गजराज और मूषकराज – पंचतंत्र – gajraj aur mushakraj

बहुत पुरानी घटना है…..

एक बार पूरा गांव भीषण भूकंप के झटकों से बरबाद हो गया। चारों और तबाही – ही – तबाही दिखाई दे रही थी।

गांव पूरी तरह उजड़ गया था और गांव वासी पड़ोस के गांव में जाकर रहने लगे थे।

मौका अच्छा देख कर खाली घरों में चूहों ने डेरा जमा लिया। कुछ सौ से हजार हुए, फिर लाख… इस तरह उनकी जगह बढ़ती ही गई।

इसी उजाड़ गांव के निकट एक तलाब था, जहां हाथियों का झुंड पानी पीने आया करता था। यहां तक पहुँचने के लिए हाथियों को गांव के खंडहरों से होकर गुजरना पड़ता था।

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हाथियों के भारी भरकम पैरों तले रोज सैकड़ों चूहे कुचल जाते, कुछ मर जाते तो कुछ सदा के लिए ही अपंग हो जाते। चूहे इस समस्या से परेशान, उदास रहते थे। लेकिन कुछ भी करने में असहाय थे।

इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए एक दिन चूहों ने सभा की, जिसमें निर्णय लिया गया कि इस बारे में हाथियों के राजा से बात की जाए।

एक दिन चूहों का राजा हाथियों के राजा के पास जाकर बोला, “महाबली ! हम गांव के उजाड़ पड़े घरों मे रहते हैं और जब भी हाथियों का झुंड पानी पीने के लिए वहां से गुजरता है तो हमारे बहुत से साथी उनके पैरों तले कुचल जाते हैं।

अत: कृपया करके आप अपना रास्ता बदल लें। इसके बदले हम से जो बन पड़ेगा आपकी सेवा करेंगे, मौका पड़ा तो आपके काम आएंगे”।

यह सुन कर हाथियों का सरदार जोर से हंस पड़ा, “तुम इतने छोटे से भला हमारी क्या मदद कर सकते हो। लेकिन मैं फिर भी अपने साथियों को रास्ता बदलने को कह दूँगा”।

चूहों का राजा उसे धन्यवाद अदा करके घर लौट चला। उसे लग रहा था कि अब मुसीबत टल जाएगी।

और ऐसा ही हुआ भी, हाथियों ने अपना रास्ता बदल लिया था।

कुछ समय बाद वहां के राजा को अपनी सेना के लिए और हाथियों की जरूरत पड़ी तो उसने सैनिकों को जंगल से हाथियों को पकड़ लाने को कहा।

सैनिक जब जंगल पहुँचे तो उन्हे हाथियों का यही झुंड दिखाई दिया।

उन्होनें बेहद मजबूत जाल बिछा दिया, जिसमे कई हाथी फंस गए।

उससे निकलने की उनकी सारी कोशिशे नाकाम रही।

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जाल में फसे असहाय हाथी सोच रहे थे कि इस बिन बुलाई मुसिबत से छुटकारा कैसे पाया जाए।

तभी अचानक हाथियों के सरदार को चूहों के सरदार की बात याद आ गई।

वह उसे बुलाने के लिए जोरों से चिंघाड़ने लगा।

चूहों के राजा ने जब उसकी चिंघाड़ सुनी तो वह तुरंत अपने साथियों के साथ वहां पहुँचा, जहां हाथी मजबूत जाल में कैद थे।

स्थिति की गंभीरता को देखते ही वह समझ गया कि क्या करना है।

उसने अपने सभी चूहों साथियों को एक खास इशारा किया।

सभी चूहे अपने सरदार का इशारा समझ कर काम में जुट गए और थोड़ी ही देर में जाल को काट डाला।

सभी हाथी अब स्वतंत्र थे। उन्होनें सभी चूहों का शुक्रिया अदा किया और दोस्ती सदा बनाए रखने का  वचन भी किया।

शिक्षा – किसी को भी छोटा समझ कर उसकी उपेक्षा नही करनी चाहिए, आड़े वक्त पर छोटा आदमी भी काम दे जाता है।

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