जो उस वक़्त इन्दिरा गाँधी का विरोध कर रहे थे। उन्होंने और उनकी कैबिनेट ने उस वक़्त के राष्ट्रपति फकरुद्दीन अली अहमद को पूरे देश में, जो अलाहबाद कोर्ट के ऑर्डर बाद जो असंवैधानिक गतिविधियों  हो रहीं हैं उन्हें देखते हुए, इमरजेंसी लगाने का प्रस्ताव रखा।  राष्ट्रपति ने भारत में चल रही गतिविधियों को देखते हुए इमरजेंसी की घोषणा करदी।

1977 में दो बार इमरजेंसी को बढ़ाने,  इन्दिरा गाँधी ने  की मांग की। उनको अभी भी ये ही लग रहा था की वे जनता के बीच उतनी ही पॉपुलर हैं, जितनी वे पहले थीं लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ भी नहीं था। इन्दिरा गाँधी का ये भ्रम भी जल्दी ही टूट गया जब 1977 के चुनावों में उनको जनता अलाइंस द्वारा हार का सामना करना पड़ा। उस वक़्त जनता अलाइंस ने चुनाव “डेमोक्रेसी या डिक्टेटरशिप” के मोटो से लड़ा।

कांग्रेस में भी दरार आगयी और सारे बड़े और दिग्गज नेता कांग्रेस की उस वक़्त की नीतियों से दूर होने लगे। उस बार कांग्रेस को बस मात्रा 153 ही सीटें आयी। यहां तक की इंदिरा गाँधी और संजय गाँधी अपनी अपनी सीटों से हार गए और कांग्रेस को ऑपोसिशन में बैठना पड़ा।

कांग्रेस की हार के बाद यशवंतरो चवण को पार्लियामेंट्री कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया। साल 1978 में उन्होंने चिकमंगलूर सीट से बई इलेक्शन जीते और लोक सभा की सदस्य बन गयीं। उस वक़्त के गृह मंत्री, चौधरी चरण सिंह ने इंदिरा गाँधी और संजय गाँधी को कई आपरादिक मामलों में गिफ्तार करने का ऑर्डर देदिया, जिसमें एक आरोप ये भी था कि उन्होंने इमरजेंसी के दौरान गिरफ्तार हुए जनता दाल  नेताओं को मारने की साजिश की थी। इसके बाद कांग्रेस के समर्थकों ने एयर इंडिया की फ्लाइट को हाई जैक कर लिया।

उनका ये कदम उनपर ही भारी पड़ गया। लेकिन उनकी गिरफ्तारी और लम्बे चले ट्रायल ने लोगों की सिम्पथी दोबारा हासिल कर ली।

कुछ समय बाद जनता अलाइंस, अंदरूनी फूट के कारण टूट गया और कोई बाहरी समर्थन ना मिलने के कारण उस वक्त्र के राष्ट्रपति रेड्डी ने 1979 में पार्लियामेंट को ख़त्म कर दिया। 1980 के आम चुनावों से पहले इंदिरा गाँधी ने जमा मस्जिद के शाही इमाम से मुलाक़ात की और मुस्लिम वोट पर चर्चा की। 

साल 1980 ने फिर से ऑपोसिशन का पत्ता साफ़ करदिया और अपनी सरकार बनाई। वे एक बार फिर से प्रधान मंत्री बनीं। उसी साल, संजय गाँधी की मौत  बाद इन्दिरा गांधी ने उनका सपना पूरा किया और मारुती को नेशनल कंपनी घोषित कर दिया और जापान की सुजुकी को भारत का न्योता दे दिया। संजय गाँधी की मौत  के बाद इन्दिरा गाँधी को सिर्फ राजीव गाँधी पर विश्वास रह गया था। और राजीव गाँधी को राजनीति में उतरना पड़ा।    

Family of Indira Gandhi – इन्दिरा गाँधी का परिवार

इंदिरा गाँधी ने 1941 में इंग्लैंड से लौटने के बाद फ़िरोज़ गाँधी से शादी करली। फ़िरोज़ गाँधी एक पारसी परिवार से ताल्लुक रखते थे लेकिन महात्मा गांधी से  प्रभावित होकर उन्होंने अपने नाम के आगे गाँधी लगाना शुरू किया। इंदिरा गाँधी ने साल 1944  में राजीव गाँधी और साल 1946 में संजय गाँधी को जन्म दिया। दोनों राजीव गाँधी और संजय गाँधी ने अपने राजनैतिक करियर में काफी कुछ हासिल किया। फ़िरोज़ गाँधी ने अपनी अंतिम साँसे साल 1960 में लीं।उनकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने की वजह हुई।

Assassination of Indira Gandhi and her legacy – इन्दिरा गाँधी की हत्या और उनकी विरासत

अक्टूबर 31, 1980 की सुबह जब इन्दिरा गाँधी अपने लॉन से होते हुए इंटरव्यू ख़त्म करके लौट रही थीं तब उनके दो बॉडीगार्डों ने ओपरेशन ब्लू स्टार के अंतर्गत उनकी गोली मार कर उनकी हत्या करदी। उनके बॉडीगार्ड, सतवंत सिंह और बिअंत सिंह ने अपनी सर्विस गन से इंदिरा गाँधी को गोली से छलनी कर दिया। इसके बाद अन्य बॉडीगार्डों ने बेअंत सिंह को गोली मार दी।

इन्दिरा गाँधी को एम्स कराया गया जहां उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बाद में सतवंत सिंह और केहर सिंह को इंदिरा गाँधी की  मौत की साजिश रचने और हत्या के आरोप में मृत्यु दंड की सज़ा दी गयी।

इन्दिरा गाँधी, नेहरू- गाँधी परिवार का ही हिस्सा थीं। उन्होंने दो ऐसे होनहार बच्चों को जन्म दिया जिन्होंने कांग्रेस और नेहरू-गाँधी परिवार को शिखरफ पे जाने में अपना हाथ बटाया। इन्दिरा गाँधी की याद में भी कई हॉस्पिटल, कॉलेज और स्मारकों का निर्माण कराया गया है।     

यहाँ पढ़ें : फ़िरोज़ गाँधी की जीवनी

Some books by Indira Gandhi – इन्दिरा गाँधी द्वारा लिखी गयीं कई किताबें

  • इटरनल इंडिया, 1978.
  • Eternal India, 1978
  • मेरा सच,  1979
  • My Truth, 1979
  • पीपलस एंड प्रोब्लेम्स, 1982
  • Peoples and Problems, 1982  

References

Written by Utkarsh Chaturvedi

नमस्कार, मेरा नाम उत्कर्ष चतुर्वेदी है। मैं एक कहानीकार और हिंदी कंटेंट राइटर हूँ। मैं स्वतंत्र फिल्म निर्माता के रूप में भी काम कर रहा हूँ। मेरी शुरुवाती शिक्षा उत्तर प्रदेश के आगरा में हुई है और उसके बाद मैं दिल्ली आ गया। यहां से मैं अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहा हूँ और साथ ही में कंटेंट राइटर के तौर पर काम भी कर रहा हूँ।

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