The Biography of Priyanka Gandhi – प्रियंका गाँधी की जीवनी

The Biography of Priyanka Gandhi – अमूमन राजनीति से सरोकार रखने वाली ज्यादातर हस्तियां किसी पहचान की मोहताज नहीं होती हैं, लेकिन भारतीय राजनीति की एक शख्सियत ऐसी भी है, जो सालों तक राजनीति से दूर रहने के बावजूद सत्ता के गलियारों में सूर्खियां बटोरती रहीं। गांधी परिवार से ताल्लुक रखने के बाद भी उन्होंने खुद को सियासी दुनिया से अलग रखा। मगर, जब कांग्रेस को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत पड़ी तो उन्होंने सियासत को अपनी दुनिया बनाने में जरा भी देर नहीं की। चुनावी मैदान में उतर कर हार से मायूस कांग्रेस में जोश भर देने वाली वो शख्सियत हैं प्रियंका गांधी वाड्रा।

नाम (Name)प्रियंका गांधी वाड्रा
जन्मतिथि (birthday)12 जनवरी 1972
आयु (age) 48
पिता (father) राजीव गांधी
माता (mother)सोनिया गांधी
भाई (brother) राहुल गांधी
पति (husband)रॉबर्ट वाड्रा
बेटा (son)रेहान वाड्रा
बेटी (daughter)मिराया वाड्रा
राजनीतिक पार्टी (party) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
The Biography of Priyanka Gandhi

Early Life and Her Education – प्रियंका गांधी का शुरुआती जीवन

प्रियंका का जन्म 12 जनवरी 1972 को गांधी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम राजीव गांधी और माता का नाम सोनिया गांधी है। जहां राजीव गांधी ने एक होनहार पायलट के तौर पर भारतीय एयरलाइन में उड़ान भरी, वहीं बाद में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर भी संभाली।

भारतीय राजनीति के सबसे रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखने वाली प्रियंका गांधी शुरू से ही बेहद शांत स्वभाव की थी। अपनी स्कूली शिक्षा (priyanka gandhi education) पूरी करने के बाद उन्होंने मनोविज्ञान में बैचलर्स की डिग्री हासिल की। जिसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बौद्ध अध्ययन में मास्टर्स (priyanka gandhi qualification) किया।

Career of Priyanka Gandhi – प्रियंका गाँधी का करियर

The Biography of Priyanka Gandhi

गाँधी ने नियमित रूप से रायबरेली और अमेठी की अपनी माँ और भाई के निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा किया था जहाँ उन्होंने लोगों के साथ सीधा व्यवहार किया।

वह निर्वाचन क्षेत्र में एक लोकप्रिय व्यक्ति हैं, हर जगह बड़ी भीड़ खींचती है; हर चुनाव में अमेठी में एक लोकप्रिय नारा “अमेठी का डंका, बिटिया प्रियंका” (अमेठी का स्पष्ट आह्वान प्रियंका [चुनावों को खड़ा करने के लिए है]) रहा है।

2004 के भारतीय आम चुनाव में, वह अपनी मां की अभियान प्रबंधक थी और अपने भाई राहुल गाँधी के अभियान की देख रेख में मदद की। 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में, जबकि राहुल गाँधी राज्यव्यापी अभियान में कामयाब रहे, प्रियंका गाँधी ने अमेठी और रायबरेली क्षेत्र की दस सीटों पर ध्यान केंद्रित किया और वहां दो सप्ताह बिताने के बाद सीट आवंटन पर पार्टी कार्यकर्ताओं के भीतर काफी अंतर पैदा करने की कोशिश की। ।

23 जनवरी, 2019 को, प्रियंका गाँधी ने औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश किया, उन्हें उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग के कांग्रेस की महासचिव नियुक्त किया  गया

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Personal Life of Priyanka Gandhi – प्रियंका गाँधी की निजी ज़िन्दगी

प्रियंका गांधी ने 18 फरवरी 1997(priyanka gandhi marriage) को दिल्ली के मशहूर बिजनेसमैन रॉबर्ट वाड्रा (priyanka Gandhi Robert vadra) के साथ सात फेरे लिए थे। उनकी शादी दिल्ली के 10 जनपथ मार्ग स्थित गांधी हाउस में धूम-धाम से की गयी। प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा के दो बच्चे (priyanka Gandhi children) हैं। उनके बेटे का नाम रेहान और एक बेटी का नाम मिराया है।

राजनीति से दूर प्रियंका गांधी

The Biography of Priyanka Gandhi - प्रियंका गाँधी की जीवनी
The Biography of Priyanka Gandhi – प्रियंका गाँधी की जीवनी

अमूमन भारतीय राजनीति का किस्सा गांधी परिवार के जिक्र के बिनाअधूरा है। देश की राजनीतिक इतिहास में गांधी परिवार हमेशा केंद्र में रहा है। बावजूद इसके उसी परिवार से ताल्लुक रखने वाली प्रियंका ने दशकों तक राजनीति से खुद को पूरी तरह से अलग रखा।

राजनीति से प्रियंका की नाराजगी जायज भी थी। दरअसल प्रियंका बचपन से ही अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (priyanka Gandhi and indira gandhi) के काफी करीब थीं और उनसे खासा प्रोत्साहित भी रहती थीं। लेकिन साल 1984 में इंदिरा गांधी की अकस्मात हत्या ने समूचे देश के साथ-साथ प्रियंका को भी सदमे में डाल दिया।

हालांकि प्रियंका ने इस घटना को भी जिंदगी का एक फलसफा मानकर कुबुल कर लिया। वो इदिंरा की मौत के गम से निकली ही थीं कि गांधी परिवार की खुशियों को एक बार फिर ग्रहण लग गया और महज छह साल बाद 1991 में एक चुनावी रैली के दौरान राजीव गांधी की एक बम धमाके में हत्या कर दी गई और शायद यहीं से प्रयंका ने सियासत से दूर रहने का फैसला कर लिया।

कांग्रेस के गढ़ में प्रियंका गांधी (priyanka Gandhi amethi)

The Biography of Priyanka Gandhi - प्रियंका गाँधी की जीवनी
The Biography of Priyanka Gandhi – प्रियंका गाँधी की जीवनी

प्रियंका गांधी भले ही औपचारिक तौर पर कांग्रेस का हिस्सा न बनी हो, लेकिन कांग्रेस की राजनीति में वो हमेशा सक्रिय रहीं। खासकर कांग्रेस के गढ़ अमेठी और रायबरेली की जनता ने उन्हें हमेशा अपने परिवार का हिस्सा माना और प्रियंका भी इस परिवार से कभी जुदा नहीं रही।

दरअसल साल 2004 के लोकसभा चुनावों में जब सोनिया गांधी ने सियासत की सरजमीं पर कदम रखा तो उन्होंने गांधी परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रायबरेली को ही अपनी संसदीय सीटचुना। सोनिया के लिए भारतीय राजनीति बिल्कुल नई थी, मगर यह भी सच था कि प्रियंका गांधी को राजनीति के गुण विरासत में मिले थे।

सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी (priyanka gandhi sonia gandhi)

The Biography of Priyanka Gandhi - प्रियंका गाँधी की जीवनी
The Biography of Priyanka Gandhi – प्रियंका गाँधी की जीवनी

लिहाजा 2004 के आम चुनावों में अमेठी और रायबरेली में प्रियंका ने ही सोनिया गांधी की तरफ से चुनाव प्रचार अभियानों की कमान संभाली। हालांकि प्रियंका पहली बार चुनावी रैलियों का हिस्सा बनी थी। मगर, सत्ता के गिलयारों में प्रियंका की छवि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मेल खाने लगी थी।

लोगों ने प्रियंका में इंदिरा को देखा और महज कुछ समय में ही राजनीति से दूर रहने वाली प्रियंका सियासत की चहेती हस्ती बन गईं। इन चुनावों के दौरान अमेठी और रायबरेली की गलियों में सिर्फ एक ही नारे की गूंज थी – अमेठी का डंका, बिटिया प्रियंका।

कांग्रेस के गढ़ में प्रियंका की प्रसिद्धि देख कर किसी के लिए भी कयास लगाना मुश्किल था कि प्रियंका सियासत से अभी-अभी रूबरू हुयीं हैं। नतीजतन रायबरेली की जनता ने कांग्रेस को हरी झंडी दे दी और न सिर्फ सूबे में बल्कि समूचे देश में कांग्रेस ने जीत का परचम लहराया।

प्रियंका गांधी और राहुल गांधी (priyanka gandhi and rahul gandhi)

कांग्रेस में अहम किरदार निभाने के बावजूद प्रियंका हमेशा बैकफ्रंट पर रहीं हैं। सोनिया गांधी की जीत से लेकर राहुल गांधी के राजनीतिक करियर के आगाज तक में प्रियंका गांधी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

साल 2008 में फिर से लोकसभा चुनावों का शंखनाद हुआ और इस बार चुनावी में मैदान में थे राहुल गांधी। राहुल ने अमेठी को अपनी संसदीय सीट चुना, वहीं सोनिया एक बार फिर से रायबरेली से संसदीय उम्मीदवार के रूप में खड़ी हुयीं। The Biography of Priyanka Gandhi

जाहिर है इस बार भी कांग्रेस के गढ़ में जीत का दारोमदार फिर से प्रियंका के हाथ में था। जहां एक तरफ प्रियंका ने सोनिया के लिए रायबरेली में चुनाव प्रचार की कमान संभाली, वहीं राहुल के साथ अमेठी की गलियों में भाई-बहन की जोड़ी लोगों के दिल में घर कर गयी।

इसी के साथ अमेठी और रायबरेली ने एक बार फिर गांधी परिवार को संसद के सदन के लिए अपना नुमाइंदा चुन लिया।

नरेंद्र मोदी और प्रियंका गांधी (narendra modi and priyanaka gandhi)

साल 2014 में आम चुनावों का आगाज हुआ। यह एक ऐसा दौर था जब देश की सियासी बयार ने पूरी तरह से अपना रुख बदल लिया था। जहां बीजेपी की तरफ से नरेंद्र मोदी गुजरात के विकास मॉडल के साथ पीएम के रेस में उतरे थे, वहीं कांग्रेस की तरफ राहुल गांधी पीएम पद के उम्मीदवार थे।

हालांकि इन चुनावों में दिल्ली की गद्दी कांग्रेस के हाथ से चली गई, जिसका एक बड़ा कारण था प्रियंका गांधी का कांग्रेस के गढ़ तक सीमित रहना। चुनावी नतीजों में कांग्रेस की हार के बाद सियासी गलियों में सुगबुगाहट हो रही थी कि अगर प्रियंका गांधी पीएम उम्मीदवार होतीं तो शायद कांग्रेस केंद्र में वापसी करने में कामयाब हो जाती।

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सियासत में प्रियंका गांधी की औपचारिक एंट्री(priyanka gandhi political career)

दशकों तक समूचे देश की सियासत पर राज करने वाली कांग्रेस 2019 के आम चुनावों तक महज कुछ राज्यों में सिमट कर रह गयी थी। मोदी सरकार ने कांग्रेस मुक्त भारत को अमली जामा पहना दिया था, तो राहुल गांधी कांग्रेस की रेलगाड़ी को पटरी पर लाने में असफल होते नजर आ रहे थे।

लिहाजा हार और जीत की मझधार में फंसी पार्टी की नौका को पार लगाने के लिए प्रियंका गांधी ने औपचारिक रूप से कांग्रेस की कमान संभाल ली। राजनीति में प्रियंका की एंट्री(priyankagandhi  2019 election) ने उम्मीद खो चुके कार्यकर्ताओं में जोश भर दिया।

प्रियंका ने पार्टी सचिव के तौर पर पूर्वाचंल ( पूर्वी उत्तर प्रदेश) (priyankagandhiup) का दारोमार संभाला। राजनीतिक अखाड़े में प्रियंका के उतरते ही लोगों ने एक बार फिर प्रियंका के रूप में इंदिरा गांधी को अपने सामने पाया। प्रियंका की सादगी से लेकर बोलने के लहजे तक उनके हर अंदाज को इंदिरा की विरासत के रूप में देखा जाने लगा।

जाहिर है उनकी इस छवि का कांग्रेस ने भी जमकर फायदा उठाया और प्रियंका की राजनीति एंट्री को इंदिरा की वापसी करार दिया गया। हालांकि कांग्रेस के इन पैंतरों का जनता के ऊपर कोई असर नहीं पड़ा और कांग्रेस को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस शासित राज्यों में प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी की राजनीति में दस्तक ने भले ही दिल्ली की गद्दी पर असर न डाला हो लेकिन उनके राजनीति करियर के आगाज को देश के कई राज्यों ने जीत के जोश से भर दिया। The Biography of Priyanka Gandhi

पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने जीत हासिल की और कांग्रेस मुक्त भारत में एक बार फिर कांग्रेस की वापसी हो गयी।

इन राज्यों में सरकार बनने के बाद भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मिलकर ज्योतिरादित्या सिंधिया (priyankagandhijyotiradityascindia) और सचिन पायलट (priyanka gandhi sachin pilot) जैसे युवा नेताओं से लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं तक से सीधा सरोकार रखा।

प्रियंका गांधी के राजनीतिक करियर का विश्लेषण

 प्रियंका गांधी ने बेशक औपचारिक रूप से खुद को सत्ता से दूर रखा लेकिन गांधी परिवार का हिस्सा होने के नाते सत्ता उनसे कभी दूर न हो सकी। यही कारण था कि राजनीति में न होने के बावजूद भी प्रियंका सक्रिय राजनीति का हिस्सा रहीं।

पहले प्रियंका ने सोनिया गांधी के लिए चुनावी प्रचार की अगुवाई की और फिर अमेठी रायबरेली की बेटी होने के साथ राहुल गांधी को संसद के सदन तक पहुंचाने में बेहद अहम किरदार निभाया। The Biography of Priyanka Gandhi

2014 में प्रियंका एक बार फिर कांग्रेस के गढ़ तक सिमट कर रहीं। 2019 के आम चुनावों में पार्टी को प्रियंका की जरूरत पड़ी तो उन्होंने एक बार फिर राजनीति में औपचारिक रूप से भाग लेकर सबको चौंका दिया।

बावजूद इसके प्रियंका सिर्फ कांग्रेस के पीएम उम्मीदवार राहुल गांधी के चुनाव प्रचार तक ही सीमित रहीं। सियासत का हिस्सा बनने के बाद भी प्रियंका ने न तो चुनावों में हिस्सा लिया और न ही अपने लिए किसी संसदीय सीट का चुनाव किया। प्रियंका अब भी पूर्वाचंल की पार्टी सचिव हैं। साथ ही प्रियंका केंद्रमें कांग्रेस की वापसी को लेकर सक्रिय सियासत की मशहूर शख्सियत भी बन चुकीं हैं।

References

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