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बंदर और लकड़ी का खूंटा – bandar aur lakdi ka khunta – पंचतंत्र

कुछ बंदर एक पेड़ पर बैठे हुए थे। वहीं पास में मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा था। एक बढ़ई लकड़ी के एक बड़े लठ्टे को बीच में से चीर रहा था। तभी भोजन के लिए अवकाश हो गया। उस बढ़ई ने चीरे हुए भाग के बीच में एक बड़ी सी खूंटी फसा दी। और अपने साथियों के साथ भोजन करने चल दिया।

bandar aur lakdi ka khunta

पेड़ पर बैठे बंदरों ने जब देखा कि सभी लोग चले गए हैं तो वे पेड़ से नीचे उतर कर  मंदिर के निकट आ गए। वे वहां पड़ी चीजों और औजारों से खेलने लगे। उनमे से एक बंदर कुछ ज्यादा ही खुराफाती था।

वह उस आधे चिरे हुए टुकड़े के पास जा पहुँचा और उसके ऊपर जाकर बैठ गया। उसने अपनी टांगों को लठ्टे के दोनो और टिका दिया, उसकी पूँछ चिरे हुए हिस्से के बीच लटकने लगी थी।

bandar aur lakdi ka khunta
bandar aur lakdi ka khunta

 अब उस नटखट बंदर ने चिरे हुए भाग के बीच फंसी खूटी को खींचना शुरु कर दिया। कुछ देर बाद वह खूंटी अचानक ही बाहर आ गई और लठ्टे के दोनो चिरे हुए हिस्से आपस मे चिपक गए। बंदर की पूँछ बीच में ही दब गई थी। अब वह चीखता चिल्लाता उछल कूद करने लगा था। जब वह किसी तरह से वहां से निकला तो उसकी पूँछ नदारद थी, वह तो चिरे हुए लठ्टे के बीच मे दबी पड़ी थी।

शिक्षा – कुछ भी करने से पहले सोच – विचार अवश्य करें।

Written by savita mittal

मेरा नाम सविता मित्तल है। मैं एक लेखक (content writer) हूँ। मेैं हिंदी और अंग्रेजी भाषा मे लिखने के साथ-साथ एक एसईओ (SEO) के पद पर भी काम करती हूँ। मैंने अभी तक कई विषयों पर आर्टिकल लिखे हैं जैसे- स्किन केयर, हेयर केयर, योगा । मुझे लिखना बहुत पसंद हैं।

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