in ,

Shiva’s Night: Mahashivratri- शिव की रात्री ‘महाशिवरात्री’

सत्यम्… शिवम्…सुंदरम् अर्थात ईश्वर ही सत्य है, सत्य ही शिव है और शिव ही सुंदर है। हिन्दू धर्म में भगवान शिव को देवों के देव महादेव की संज्ञा दी गई है। शिव को त्रिदेवों- ब्रम्हा, विष्णु, महेश में सर्वोच्च माना गया है। वेदों के अनुसार ब्रम्हा सृष्टि के सृजनकर्ता हैं, तो विष्णु पालनहार औरशिवसृष्टि का विनाशक करते हैं। शिव के बारे में कहा जाता है कि शिव अनंत हैं, सर्वस्व हैं और उनकी भक्ति भी अविरल हैं।

शिव के इसी अविनाशी स्वरूप के कारण शिव की भक्ति भी अनंत है। शिव भक्त अपने आराध्य को भोले भंडारी की सज्ञां देते हुए उन्हें प्रसन्न करने का कोई अवसर नहीं छोड़ते हैं। यही कारण है कि शिव से जुड़ा हर पर्व देश में बेहद श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, जिसमें एक नाम महाशिवरात्री का भी है।

शिवरात्री यानी शिव की रात्री…अमूमन सावन का पूरा महीना ही शिव को समर्पित होता है। सावन के महीने में देश के हर कोने में हर हर महादेव का जयकारा गुजांयमान रहता है। बावजूद इसके फाल्गुन माह (फरवरी महीना) में पड़ने वाली महाशिवरात्री को शिव के महापर्व का दर्जा दिया जाता है।

Importance of Mahashivratri- महाशिवरात्री का महत्व

Mahashivratri

हिन्दू धर्म में महाशिवरात्री का खास महत्व है। फाल्गुन कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि के पर्व को शिव और पार्वती के विवाह के दिन के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्री के दिन ही शिव के विशालकाय अग्निलिंग स्वरूप से ही सृष्टि का आरंभ हुआ था।

पूरे साल में कुल 12 शिवरात्री होती हैं। हिन्दू पंचाग में हर महीने की कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्री माना जाता है लेकिन फाल्गुन मास की चतुर्दशी को महाशिवरात्री कहा जाता है।

इस दिन भक्त अपने आराध्य देव शिव की अराधना करते हैं। सुबह सूर्योदय के साथ ही शिवलिंग का जलाभिषेक कर शिव को फूल, बेलपत्र, बेर, भांग और धतूरा अर्पित करते हैं। शिवरात्री के दिन मंदिरों में तो शिव भक्तों का तांता लगता ही रहता है, साथ ही इस दिन शिव की बारह ज्योतर्लिंगो का दर्शन करना भी बेहद शुभ माना जाता है।

देश में जहाँ ज्यादातर त्योहार दिन में मनाए जाते हैं, वहीं शिवरात्री का पर्व रात में मनाया जाता है। दूसरे त्योहारों का आधार प्रत्येक धर्म और समुदाय की कला और संस्कृति से जुड़ा होता है, वहीं महाशिवरात्री के पर्व को मनाने के पीछे व्रत, ध्यान और आत्मज्ञान की अवधारणा विद्यमान है। महाशिवरात्री की रात कई भक्त जागरण या जगराते का आयोजन करते हैं। जिसमें पूरी रात शिव की अराधना की जाती है।

Mythological Tales- पौराणिक कथाएं

महाशिवरात्री का जिक्र कई पुराणों मसलन स्कंद पुराण, लिंग पुराण, पद्म पुराण और शिव पुराण में मिलता है। इन पुराणों में महाशिवरात्री मनाने की कई कथाएं प्रचलित हैं।

पहली कथा के अनुसार महाशिवरात्री की रात में ही शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। इस दिन जब पार्वती ने महादेव से उनकी भक्ति पाने का मार्ग पूछा, तो शिव ने उत्तर दिया कि महाशिवरात्री के व्रत और शिवलिंग की उपासना के द्वारा ही शिव की भक्ति प्राप्त की जा सकती है।

इस संदर्भ में दूसरी कथा समुद्र मंथन से संबंधित है। इस कथा के अनुसार समुद्र से अमृत निकालने के लिए देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया। इस मंथन में निकलने वाले हलाहल (विष) में पूरा ब्रम्हांड नष्ट करने की क्षमता थी। समुद्र से विष निकलने के बाद महादेव ने उसे पी लिया, जिसके बाद उनका कण्ठ नीला पड़ गया और उन्हें नीकण्ठ की नाम से जाना गया।

विष का असर खत्म करने के लिए वैद्य ने महादेव को पूरी रात जागने का सुझाव दिया। जिसके बाद देवताओं ने रात भर महादेव को जगाने के लिए नृत्य, गायन का आयोजन किया। तभी से इस रात को महाशिवरात्री के रूप में मनाया जाने लगा। देवभूमि उत्तराखंड के कोटद्वार में स्थित नीलकण्ठ महादेव मंदिर का उद्गम इसी कथा में निहित है।

महाशिवरात्री के संदर्भ में एक शिकारी कथा भी प्रचलित है। इस कथा के अनुसार एक शिकारी जंगल में शिकार करने की इच्छा से जाता है। सुबह से वन में शिकार खोजते हुए शाम हो जाती है लेकिन उसे जंगल में कोई शिकार नहीं मिलता। आखिरकार शिकार थक कर बेल केएक पेड़ पर चढ़कर उसकी की डाल पर बैठ जाता है और छुप कर शिकार के आने की प्रतीक्षा करता है। शिकार की प्रतिक्षा करता शिकारी पेड़ की एक-एक पत्तियों को तोड़ कर नीचे फेंकता रहता है।

शिकारी द्वारा फेंका गया बेलपत्र पेड़ के नीचे स्थापित शिवलिंग पर गिरता है। इस तरह वो पूरी रात पेड़ पर बैठ कर शिकार की राह तकता हुआ अनजाने में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाता है। चूँकि बेलपत्र महादेव को अत्यंत प्रिय है, अगले दिन सूर्योदय होने के साथ ही महादेव उस शिकारी से बेहद प्रसन्न होकर उसे दर्शन देते हैं।

दरअसल अनजाने में उस शिकारी ने एक दिन का उपवास रखा, रात्रि-जागरण किया तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाया, जिसके कारण उसका हिंसक हृदय निर्मल हो गया और उसमें भगवद् शक्ति का वास हो गया था। इस तरह भगवान शिव की अनुकंपा से उसका हिंसक हृदय परिवर्तित हो गया और उसने अपना धनुष बाण हमेशा के लिए त्याग दिया। मान्यता है कि इसी घटना के फलस्वरूप शिवरात्री का पर्व मनाया जाने लगा।

इसके अलावा शिव पुराण में महाशिवरात्री की पूजा का विस्तार में वर्णन मिलता है। इस दिन शिव की पूजा विधि और उनके चढ़ावे की चीजों का उल्लेख किया गया है।

यहाँ पढ़ें : मकरसंक्रान्ति पर्व

Jyotirling ke Darshan- ज्योतिर्लिंग के दर्शन

https://www.youtube.com/watch?v=DfArW89wjBA

वैसे तो महाशिवरात्री के दिन देश के सभी मंदिरों में भक्त आस्था की डुबकी लगाते हैं लेकिन इस दिन देश में मौजूद बारह ज्योतिर्लिंगों में के दर्शन करने का खास महत्व होता है। मान्यता है कि शिव की ये ज्योतिर्लिंग स्वयम्भू यानी स्वयं उत्पन्न हुईं हैं।

शिव की बारह ज्योतिर्लिंग सोमनाथ (गुजरात), श्री शैल मल्लिकार्जुन शिवलिंग (मद्रास), महाकालेश्वर(उज्जैन), ॐकारेश्वर (मध्यप्रदेश) नागेश्वर (गुजरात),बाबा बैद्यनाथ धाम (बिहार), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), त्र्यंम्बकेश्वर (नासिक), घुमेश्वर (औरंगाबाद), केदारनाथ (उत्तराखंड), काशी विश्वनाथ धाम(बनारस) और रामेश्वरम्‌ (मद्रास) में स्थित हैं।

When the country celebrates Mahashivratri – जब महाशिवरात्री के जश्न में सराबोर होता है देश

https://www.youtube.com/watch?v=DfArW89wjBA

दक्षिण भारत में शिवरात्री का जश्न बेहद धूम-धाम से मनाया जाता है। यहाँ शिवरात्री का सबसे भव्य आयोजन  तमिलनाडू के थिरुवन्नमलाई के अन्नामलाइय्यर मंदिर में होता है। इस आयोजन के दौरान शिव भक्त पर्वत के शिखर पर स्थित अन्नामलाइय्यर मंदिर की परिक्रमा करते हुए 14 किलोमीटर तक चलते हैं। इस परिक्रमा को गिरी प्रदक्षिणा के नाम से जाना जाता है।

इसके अलावा उत्तर भारत में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में महाशिवरात्री पर भव्य आयोजन होता है। बनारस में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसके साथ ही गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में शिव की ज्योतिर्लिंग की विशेष अराधना होती है।

आंध्र पदेश में शिवरात्री के दिन मल्लय्या गुट्टा, कंभालापल्ले, गुंडलाकम्मा, कोडुरू औरउमा महेश्वरम में शिव की भव्य यात्रा निकाली जाती है। इसके अलावा अमरावती स्थित अमरारामम्, भीमावराम स्थित सोमारामम् तथाद्रक्षारामम्, समरलाकोट्टास्थित कुमारारामा और पलाकोल्लू के क्षीरारामा में शिव की विशेष पूजा की जाती है, जिसे पंचरामास के नाम से जाना जाता है। साथ ही एक हजार स्तंभों वाले वारंगल मंदिर में भी महाशिवरात्री का पर्व पूरे रीति-रिवाज के साथ मनाया जाता है।

पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर में मंडी मेला महाशिवरात्री समारोह के लिए मुख्य रूप से प्रसिद्ध है। मंडी शहर में शिवरात्री का उत्सव पूरे शहर को महादेव की भक्ति के रंग में रंग देता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इस मेले में सभी देवी-देवता आते हैं। जिनके दर्शन के लिए बड़ी सख्यां में भक्त महाशिवरात्री के दिन यहाँ आते हैं। व्यास नदी के तट पर बसे हिमाचल प्रदेश के पुराने शहरों में से एक मंडी को “मंदिरों का कैथेड्रल” कहा जाता है। इस शहर में 81 से ज्यादा देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं।

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में भी महाशिवरात्री का पर्व खूब हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। कश्मीर में महाशिवरात्री को हेरथ यानी हरि की रात्री कहा जाता है। महाशिवरात्री कश्मीर में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक हैं। यहाँ शिवरात्री का जश्न फाल्गुन माह के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को न मनाकर एक दिन पहले तृयोदशी को मनाया जाता है।

तांत्रिक ग्रथों के अनुसार महाशिवरात्री के एक दिन पहले शिव के भैरव यानी महाकाल अवतार की पूजा होती है। तांत्रिक ग्रथों में इस पूजा का उल्लेख ‘भैरवोत्सव’ के रूप में किया गया है। है। पूरे कश्मीर में हेरथ पर्व की तैयारी लगभग एक महीने पहले ही शुरू हो जाती हैऔर यह उत्सव महाशिवरात्री के दो दिन बाद तक चलता है।

महाशिवरात्रि के दिन कश्मीरी पंडित देवों के देव महादेव को उनके परिवार के साथ घर में स्थापित करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन महादेव को उनके परिवार के साथ घर में स्थापित करने से महादेव वटुकनाथ भैरव के रूप में मेहमान बनकर घर में रहते हैं। कश्मीरी पंडितों के लिए यह त्योहार काफी खास होता है।

मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित बारह ज्योतिर्लिंगो में से एक महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्री की रात विशेष पूजा की जाती है। इस दौरान शिव के महाकाल अवतार को भस्म से सजाया जाता है और महाकाल की भव्य आरती का भी आयोजन किया जाता है।

महाशिवरात्री का पर्व पंजाबी हिन्दुओं के लिए भी खास महत्व रखता है। महाशिवरात्री के दिन पंजाब के अनेक शहरों में भगवान शंकर की शोभा यात्रा निकाली जाती है।

गुजरात के जूनागढ़ स्थित भावनाथ नामक जगह पर हर साल महाशिवरात्री के मौके पर काफी बड़ा मेला लगता है। ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्री पर भगवान शिव स्वयं यहाँ स्थित मृगी कुण्ड में स्नान करने आते हैं।

पश्चिम बंगाल में भी महाशिवरात्री का पर्व बेहद धूम-धाम से मनाया जाता है लेकिन कुंवारी कन्याओं के लिए इस पर्व का खास महत्व रहता है। पश्चिम बंगाल में मान्यता है कि महाशिवरात्री पर शिव की अराधना करने से महादेव कन्याओं को अच्छे पति का वरदान देते हैं। इस दिन यहाँ स्थित ताड़केश्वर मंदिर में महादेव भव्य पूजा-अर्चना होती है।

यहाँ पढ़ें : राम नवमी के पर्व की कहानी

The celebration abroad- विदेशों में भी शिवरात्री की धूम

शिव की अराधना का ये खास पर्व महज देश के भीतर ही नहीं बल्कि देश के बाहर भी मनाया जाता है। नेपाल और पाकिस्तान सहित कई देशों में महाशिवरात्री काफी हर्षोल्लास से मनाई जाती है।

नेपाल में भगवान शिव को आदि गुरु की संज्ञा दी गई है, जिनसे सृष्टि में दिव्य ज्ञान की उतपत्ति हुई है। यही कारण है कि नेपाल में महाशिवरात्री के दिन भव्य समारोह आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान लाखों की सख्यां में भक्त प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर और शिव शक्ति पीठ की के दर्शन करते हैं और पूरे रीति-रिवाज से शिव की अराधना करते हुए पारंपरिक गानों पर लोक नृत्य से रात भर जागरण किया जाता है।

पाकिस्तान में भी महाशिवरात्री देश के बड़े धार्मिक त्योहारों में से एक है। इस दौरान काफी बड़ी तादाद में शिव भक्त हिन्दू मंदिरों में भगवान शंकर की अराधना करते हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के उमरकोट में स्थित उमरकोट मंदिर में भी महाशिवरात्री का पर्व तीन दिन तक चलता है, जिसमें हर साल ढाई लाख से ज्यादा श्रद्धालु शिव की भक्ति के सागर में डुबकी लगते हैं।

वहीं दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारतीय-कैरिबियाई समुदाय भी चार सौ से ज्यादा मंदिरों में महाशिवरात्री मनाते हैं। जिस दौरान शिव की अराधना के बाद शिव को झाल्स (दूध, चीनी, दही और फूल) चढ़ाया जाता है। मॉरिशस में भी कई शिव भक्त महाशिवरात्री के अवसर पर हर हर महादेव के जयकारे के साथ‘गंगा तलाओ’ नामक झील में डुबकियाँ लगाते हैं।

Reference-
2020, Mahashivratri, Wikipedia
2020, महाशिवरात्री, विकिपीडिया

Written by Ramesh Chauhan

A Hindi content writer. Article writer, scriptwriter, lyrics or songwriter, Hindi poet and Hindi editor. Specially Indian Chand navgeet rhyming and non-rhyming poem in poetry. Articles on various topics especially on Ayurveda astrology and Indian culture. Educated best on Guru shishya tradition on Ayurveda astrology and Indian culture.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Holika Dahan celebrates the victory of Good over Evil- बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता होलिका दहन का पर्व

Holika Dahan celebrates the victory of Good over Evil- बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता होलिका दहन का पर्व

Makarsankrant मकरसंक्रान्तिः विविधताओं के देश में मान्यताओं का पहला पर्व

Makarsankranti: First festival of beliefs in a Country of diversities- मकरसंक्रान्ति : विविधताओं के देश में मान्यताओं का पहला पर्व