संगठन की शक्ति पंचतंत्र की कहानी | sangathan ki shakti Panchatantra ki kahaniya in Hindi

रोज़ एक कहानी : पंचतंत्र की कहानियाँ 36 : संगठन की शक्ति : Sangthan ki Shakti

sangathan ki shakti Panchatantra ki kahaniya

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sangathan ki shakti Panchatantra ki kahaniya in Hindi

एक बार की बात है, एक वन में बहुत बड़ा अजगर रहता था।

वह बहुत अभिमानी और अत्यंत क्रूर था। जब वह अपने बिल से निकलता तो सब जीव उससे डरकर भाग खड़े होते। उसका मुंह इतना विकराल था कि खरगोश तक को निगल जाता था।

एक बार अजगर शिकार की तलाश में घूम रहा था। सारे जीव तो उसे बिल से निकलते देखकर ही भाग चुके थे। उसे कुछ न मिला तो वह क्रोधित होकर फुफकारने लगा और इधर-उधर खाक छानने लगा।

वहीं निकट में एक हिरणी अपने नवजात शिशु को पत्तियों के ढेर के नीचे छिपाकर स्वयं भोजन की तलाश में दूर निकल गई थी।

sangathan ki shakti Panchatantra ki kahaniya
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अजगर की फुफकार से सूखी पत्तियां उड़ने लगी और हिरणी का बच्चा नज़र आने लगा। अजगर की नज़र उस पर पड़ी ।

हिरणी का बच्चा उस भयानक जीव को देखकर इतना डर गया कि उसके मुंह से चीख तक न निकल पाई। अजगर देखते-ही-देखते नवजात हिरण के बच्चे को निगल लिया।

तब तक हिरणी भी लौट आई थी, पर वह क्या करती? आंखों में आंसू भर जड़ होकर दूर से अपने बच्चे को काल का ग्रास बनते देखती रही।

हिरणी के शोक का ठिकाना न रहा। उसने किसी-न किसी तरह अजगर से बदला लेने की ठान ली। हिरणी की एक नेवले से दोस्ती थी।

शोक में डूबी हिरणी अपने मित्र नेवले के पास गई और रो-रोकर उसे अपनी दुख भरी कथा सुनाई। नेवले को भी बहुत दुख हुआ।

वह दुख-भरे स्वर में बोला `मित्र, मेरे बस में होता तो मैं उस नीच अजगर के सौ टुकड़े कर डालता। पर क्या करें, वह छोटा-मोटा सांप नहीं है, जिसे मैं मार सकूं। वह तो एक अजगर है। अपनी पूंछ की फटकार से ही मुझे अधमरा कर देगा।

लेकिन यहां पास में ही चीटिंयों की एक बांबी है। वहां की रानी मेरी मित्र है। उससे सहायता मांगनी चाहिए।`

हिरणी ने निराश स्वर में विलाप किया `पर जब तुम्हारे जितना बडा जीव उस अजगर का कुछ बिगाड़ने में समर्थ नहीं है तो वह छोटी-सी चींटी क्या कर लेगी?`

नेवले ने कहा `ऐसा मत सोचो। उसके पास चीटियों की बहुत बड़ी सेना है। संगठन में बड़ी शक्ति होती है।`

हिरणी को कुछ आशा की किरण नज़र आई। नेवला हिरणी को लेकर चींटी रानी के पास गया और उसे सारी कहानी सुनाई।

चींटी रानी ने सोच-विचारकर कहा `हम तुम्हारी सहायता करेंगे। हमारी बांबी के पास नुकीले पत्थरों से भरा एक संकरा रास्ता है।

तुम किसी तरह उस अजगर को उस रास्ते से आने पर मजबूर करो। बाकी काम मेरी सेना पर छोड़ दो।` नेवले को अपनी मित्र चींटी रानी पर पूरा विश्वास था, इसलिए वह अपनी जान जोखिम में डालने पर तैयार हो गया।

दूसरे दिन नेवला जाकर सांप के बिल के पास अपनी बोली बोलने लगा। अपने शत्रु की बोली सुनते ही अजगर क्रोध में भरकर अपने बिल से बाहर आया।

नेवला उसी संकरे रास्ते वाली दिशा में दौड़ा। अजगर ने पीछा किया। अजगर रुकता तो नेवला मुड़कर फुफकारता और अजगर को गुस्सा दिलाकर फिर पीछा करने पर मजबूर करता। इसी प्रकार नेवले ने उसे संकरीले रास्ते से गुज़रने पर मजबूर कर दिया।

नुकीले पत्थरों से उसका शरीर छिलने लगा। जब तक अजगर उस रास्ते से बाहर आया तब तक उसका काफी शरीर छिल गया था और जगह-जगह से खून टपक रहा था।

उसी समय चीटियों की सेना ने उस पर हमला कर दिया। चीटियां उसके शरीर पर चढ़कर छिले स्थानों के नंगे मांस को काटने लगीं।

अजगर तड़प उठा। अपना शरीर पटकने लगा जिससे और मांस छिलने लगा और चींटियों को आक्रमण के लिए नए-नए स्थान मिलने लगे। अजगर चींटियों का क्या बिगाड़ता?

वे हज़ारों की गिनती में उस पर टूट पड़ी थीं। कुछ ही देर में क्रूर अजगर ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया।

सीखः  संगठन की शक्ति बड़े-बड़ों को धूल चटा देती है।

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