in ,

Ram Bhakt Hanuman’s birthday is celebrated as hanuman jayanti -देश में धूम-धाम से मनाया जाता है राम भक्त हनुमान का जन्मोत्सव!

भारत में साल भर कई धार्मिक और अध्यात्मिक त्योहार मनाए जाते हैं। मगर त्योहारों की इस फेहरिस्त में कुछ त्योहारों का खास महत्व होता है, जिनमें एक नाम हनुमान जयंती का भी है।

श्रीराम के परम भक्त हनुमान का जन्मदिवस समूचे देश में बेहद धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। भारत और नेपाल में हनुमान जंयती की विशेष धूम होती है। ज्यादातर जगहों पर चैत्र और वैसाख के महीने में हनुमान जंयती मनाई जाती है, वहीं दक्षिण भारतीय राज्यों तमिलनाडू और केरल में हनुमान जयंती का पर्व मारघाजी माह (धनुर्मास महीना) में मनाया जाता है।

अपनी ठोड़ी के आकार की वजह से पवनपुत्र का नाम हनुमान पड़ा। संस्कृति में हनुमान का मतलब होता है बिगड़ी हुई ठोड़ी। हनुमान जयंती के पर्वपर हनुमान मंदिरों में काफी भीड़ होती है। बड़ी तादाद में श्रद्धालु हनुमान जी के दर्शन कर उनसे आशीर्वाद माँगते हैं। इस दिन मंदिरों में हनुमान चालीसा, रामचरितमानस, सुन्दरकाण्ड और महाभारत का भी पाठ होता है। पवनपुत्र हनुमान की भव्य आरती और हर शहर के हर नुक्कड़ पर लंगर इस पर्व की अनोखी खासियत है। हनुमान जयंती के दिन मंदिरों में स्थित हनुमान की प्रतिमाओं पर भव्य श्रृगांर किया जाता है। गंगा जल से स्नान कराने के बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं। मान्यता है कि बूँदी के लड्डू हनुमान के सबसे प्रिय हैं, इसीलिए हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी को बूँदी का प्रसाद भी चढ़ाया जाता है।

दुनिया में हनुमान जयंती का सबसे भव्य आयोजन भारत में ही होता है। प्रभु श्री राम के प्रति हनुमान की सच्ची श्रद्धा का ही परिणाम है कि राम का नाम हनुमान के बिना अधूरा प्रतीत होता है। हिन्दू धर्म में हनुमान को बल और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

Importance of Hanuman Jayanti- हनुमान जयंती का महत्व

हनुमान के जन्म का महत्व रामायण के पन्नों में निहित है। माता सीता का पता लगाने से लेकर लक्ष्मण के लिए संजीवनी लाने तक हनुमान ने श्री राम के हर काम को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। यही कारण है कि हिन्दू धर्म में हनुमान को संकटमोचन की संज्ञा दी जाती है।

हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी को सर से लेकर पैर तक चंदन का लेप लगाया जाता है। मान्यता है कि जब हनुमान को पता चला कि श्री राम की लंबी उम्र के लिए सीता माता अपनी माँग में सिंदूर लगाती हैं, तो हनुमान ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया। तभी से बजरंगबली को सिंदूर चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है और उनके इस अवतार को केसरिया अवतार का नाम दिया जाता है।

तमिलनाडू और केरल में हनुमान जयंती का पर्व मारघाझी  महीने( धनु मास) की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन दोनों राज्यों के मशहूर हनुमान मंदिरों नन्गानल्लूर, नामाक्कल, सुचिन्ध्रम, थ्रिक्कावियूर और अलाथियूर में हनुमान जयंती का भव्य समारोह आयोजित किया जाता है।

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में हनुमान जयंती का पर्व 41 दिनों तक मनाया जाता है। इन राज्यों में  हनुमान जयंती चैत्र की पूर्णिमा से शुरू होकर वैसाख के कृष्णपक्ष में दसवें दिन खत्म होती है।

वहीं महाराष्ट्र में भी हनुमान जयंती का पर्व चैत्र महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी हनुमान जयंती का पर्व बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। हनुमान जयंती के बाद आने वाले पाँच मंगलवार को पूरे शहर में जगह-जगह लंगर लगते हैं।

Celebration of Hanuman Jayanti in the grand Hanuman temples of the country-देश के भव्य हनुमान मंदिरों में हनुमान जयंती का जश्न

वैसे तो राम भक्त हनुमान के भक्त भी देश के हर कोने में पग-पग पर मिल जाते हैं और इस दिन देश के हर मंदिर में हनुमान जयंती का जश्न काफी धूम-धाम से मनाया जाता है। लेकिन देश में स्थित हनुमान जी के कुछ मंदिरों में हनुमान जयंती का भव्य आयोजन होता है।

दिल्ली के करोल बाग स्थित संकटमोचन मंदिर (झंडेवालान मंदिर), हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित जाखू मंदिर, उत्तर प्रदेश के शहजहाँपुर में विरासत घाट पर स्थित हनुमत धाम, कर्नाटक की राजधानी बंगलुरु में अगारा मंदिर, दिल्ली के छतरपुर में स्थित छतरपुर हनुमान मंदिर, पंजाब के अमृतसर में राम तीर्थ मंदिर, तेंलगाना में स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर, हरियाणा के फतेहाबाद में स्थित खालदा वाले हनुमान मंदिर में हनुमान जयंती का सबसे भव्य आयोजन होता है। इन मंदिरों में सूरज की पहली किरण के साथ ही पूरे विधि-विधान से हनुमान की उपासना की जाती है।

इस दौरान कई मंदिरों और धार्मिक स्थलों में रामाचरितमानस का अखण्ड पाठ, सुन्दरकाण्ड पाठ, श्रीमद् भागवत कथा, भागवद पुराण का पाठ, विष्णु पुराण का पाठ होता है। साथ ही भगवान विष्णु का जलाभिषेक भी किया जाता है। इसके बाद भंडारा आयोजित किया जाता है, जिनमें बड़ी सख्यां में श्रद्धालु हनुमान जी का प्रसाद ग्रहण करते हैं।

Hanuman’s birth Story- हनुमान की जन्म कथा

पौराणिक ग्रंथो में हनुमान के जन्म से संबंधित कई कथाएं मिलती हैं। जिसके अनुसार हनुमान का जन्म अंजानेरी पर्वत पर हुआ था। उनकी माता अंजना, स्वर्ग की अपसरा थीं, जिन्हें एक ऋषि के श्राप के कारण धरती पर मानव रूप में निवास करना पड़ा था। वहीं, हनुमान के पिता सुमेरु के राजा केसरी थे। इसीलिए हनुमान को अंजनीपुत्र और केसरीनंदन भी कहा जाता है।

पौराणिक ग्रंथों में हनुमान के जन्म के संदर्भ में उल्लेखित हैं कि अंजनी ने 12 साल तक रुद्र (भगवान शंकर) की तपस्या की और उनसे पुत्र का वरदान माँगा। तब भगवान शंकर ने खुद पुत्र रूप में अंजनी के घर जन्म लिया। माना जाता है कि हनुमान का जन्म अपनी माता अंजनी का श्राप हरने के लिए हुआ था। रुद्र का अवतार होने के कारण उन्हें हनुमान का एक नाम रुद्रेय भी है।

हनुमान को पवनपुत्र या मारुति नंदन भी कहा जाता है। 16वीं शताब्दी में संत एकनाथ द्वारा रचित भावार्थ रामायण में हनुमान के पवनपुत्र होने की कथा का विस्तार में उल्लेख मिलता है। इस कथा के अनुसार जिस समय अंजनाभगवान रुद्र की तपस्या कर रहीं थीं, उसी समय अयोध्या के राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्ठी यज्ञ का आयोजन किया था। यज्ञ समाप्ति के बाद उनके कुलगुरु ऋषि वशिष्ठ ने एक खीर से भरा पात्र राजा दशरथ को देते हुए अपनी तीनों रानियों को खिलाने के लिए कहा। तभी एक चील ने उस पात्र को झपटा और थोड़ी सी खीर चोंच में भरकर उड़ गई। अंजानेरी पर्वत पर पहुँचते ही उसने खीर अपनी चोंच से छोड़ दी और हवा के बहाव में वो खीर उड़ते हुए तपस्या कर रही अंजनी के हाथ पर जा गिरी, जिसे अंजनी ने ग्रहण कर लिया। माना जाता है कि पवन देव की सहायता से मिली वही खीर खाने की वजह से हनुमान का जन्म हुआ। इसीलिए उन्हें पवनपुत्र और मारुति नंदन कहा जाने लगा।

Hanuman in Ramcharitmanas- रामचरितमानस में हनुमान

रामायण में राम और हनुमान के रिश्ते को इन पंक्तियों से समझा जा सकता –‘दुनिया चले न श्री राम के बिना और राम जी चले न हनुमान के बिना’। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस में हनुमान एक मुख्य किरदार हैं। जहाँ एक तरफ हनुमान ने लंकानगरी में घुस कर माता सीता का पता लगाकर अपनी बुद्धि का प्रमाण दिया, तो वहीं लंका को जलाकर अपने साहस का। उन्होंने संजीवनी उठा कर अपने बल का परिचय दिया तो सीना चीर कर भक्ति का। इस तरह यह कहना अतिश्योक्ति न होगी की रामायण भले ही श्री राम पर आधारित थी लेकिन उसे पूरा हनुमान ने किया था।

हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में राम की रामायण में मुख्य भुमिका निभाने वाले हनुमान इकलौते ऐसे भगवान हैं, जो कलयुग में भी धरती पर ही वास करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखा है कि धर्म की स्थापना हेतु राम अवतार का उद्देश्य पूरा होने के पश्चात जब विष्णु स्वरूप श्री राम का वैकुंठ प्रस्थान करने का समय आया तो उन्होंने अपने श्रेष्ठ भक्त हनुमान को धरती पर ही रहने का आदेश दिया था। राम ने हनुमान को अनंनत काल तक घर-घर में राम कथा पहुँचाने का दारोमदार सौंपा था, जिससे की राम अवतार हमेशा के लिए अमर हो जाए और भविष्य में लोग राम के चरित्र को मोक्ष प्राप्ति के लिए जीवन आदर्श के रूप में अपनाएँ। यही कारण है कि आज भी हनुमान को कलयुग का सबसे प्रभावशाली देवता माना जाता है।

Hanuman as a devotee of Rama- राम के भक्त के रूप में हनुमान

राममचरितमानस, हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा महाकाव्य है। गोस्वामी तुसलीदास द्वारा रचित इस महाकाव्य ने राम को एक जन नायक बना दिया, जिनके पदचिन्हों पर चलकर एक आदर्श जीवन का बीज बोया जा सकता है। रामचरितमानस की प्रसिद्धि का ही नतीजा है कि शायद ही दुनिया में कोई ऐसी शख्सियत हो जो राम के नाम से इत्तेफाक न रखती हो। आज हिंदुस्तान के हर हिस्से में एक राम भक्त बसता है। बावजूद इसके आदि काल से लेकर आधुनिक काल तक जब-जब राम के परम भक्त की जिक्र छिड़ता है तो नाम हमेशा हनुमान का ही आता है।

दरअसल बहुत कम लोग इस सच को जानते होंगे कि रमाचरितमानस के रचयिता खुद गोस्वामी तुलसीदास भी हनुमान के सबसे बड़े भक्त थे, या यूँ कहें कि वो पहले हनुमान के भक्त थे तब प्रभु श्री राम के।

हिन्दू पौराणिक ग्रथों में हनुमान को भगवान शिव का अवतार भी बताया गया है। मान्यता है कि नारायण और शिव एक-दूसरे के उपासक हैं। यही कारण है कि जब भगवान विष्णु ने राम अवतार में जन्म लिया तो शिव भी हनुमान के रूप में राम भक्ति का स्वाद चखने के लिए धरती पर अवतरित हुए।

ऐसाकहा जाता है कि सबसे पहले रामायण हनुमान ने ही लिखी थी। लंका कांड शुरू होते ही हनुमान  ने हिमालय जाकर वहां के पहाड़ों पर अपने नाखूनों से रामायण लिखनी शुरू कर दी थी।जिसे बाद में वाल्मिकी ने पढ़ा था। हालांकि वाल्मिकी ने जब हनुमान की लिखी रामायण पढ़ी तब तक उन्होंने स्वयं रामायण को दुनिया के पहले महाकाव्य के रूप में पंक्तिबद्ध कर दिया था। यही नहीं हनुमान जी के संस्कृति  में 108 नाम हैं और हर नाम उनके जीवन के अध्ययों का सार संक्षेप में प्रस्तुत करता है।

References

Written by Ramesh Chauhan

A Hindi content writer. Article writer, scriptwriter, lyrics or songwriter, Hindi poet and Hindi editor. Specially Indian Chand navgeet rhyming and non-rhyming poem in poetry. Articles on various topics especially on Ayurveda astrology and Indian culture. Educated best on Guru shishya tradition on Ayurveda astrology and Indian culture.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Bengali New Year Celebration - पहला बैसाख के रूप में बंगाली नव वर्ष का जश्न

Bengali New Year Celebration as poila Baisakh- पहला बैसाख के रूप में बंगाली नव वर्ष का जश्न

New year festival - दुनिया के विभिन्न देशों में नए साल का पर्व

Hindi New Year of India- भारतवर्ष का हिन्दी नव वर्ष