Essay on Money in Hindi | धन पर निबंध हिंदी में | पैसे का महत्व | Money Essay in Hindi | hindi nibandh

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प्रस्तावना-

जीवन जीने के लिए तीन मूलभूत आवश्यकता है रोटी, कपड़ा और मकान । इसकी पूर्ति केवल और केवल धन से ही हो सकती है । मूलभूत आवश्यकता को छोड़कर भी जीवन के हर कदम पर धन की आवश्यकता होती है । स्वास्थ्य और शिक्षा धन से ही प्राप्त किया जा सकता है । भौतिकवादी इस युग में भौतिक सुख सुविधाओं की पूर्ति केवल धन से ही संभव है । धन के बिना जीवन जीना बहुत कठिन है । यही कारण हर कोई धन कमाने, धन प्राप्त करने का प्रयास करते रहते हैं ।

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धन का महत्व

जीवन में धन का महत्व इतना है कि धन के बिना जीवन की कल्पना करना बेमानी लगता है । जीवन के हर पहलू में धन का महत्‍व बराबर होता है । व्‍यक्ति जन्‍म से लेकर मौत होने तक धन की आवश्‍यकता बनी रहती है । धन के महत्‍व को बतलाते हुए किसी ने कहा है कि -‘पैसा भगवान नहीं है, पर भगवान कसम भगवान से कम भी नहीं है ।

धन क्‍या है?

धन एक ऐसा स्रोत है जिससे जब चाहे किसी वस्‍तु या सेवा को हम खरीद सकते हैं । धन एक ऐसा स्रोत है जिसके अदला-बदली से किसी वस्‍तु को खरीदा या बेचा जा सकता है । धन किसी देश की मुद्रा है जिसे लोग अपने श्रम या सेवा से अर्जित करते है और मुद्रा से खरीदे गए चल और अचल संपत्‍ती जैसे खेती, मकान, वाहन, दुकान आदि सभी धन के अंतर्गत ही आते हैं ।

Essay on Money in Hindi
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जीवनयापन के लिए धन कमाना आवश्‍यक है?

भारतीय संस्कृति में चार प्रकार पुरुषार्थ कहे गए है- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष । इसमें अर्थ नामक पुरुषार्थ का मतलब धन कमाना है । कितना धन कमाना चाहिए तो चाहत की कोई सीमा नहीं है और और की चाह सब में होती है किन्‍तु कबीर दास जी कहते है कि-

साईं इतना दीजिए, जामे कुटुम समाए ।
मैं भी भूखा न रहूं, साधु भी भूखा न जाए ।।

इसका अर्थ है कि हमें इतना धन तो कमाना ही चाहिए जिससे स्‍वयं का स्‍वयं के परिवार का भरण-पोषण हो सके और हम अपने घर में पघारे अतिथि का सत्‍कार भी कर सकें ।

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धन कमाने वाले का ही सब सम्मान करते हैं-

इस संसार उसी व्यक्ति का सबसे अधिक मान सम्मान होता है जिसके पास अधिक धन होता है । जिस व्यक्ति का जितना ज्यादा इनकम उसका उतना ही अधिक सोशल स्टेटस होता है । जो व्यक्ति धन नहीं कमा सकता उसका समाज में क्या घर में भी कोई सम्मान नहीं होता ।

हमारी शिक्षा प्रणाली धन आधारित है-

धन का इतना अधिक महत्‍व है कि अबोध बालक के मन में यह धारणा भर दिया जाता है कि जो जितना अच्‍छा पढ़ेगा, जितना ज्यादा पढ़ेगा वह आगे चल उतना ही अधिक धन कमायेगा । हमारी शिक्षा नीति ऐसा है कि बच्चे नौकरी पाने की चाहत में ही पढ़ाई करते हैं ।

रोटी कपड़ा और मकान के लिए धन चाहिए –

जीवन जीने के लिए सबसे अधिक जरूरी चीज है पेट भरने के लिए रोटी मतलब भोजन, तन ढकने के लिए कपड़ा और सिर छुपाने के लिए मकान । यह मनुष्य की न्यूनतम आवश्यकता है । इस आवश्यकता को धन से ही पूरा किया जा सकता है । मनुष्य को कम से कम इतना तो कमाना ही चाहिए इस आवश्यकता की पूर्ति वह कर सके ।

शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा के लिए धन चाहिए-

सम्मान सहित जीवन जीने के लिए रोटी कपड़ा और मकान के अतिरिक्त शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा की आवश्यकता होती है । शिक्षा विहीन मनुष्य को पशुवत माना गया है । मनुष्य को शिक्षा की जरूरत  होती है इसके लिए धन की आवश्यकता होती है ।

तन स्वस्थ रहने पर ही संसार का आनंद लिया जा सकता है । यदि हम बीमार पड़ जायें तो हमारा जीवन खतरे में पड़ सकता है यदि हमारे पास धन हो तो इलाज करा सकते है । धन केअभाव में इलाज संभव नहीं है । बिना इलाज के हमारा जीवन खतरे में पड़ सकता है । 

शिक्षा और स्वास्थ्य के बाद सुरक्षा की आवश्यकता होती है । यह सुरक्षा भी धन के बल पर ही प्राप्‍त किया जा सकता है ।

नये जमाने के भौतिक संसाधन के लिए धन चाहिए-

आज का समय भौतिक संसाधन का जितना खर्च चावल दाल सब्जी के लिए नहीं करते उससे अधिक खर्च इन भौतिक संसाधन जैसे मोबाइल, मोटर सायकल, कार, टीवी, आदि  पर करना पड़ता है । नये समय में नई वस्तुओं की आवश्यकता खाने के सामान की आवश्यकता से कम नहीं है ।

धर्म-कर्म करने के लिए धन चाहिए-

भारतीय संस्कृति में तीर्थ यात्रा करना, दान करना अनिवार्य बताया गया है । तीर्थ यात्रा करने के लिए धन चाहिए । बिना धन के न हम तीर्थ यात्रा कर सकते न ही दान कर सकते । इस प्रकार धर्म-कर्म करने के लिए भी धन बहुत जरूरी है ।

उपसंहार-

धन के महत्व और आवश्यकता को कोई नकार नहीं सकता । इसलिए हमें चाहिए कि धन कमाने का संयमपूर्वक प्रयास करें ।  धन नैतिक तरीके से कमाना चाहिए । अनैतिक तरीके से कमाए गए धन से सुख और शांति नहीं मिल सकता । अनैतिक तरीके से कमाए गए धन से मन में एक आशंका बनी रहती है कि उसके साथ कुछ हो न जाए । हमें धन की आवश्यकता को ध्‍यान में रखकर सही तरीके से धन कमाना चाहिए ।

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