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The Tale of Ram Navami- celebrating the birth of Rama- राम के जन्म से जुड़ी राम नवमी के पर्व की कहानी

वैदिक काल से ही हिन्दू धर्म में विभिन्न देवी-देवताओं से जुड़ी मान्यताओं के साक्ष्य मिलते हैं। इन्हीं मान्यताओं के आधार पर विक्रम संवत (हिन्दू कैलेंडर) में ईश्वर से जुड़े कई पर्व वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार मनाए जाते हैं। इसी फेहरिस्त में एक नाम है राम नवमी का।

राम नवमी, वसंत ऋतु के प्रसिद्ध पर्वों में से एक है। विक्रम संवत के चैत्र माह (मार्च और अप्रैल का महीना) के शुक्ल पक्ष में नवमी तिथि को मनाए जानी वाली राम नवमी को भगवान विष्णु के अवतार श्री राम के जन्म दिवस के रूप में जाना जाता है।

हिन्दू धर्म के मुख्य चार धर्मों शक्ति, शिव और सामर्थय में से एक वैष्णव धर्म भगवान विष्णु को समर्पित है। जिसमें विष्णु के सभी अवतारों और उनकी लीलाओं का वर्णन मिलता है। इसके अनुसार राम अवतार भगवान विष्णु का धरती पर सातवां अवतार था। अयोध्या के राजा दशरथ और महारानी कौशल्या की संतान के रूप में श्री राम का जन्म धर्म की स्थापना के लिए हुआ था।

हिन्दू धर्मिक मान्यताओं में राम को मर्यादा पुरुषोत्तम की संज्ञा देते हुए उन्हें आराध्य के रूप में पूजा जाता है। यही कारण है कि राम से जुड़ा हर पर्व देश के हर कोने में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसी कड़ी में एक नाम राम नवमी का भी शामिल है। राम नवमी को नवरात्री के पर्व के नौवें दिन के रूप में भी मनाया जाता है।

Importance of Ramnavmi- राम नवमी का महत्व

संसार में धर्म की पुनः स्थापना के लिए राम का अवतार चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन ही हुआ था। जिसके कारण इस दिन को राम नवमी के रूप में मनाया जाता है और इसे धर्म की अधर्म पर जीत का आरंभ माना जाता है।

हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार जब-जब धरती पर अन्याय बढ़ता है तब-तब भगवान विष्णु धर्म की पुनः स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। इसी प्रकार त्रेता युग में जब अधर्म अपनी पराकाष्ठा पर पहुँचा तब नारायण ने राम अवतार में अयोध्या के राजा दशरथ और महारानी कौशल्या के पुत्र के रूप में जन्म लिया और रावण सहित कई अधर्मियों और निशाचरों का वध किया था।

राम अवतार का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हिन्दू धर्म शास्त्रों में राम कहानी को जीवन के सार की सज्ञां दी गई है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस में सम्पूर्ण राम कथा का विस्तार में उल्लेख मिलता है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जीवन आदर्शों को जीवन में उतारने का पाठ इस महाकाव्य का सार है। यही कारण है कि वर्तामन परिप्रेक्ष्य में भी राम न सिर्फ कई लोगों के आराध्य हैं बल्कि ज्यादातर लोगों के आदर्श भी हैं।

रामनवमी के त्यौहार का महत्व सनातन धर्म में हमेशा ही महत्वपूर्ण रहा है। इस पर्व के साथ ही माँ दुर्गा के नवरात्री का समापन भी होता है। हिन्दू धर्म में रामनवमी के दिनव भगवान राम की पअराधना होती है, वहीं नवरात्री का नौवें दिन होने के कारण इस दिन कई घरों में कन्या पूजन के रूप में आदि शक्ति दुर्गा की भी उपासना की जाती है।

History behind Ramnavmi- रामनवमी का इतिहास

गौस्वामी तुलसीदास ने अपनी रचना रामचरितमानस में राम नवमी का जिक्र करते हुए लिखा है-

चैत्रे नवम्यां प्राक् पक्षे दिवा पुण्ये पुनर्वसौ ।

उदये गुरुगौरांश्चोः स्वोच्चस्थे ग्रहपञ्चके ॥

मेषं पूषणि सम्प्राप्ते लग्ने कर्कटकाह्वये ।

आविरसीत्सकलया कौसल्यायां परः पुमान् ॥

इस महाकाव्य के अनुसार अयोध्या के सूर्यवंशी राजा दशरथ की तीन पत्नियाँ थीं- कौशल्या, कैकयी और सुमित्रा। बावजूद इसके बहुत समय तक राजा दशरथ को संतान का सुख नहीं प्राप्त हो पाया।आखिरकार राजा दशरथ के कुलगुरु ऋषि वशिष्ठ ने उन्हें यज्ञ कराने की सलाह दी। राजा दशरथ ने महर्षि ऋष्यश्रृंग (श्रृंगी मुनि) से पुत्रकामेष्ठी यज्ञ कराया और यज्ञ समाप्त होने के बाद श्रृंग मुनि ने दशरथ की तीनों पत्नियों को यज्ञ के प्रसाद के रूप में खीर खाने के लिए दिया।

खीर खाने के कुछ महीनों बाद ही तीनों रानियाँ गर्भवती हो गयीं और ठीक 9 महीनेंबाद राम नवमी के दिन अयोध्यानगरी में चार राजकुमारों का जन्म हुआ। राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी कौशल्या ने श्री राम, कैकयी ने भरत और सुमित्रा ने दो जुड़वा बच्चों लक्ष्मण और शत्रुघ्नको जन्म दिया। राम का यह अवतार संसार में अधर्म के नाश के लिए हुआ था, जिसमें उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में एक आदर्श जीवन जीते हुए संसार में धर्म की पुनः स्थापना की।

Ramnavmi Pujan- राम नवमी का पूजन

हिंदुओं के आराध्य राम के जन्मोत्सव का पर्व देश में काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन हर श्रद्धालु राम की भक्ति में आस्था की डुबकियां लगाता है। राम नवमी के दिन चैत्र नवरात्री का समापन भी होता है। इसलिए यह दिन धार्मिक दृष्टि से खासा महत्वपूर्ण होता है। इस दिन सभी श्रद्धालु व्रत, भजन-कीर्तन करके कन्या खिलाते हैं। मान्यता है कि कन्याओं के साथ ही नवरात्री के आखिरी आदि शक्ति दूर्गा की भी विदाई हो जाती है। इसके साथ ही राम जन्म के सुअवसर पर कई जगहों पर रामचरितमानस का पाठ भी आरंभ किया जाता है।

राम नवमी के मौके पर देश के हर कोने में राम कहानी गायी और सुनाई जाती है। इस दौरान कई श्रद्धालु राम से जुड़े कई धार्मिक स्थलों मसलन अयोध्या, रामेश्वरम, भद्रचालम् और सीतामढ़ी के दर्शन भी करते हैं। ये सभी पवित्र स्थल किसी न किसी रूप में राम से जुड़े हैं, जिनका जिक्र रामचरितमानस में किया गया है। वहीं कई जगहों पर श्री राम की रथयात्रा भी निकाली जाती है।

राम नवमी के दिन लोग सुबह-सुबह स्नान करनेके बाद सूर्योदय के समय सूर्य की पूजा करते हैं। इस दिन सूर्यपूजन के पीछे मान्यता है कि रघुकुलनंदन श्री राम सूर्यवंशी थे यानी सूर्य देव के ही वशंज थे। इसलिए सूर्य उनके आराध्य देव थे, जिसके कारण राम की पूजा के पहले सूर्योदय के समय ही अर्घ देकर सूर्य की वंदना होती है।

Celebration in different states- देश के विभिन्न राज्यों में राम नवमी का जश्न

इसके अतिरिक्त राम नवमी पर श्री राम के साथ अनुज लक्ष्मण, भक्त हनुमान और माता सीता की भी पूजा की जाती है। जगह-जगह पर अखण्ड रामायण के पाठ का आयोजन होता है और पाठ की समाप्ति के बाद भंडारा खिलाया जाता है।

उड़ीसा, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल सहितकई पूर्वी राज्यों में राम नवमी के दिन भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाती है। भगवान जगन्नाथ को विष्णु का ही अवतार माना जाता है। इसलिए वैष्णव धर्म के लिए इस रथ यात्रा का खास महत्व है। देश-विदेश से लाखों की तदाद में श्रद्धालु इस रथ यात्रा में शिरकत करते हैं। वहीं देश के विभिन्न भागों में स्थित भगवान विष्णु को समर्पित इसकॉन मंदिर में भा राम नवमी का जश्न खासा मशहूर है।

Kalyanam Festival- कल्याणम महोत्सव

जहाँ पूरे देश में राम नवमी का पर्व श्री राम के जन्म के उपलक्ष्य में होता है, वहीं दक्षिण भारत में राम नवमी का पर्व भगवान राम और माता सीता के विवाह के रूप में मनाया जाता है, जिसे ‘कल्याणोत्सव’ कहा जाता है। दक्षिण भारत में मान्यता है किचैत्र माह की नवमी को भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था।

राम नवमी के दिन दक्षिण भारत के मंदिरों में राम और सीता की शादी कराई जाती है, इसे सीताराम कल्याणम कहते हैं।सीताराम कल्याणमका सबसे भव्य आयोजन आंध्रप्रदेश के भद्राचलम स्थित श्रीराम मंदिर में होता है। जिसमें पूरे विधि-विधान से धूम-धाम के साथ राम और सीता का विवाह समपन्न कराया जाता है।सीताराम कल्याणमके दौरान भगवान राम को पारांपरिक प्रसाद नैवेद्यम चढ़ाया जाता है, जो एक प्रकार का लड्डू होता है।

इसके अलावा भी भगवान राम और माता सीता को कई अन्य तरह के प्रसाद जैसे पानकम् (इलायची और अरदक से बना एक शीतल पेय), नीर मोर (एक प्रकार का पतला तिल) और वदई पररूपु (मूंग की भीगी दाल में नारियल और मसाले डालकर बनाया गया सलाद ) का भोग भी लगाया जाता है। जिसके बाद यह भोग प्रसाद के रूप में भक्तों में बाँट दिया जाता है।

Ramnavmi abroad- विदेशों में राम नवमी

राम नवमी का जश्न महज देश के भीतर नहीं बल्कि सीमा पार भी कई देशों में उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। दुनिया के कई देशों में मौजूद भारतीय मूल के लोग पूरे रीति-रिवाज के साथ राम नवमी का जश्न मनाते हैं।

दुनिया के कई देशों मसलन सिंगापुर, गुयाना, मलेशिया, इंडोनेशिया और मॉरिशस के मंदिरों में स्थानीय लोग धूम-धाम से राम नवमी का पर्व मनाते हैं। इस दिन लोग कन्या खिलाने के साथ-साथ रामचरितमानस का पाठ करते हुए सूर्यदेव, राम, लखन और सिया सहित हनुमान की अराधना करते हैं।

साहित्य के पन्नों में राम

राम का नाम सदियों से अमर रहा है। यही कारण है कि वैदिक ग्रंथों से लेकर तुलसीदास की रचनाओं और भक्ति काल में कबीर की वाणी से लेकर आधुनिक काल में कई कवियों की रचनाओं में राम आज भी रचे बसे हुए हैं।

अपने दोहों में राम का जिक्र करते हुए कबीर कहते हैं-

“एक राम दशरथ का बेटा,

एक राम जो घट घट बैठा,

एक राम का सगल पसारा ,

एक राम जो सब से न्यारा।

वही राम दशरथ का बेटा,

वही राम घट घट में लेटा,

उसी राम का सगल पसारा,

वही राम दुनिया से न्यारा”

वहीं आधुनिक काल के कवि हरिओम पंवार जी ने बेहद आसान शब्दों में राम के पूरे जीवन चरित्र को अपनी रचनाओं में उकेरते हुए राम को समूचे हिंदुस्तान की पहचान करार दे दी-

राम नहीं मिलते ईंटों में गारा में,

राम मिलें निर्धन की आँसू-धारा में।

राम मिलें हैं वचन निभाती आयु को,

राम मिले हैं घायल पड़े जटायु को।

राम मिलेंगे अंगद वाले पाँव में,

राम मिले हैं पंचवटी की छाँव में।

राम मिलेंगे मर्यादा से जीने में,

राम मिलेंगे बजरंगी के सीने में।

राम मिले हैं वचनबद्ध वनवासों में,

राम मिले हैं केवट के विश्वासों में।

राम मिले अनुसुइया की मानवता को,

राम मिले सीता जैसी पावनता को।

राम मिले ममता की माँ कौशल्या को,

राम मिले हैं पत्थर बनी आहिल्या को।

राम नहीं मिलते मंदिर के फेरों में,

राम मिले शबरी के झूठे बेरों में।

मैं भी इक सौंगंध राम की खाता हूँ,

मैं भी गंगाजल की कसम उठाता हूँ।

मेरी भारत माँ मुझको वरदान है,

मेरी पूजा है मेरा अरमान है।

मेरा पूरा भारत धर्म-स्थान है,

मेरा राम तो मेरा हिंदुस्तान है।

References

Written by Ramesh Chauhan

A Hindi content writer. Article writer, scriptwriter, lyrics or songwriter, Hindi poet and Hindi editor. Specially Indian Chand navgeet rhyming and non-rhyming poem in poetry. Articles on various topics especially on Ayurveda astrology and Indian culture. Educated best on Guru shishya tradition on Ayurveda astrology and Indian culture.

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