Essay On Lockdown In Hindi | लॉकडाउन पर निबंध | Lockdown Essay in Hindi | lockdown par nibandh

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प्रस्तावना- Essay On Lockdown In Hindi | लॉकडाउन पर निबंध | Lockdown Essay in Hindi | lockdown par nibandh

विश्व के इतिहास में सन 2020 एक काले अध्याय के रूप में जाना जाएगा । जब कोरोना नामक महामारी ने 2019 के अंत और 2020 के प्रारंभ में कहर बरपाना शुरू किया । इस महामारी का आतंक इतना भयानक था सारा विश्व सहम गया था । कोरोना महामारी का पूरे विश्व के पास कोई इलाज नहीं था । इसके प्रसार को रोकना ही एक मात्र उपाय था ।

इसके लिए आवश्यक था लोगों के बीच दूरी रखा जाए, भीड़ इकट्ठा न होने दिया जाए, और सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन किया जाए । इसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अंतिम हथियार के रूप विश्व के अधिकांश देशों ने अपने-अपने देशों में लॉकडाउन लगाया । इस लॉकडाउन में लोग स्वयं अपने आप को अपने चारदीवारी में बंद कर लिए थे ।

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लॉकडाउन का अर्थ एवं अभिप्राय-

लॉकडाउन का शाब्दिक अर्थ तालाबंदी होता है । लॉकडाउन एक ऐसी आपातकालीन व्यवस्था है जिसमें लोगों को घर से बाहर जाने से रोका जाता है । लॉकडाउन की स्थिति में कोई व्यक्ति अपने घर से बाहर नहीं जा सकता । हालांकि इस बीच लोगों अनिवार्य सेवा जैसे राशन, सब्जी, स्वास्थ्य आदि की आपूर्ति सुनिश्चित किया जाता है ।

Essay On Lockdown In Hindi
Essay On Lockdown In Hindi

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भारत में लॉकडाउन

कोरोना के प्रसार को रोकने लिए पूरे विश्‍व में लॉकडाउन लगाया जा रहा था । भारत में लॉकडाउन की शुरुआत जनता कर्फ्यू से हुआ । भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के आह्वान पर 22 मार्च 2020 को जनता स्वयं को अपने आप अपने घर में 24 घंटे के लिए कैद कर लिया । जनता  कर्फ्यू  के सफलता के बाद पहली बार 24 मार्च 2020 को 21 दिनों के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया । यह लॉकडाउन क्रमिक रूप पांच चरणों में 30 मई 2020 तक चला । इतने समय तक पूरे देश में एक साथ लॉकडाउन रहा ।

हालांकि इसके बाद भी जहां-जहां कोरोना पाजिटिविटी दर अधिक रहा वहां क्षेत्रवार लॉकडाउन जारी रहा । इस लॉकडाउन का सिलसिला 2021 तक जारी रहा । 2021 में लॉक डाउन पूरे देश में एक साथ न लगाकर राज्यवार लगाया गया । कुल मिलाकर कमोबेश भारत दो वर्षों तक लॉकडाउन में कैद रहा ।

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लॉकडाउन की भयावता

जहां कोरोना महामारी का भय इतना भयानक था की लोग दिन प्रतिदिन कोरोना के पॉजिटिविटी बढ़ने की दर देख कर दहशत में थे । अस्पतालों में मरीजों के लिए बेड, ऑक्सीजन आदि मूलभूत सुविधा नहीं मिल पा रहे थे, कोरोना के मृत्‍यु दर में वृद्धि हो रही थी । इस स्थिति में लॉकडाउन से शहर और गॉंव की गलिया सुनी हो गई थी । लोग एक दूसरे मिलने की बात सोच भी नहीं सकते थे ।

यहां तक परिवार के लोग एक दूसरे से मिल नहीं पा रहे थे । जो जहां थे वहीं रुकने के लिए विवश थे । यह दौर उन लोगों के लिए और कठिन साबित हो रहा था जो छोटे से कमरे में रह रहे थे, जिनके यहां शौचालय और पानी की सुविधा नहीं थी । आज लॉकडाउन के उस दृश्य की कल्पना कर रूह कांप जाता है ।

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लॉकडाउन के नुकसान-

लॉकडाउन के समय लोगों का जीवन जीना दूभर हो गया था, विशेष कर रोज कमाने और रोज खाने वालों का हालांकि सरकार नि:शुल्‍क खाद्य आपूर्ति कर रहा था फिर भी जीना कठिन था क्योंकि जीने के लिए खाद्यान्न के अतिरिक्त पानी, दाल-सब्जी, रसोई गैस आदि की भी आवश्यकता होती है, काम-धाम बंद होने के कारण लोगों के हाथ में पैसा बिल्कुल नहीं था ।

लॉकडाउन के चलते दैनिक मजदूर, फूटकर व्यवसायी, निजी कंपनियों के कर्मचारी रोजमर्रा के खर्चे के लिए त्राहि-त्राहि कर उठे थे । बहुत लोगों का व्यवसाय बंद हो गया तो बहुत लोगों की नौकरी चली गई ।

सबसे बड़ा नुकसान शिक्षा जगत का हुआ लॉकडाउन के स्‍कूल बंद हो गए । हमारे बच्चों की पढ़ाई बंद हो गई, हालांकि ऑनलाइन कक्षाएं लगाई गई किन्तु यह केवल शहरों में प्रभावी रहा गांव बच्चे पढ़ाई से दूर रहे दो वर्षों तक बच्चों को जनरल प्रमोशन दिया गया । आज जांचने पर इन दो वर्षों के विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर न्‍यूनतम स्‍तर से नीचे चला गया है ।

बहुत लोग घर में बैठे-बैठे अवसाद के शिकार हो गए । मानसिक रूप बहुत परेशान रहने लगे । कुल मिलाकर लॉकडाउन से लोगों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक नुकसान हुआ ।

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लॉकडाउन के फायदे-

बुरे परिस्थिति में भी यदि कुछ अच्‍छाई खोजो तो मिल जाएगा क्योंकि प्रकृति हर स्थिति में दोनों को लेकर आती है । लॉकडाउन का सबसे बड़ा लाभ वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन एजुकेशन रहा । जहां कर्मचारी आफिर दफ्तर नहीं जा पा रहे तो वह घर से ऑनलाइन काम करने लगे । बच्‍चों को मोबाइल की सहायता से ऑनलाइन शिक्षा दी जाने लगी ।

जो लोग महीनों तक अपने परिवार के साथ नहीं मिल पाते थे, ऐसे लोग महीनों अपने परिवार के साथ रहे । लॉकडाउन ने लोगों को परिवार के महत्व को बताया । लोग पहले से अधिक परिवार घुलमिल कर रहना सीखे ।

लोग घर बैठे-बैठे कुछ क्रिएटिव काम  करने लगे, अपने अंदर छुपे हुए कला को बाहर निकालने लगे ।

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Essay On Lockdown In Hindi

उपसंहार-

लॉकडाउन हमारे जीवन का काला अध्याय रहा । हमारे लिए यह एक अकल्‍पनीय स्थिति था । किन्तु कहते हैं न मनुष्य हर परिस्थिति में रहना सीख लेता है । हम भी इस परिस्थिति दो चार करते हुए रहना सीख लिए थे । कहने को इसके कुछ लाभ हुए किन्तु यह लाभ केवल मोबाइल, इंटरनेट संपन्न लोगों को ही हुआ । औसत व्यक्ति को इससे भारी नुकसान हुआ । ईश्वर न करे यह स्थिति हमारे जीवन काल दोबारा आवे।

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