Essay on Generation Gap in Hindi | जनरेशन गैप पर निबंध | पीढ़ी अंतराल निबंध | Generation Gap Essay in Hindi | Generation Gap par nibandh

Essay on Generation Gap in Hindi | जनरेशन गैप पर निबंध | प्रस्तावना

हर आने वाला नया दिन अपने साथ कुछ न कुछ नयापन लेकर आता है । समय परिवर्तनशील होता है । समय के साथ-साथ हमारे चारों ओर भौतिक संसाधन में अंतर आ जाता है इसी अंतर के कारण हमारे सोच में भी परिवर्तन आता है । हर व्यक्ति को अपने समय का हर चीज अच्छा लगता है । पुराने लोगों आज का नयापन अच्छा नहीं लगता तो आज के बच्चों को कल की पुरानी बातें अच्छी नहीं लगती । यही पसंद नापसंद का सोच एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी में एक अंतर के रूप दिखाई देता है ।

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पीढ़ी अंतराल क्या है?

पीढ़ी अंतराल जिसे अंग्रेजी में जनरेशन गैप कहा जाता है । वास्तव में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के लोगों वैचारिक परिवर्तन है । हालांकि इन पीढ़ियों के बीच केवल विचारों में ही अंतर नहीं बल्कि रहन-सहन, खान-पान, पहनावा और भौतिक संसाधनों में भी अंतर आ जाता है। इन बदलावों के कारण दोनों पीढ़ियों के सोच में काफी अंतर आ जाता है । इस अंतर को ही पीढ़ी अंतराल या जनरेशन गैप कहते हैं । बाप के समय और बेटे के समय के परिवेश और विचारों में अंतर को पीढ़ी अंतराल कहते हैं ।

Essay on Generation Gap in Hindi
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भौतिक संसाधनों में अंतर | पीढ़ी अंतराल निबंध | Generation Gap Essay in Hindi | Generation Gap par nibandh

आज और आज से 25-30 वर्ष पूर्व के भौतिक संसाधनों में काफी अंतर आ गया है । कृषि क्षेत्र को ही देखे तो पहले किसान जुताई के केवल अपने हल पर निर्भर था, इस कारण पशुओं का अधिक ध्यान रखता था । आज इसके टैक्टर सहित कई आधुनिक मशीनें आ गई है, इस मशीन के कारण पशुओं पर लोगों का ध्यान कम हो गया है इसलिए गोवंश का पशुधन अब मारा-मारा फिर रहा है ।

पहले मनोरंजन का प्रमुख साधन मंचीय कार्यक्रम, थियेटर, रेडियो था आज मोबाइल क्रांति के कारण सारा कुछ इंटरनेट और मोबाइल रह गया है । विस्तार से देखें तो जीवन के हर क्षेत्र में भौतिक संसाधनों में आमूलचूल परिवर्तन दिखाई देता । इस परिवर्तन को पुराने लोग समाज के लिए नुकसानदेह बताते हैं तो नए लोग इसे जीवन स्तर में सुधार निरूपित करते हैं । यही तो पीढ़ी अंतराल है ।

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रहन-सहन में अंतर-

एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी के आते-आते उनके रहन-सहन में काफी बदलाव देखने को मिलता है । उदाहरण के लिए देखे तो पहले के लोग संयुक्त परिवार में रहना पसंद करते थे आज के लोग एकाकी परिवार में रहना पसंद करते थे ।

पहले के लोग अपनी संस्कृति और अपनी परंपरा का कठोरता से पालन करते थें , आज के लोग रूढ़िवाद और प्रगतिवाद के तराजू में तौल कर ही किसी बात को मानना है या नहीं इस बात का फैसला करते हैं । दोनों पीढ़ी के बीच खान-पान, पहनावा, सामाजिक मेल-मिलाप सब में अंतर देखने को मिलता है। हर व्यक्ति अपने समय की बातें को अपने अनुकूल और श्रेष्ठ समझता है । इसी श्रेष्ठता के टकराव में ही पीढ़ी अंतराल पैदा होता है ।

जीवन मूल्यों में अंतर

जहां पहली पीढ़ी धार्मिक मान्यताओं, परम्पराओं को अपनी संस्कृति मानकर पालन करते थे, उसे आज के लोग रूढ़िवाद और आधुनिकता में अंतर करते हुए छोड़ देते हैं। घर-परिवार, समाज गांव जहां पहले एक दूसरे को सहयोग देने की भावना प्रबल होती थी लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में तन मन और धन से सहयोग करते थे इसमें आज कमी आ गई लोग केवल अपने काम अपने लाभ को ज्‍यादा महत्‍व देते हैं । एक दूसरे के सुख दुख में केवल फार्मेल्टी निभाते हैं ।

कौन भला और कौन बुरा

पीढ़ी अंतराल के इस वैचारिक द्वंद में कौन भला है और कौन बुरा है यह तय कर पाना आसान नहीं है । सृष्टि स्वयं परिवर्तनशील है, इसलिए समय के अनुसार तो बदलाव आयेगा ही आयेगा । कुछ बदलाव अच्छे होते हैं कुछ बदलाव बुरे भी होते हैं । विज्ञान की प्रगति से शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा में जो परिवर्तन हो रहा है वह निश्चित रूप से अच्छे हैं ।

जिस बदलाव से जीवन स्‍तर में सुधार हो, निर्धनता कम हो वह बदलाव अच्‍छे ही हैं । किन्‍तु जिस बदलाव से परिवार के बीच दूरियां बढ़ जाए, पारिवारिक संबंधों में खटास पैदा हो जाए, जिससे लोग एक दूसरे का सम्मान करना छोड़ दें मानवीय सहयोग छोड़ दे वह बदलाव निश्चित रूप से बुरे कहे जाएंगे।

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Essay on Generation Gap in Hindi

उपसंहार-

बदलावों के क्रम संतुलन बनाना ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण बात है । हमारे परिवेश और विचार में बदलाव होते रहे हैं, होते रहेंगे किंतु इस परिवर्तन यदि कुछ नहीं बदलेगा तो वह है जीवन । मनुष्य का जीवन सुख और दुख के क्रम में सदा चलता रहा है चलता रहेगा । मनुष्य जीवन के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी मानवता । इस बदलाव में मानवता के गुणधर्म को हमें बचा कर रखना चाहिए । यह जीवन मूल्य है इस जीवन मूल्य को अक्षुण्ण रखना चाहिए।

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reference
Essay on Generation Gap in Hindi

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