सियार और ढोल पंचतंत्र की कहानी | siyar aur dhol Panchtantra ki kahani in Hindi

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siyar aur dhol Panchtantra ki kahani

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siyar aur dhol Panchtantra ki kahani in Hindi

एक बार की बात है एक भूखा सियार खाने की तलाश में भटकते – भटकते जंगल के दूसरे छोर तक चला गया। तभी वहां अचानक तेज हवा चली और एक पेड़ के पीछे गिरा हुआ युद्ध का बज पड़ा। खाली जंगल में आवाज गूंज गई और सियार डर गया।

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उसने सोचा, “जरूर कोई भयानक पशु उस पेड़ के पीछे छिपकर बैठा होगा। इससे पहले कि वह मुझे खाए मुझे भाग जाना चाहिए।”

उसने फिर सोचा कि, “मैं बिना देखे कैसे कह सकता हूं की उस पेड़ के पीछे कोई खतरनाक जानवर है।”

ऐसा सोचकर सियार वापस मुड़ा और उसने पेड़ के पीछे देखा तो पाया की जिस चीज से वह इतना डर रहा था, वह तो मामूली सा एक ढोल था यह देखकर सियार की जान में जान आ गई और खाने की तलाश में वह आगे बढ़ने लगा।

नैतिक शिक्षा :– वीर ही अपने कार्य में सफल होते हैं।

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