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नरेंद्र मोदी का पूरा नाम नरेंद्र दामोदर दास मोदी है। उनका जन्म 17 सितम्बर 1950 को गुजरात के वाड़नगर जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम दामोदर दास मोदी और माता का नाम हीराबेन मोदी है। 1968 में मोदी जी का विवाह हुआ था। उनकी पत्नी का नाम जशोदाबेन मोदी है।

नरेंद्र मोदी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई वाड़नगर से ही की। यहां वो पढ़ाई के साथ-साथ वाड़नगर रेलवे स्टेशन पर स्थित चाय की दुकान में हाथ भी बटाते थे। मोदी जी के अध्यापकों के अनुसार वो पढ़ने में तेज होने के अलावा एक बेहतरीन वक्ता, वाकपटुता में माहिर और थिएटर में दिलचस्पी रखने वाली शख्सियत थे।

वहीं मोदी जी बचपन से ही राजनीति से काफी प्रभावित थे। वो महज आठ साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का हिस्सा बन गए थे और उसकी स्थानीय शखाओं में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भी शिरकत करते थे।

यहां मोदी जी RSS नेता लक्षमण राव इनामदार से मिले, जोकि वकील साहब के नाम से मशहूर थे। जहां वकील साहब ने मोदी जी से प्रभावित होकर उन्हें बालस्वयंसेवक का नाम दिया वहीं मोदी जी ने भी उन्हें अपना मार्गदर्शक बना लिया।

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नरेंद्र मोदी का राजनीतिक जीवन | Narendra Modi par nibandh

1968 में शादी के महज कुछ ही समय बाद मोदी जी महज 18 साल की उम्र में घर छोड़कर भारत भ्रमण पर निकल गए थे। इस दौरान उन्होंने उत्तर भारत और उत्तर-पूर्व भारत की सैर की और तभी एक आश्रम में रुकने के बाद स्वामी विवेकानन्द के जीवन से खासे प्रभावित भी हुए।

लगभग 2 साल के भ्रमण के बाद मोदी जी गुजरात वापस लौटे और इनामदार के सुझाव पर औपचारिक रुप से RSS का हिस्सा बन गए। इसी दौरान मोदी जी की मुलाकात 1971 में अटल बिहारी वाजपेयी से हुई, जिनके साथ रहकर मोदी जी ने राजनीति के कई दावं-पेंच सीखे।

कुछ ही समय में मोदी जी RSS के पूर्णकालीक प्रचारक बन गए और जिसके तहत उन्होंने न सिर्फ संघ की विचारधारा का प्रचार-प्रसार करना शुरु किया बल्कि सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी की कई गतिविधियों पर खुलकर विरोध भी दर्ज कराया।

वहीं राजनीति में अपना करियर स्थापित कर चुके मोदी जी ने बचपन में गरीबी के कारण अधूरी छूटी पढ़ाई को पूरा करने का मन बनाया। इसी कड़ी में उन्होंने 1978 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक किया और 1983 में गुजरात विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में राजनीतिक विज्ञान की डिग्री हासिल की।

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी

2001 में गुजरात के तात्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल के खराब स्वास्थय के कारण नरेंद्र मोदी को गुजरात की गद्दी सौंप दी गयी।

हालांकि लाल कृष्ण अडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे बीजेपी के वरिष्ठ नेता मोदी जी में अनुभव के अभाव के कारण उन्हें राज्य का मुख्यमंत्री बनाने को लेकर काफी संशय में थे।

लेकिन कुछ ही समय बाद गुजरात में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों ने सभी सवालों पर पूर्णविराम लगा दिया। इन चुनावों में न सिर्फ बीजेपी में बहुमत हासिल किया बल्कि बतौर मुख्यमंत्री मोदी जी के नाम पर भी जनता ने मुहर लगा दी।

इसी के साथ 7 अक्टूबर 2001 को मोदी जी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रुप में शपथ ग्रहण की।

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गुजरात के मुख्यमंत्री के रुप में मोदी जी का कार्यकाल | pm modi as gujarat cm | Narendra Modi essay in Hindi

गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी जी के समक्ष कई चुनौतियां विद्यमान थीं। इस कड़ी में पहला नाम है 2002 में होने वाले गुजरात दंगों का, जिसमें लगभग एक हजार लोगों की मौत हो गयी और हजारों की संख्या में लोग घायल हो गए थे। narendra modi gujarat riots

हालांकि तमाम रुकावटों के बावजूद मोदी जी ने राज्य के विकास के लिए कई प्रभावपूर्ण नीतियों की पहल की। इसी का नतीजा था, कि लगातार तीन बार गुजरात का मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद मोदी जी ने गुजरात मॉडल के साथ ही 2014 के लोकसभा चुनावों में एंट्री की और प्रधानमंत्री चुने गए।

भारत के प्रधानमंत्रीः नरेंद्र मोदी

2014 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीजेपी भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई और 26 मई 2014 को मोदी जी ने देश के 14वें प्रधानमंत्री रुप में शपथ ग्रहण की।

प्रधानमंत्री के रुप में मोदी जी ने देश को कई महत्वपूर्ण सौगातें दीं। नए भारत की इस संकल्पना में प्लानिंग आयोग को बर्खास्त कर नीति आयोग की स्थापना, मन की बात कार्यक्रम, डिजीटल इंडिया पहल, ईंधन मुक्त भारत के लिए उज्जवला योजना, गांधी जयंती के दिन स्वच्छ भारत मिशन का आगाज और आयुष्मान स्वास्थय योजना के रुप में न सिर्फ भारत की बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थय योजना की शुरुआत मोदी सरकार की नीतियों का ही परिणाम है।

इसी के साथ 2019 में मोदी जी अपना कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने और साथ ही साथ 2019 के चुनावों में जीत का परचम लहराने के बाद मोदी जी सबसे लम्बा कार्यकाल ग्रहण करने वाले देश के चौथे प्रधानमंत्री भी बन गए।

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प्रधानमंत्री मोदी का दूसरा कार्यकाल | modi government second tenure | मेरे प्रिय नेता नरेंद्र मोदी पर निबंध

पिछले पांच सालों में बेमिसाल काम करने और मजबूत विपक्ष के अभाव में मोदी सरकीर 2019 में फिर से दिल्ली की गद्दी पर काबिज हुई और प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरे कार्यकाल के लिए देश के बागडोर संभाली।

अपने दूसरे कार्यकाल में भी मोदी मंत्रीमंडल ने जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरते हुए कई मुखर और कठिन फैसले लिए। 5 अगस्त 2019 को कश्मीर से धारा 370 हटाना इन्हीं फैसलों में से एक था, जिसके लिए कहीं मोदी सरकार की जमकर सरहाना की गयी तो कहीं लोकतंत्र को खतरा करार देते हुए आलोचनाओं का अंबार भी लगा।

इसी कड़ी में दशकों से कोर्ट के कठघरे में फैसले की राह देख रहे राम मंदिर को हरी झंडी दिखाने से लेकर नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA protest), NRC, और किसान बिलों (farm laws) को लेकर मोदी सरकार खासी चर्चा में रही।

2020 में जहां समूची दुनिया कोरोना वायरस महामारी से त्रस्त थी, वहीं संयुक्त राष्ट्र और … सहित कई वैश्विक मंचों ने देश को महामारी की त्रासदी से बाचने के भारत सराकर के प्रयासों की भी सरहारना की।

इस दौरान जहां पीएम मोदी की अपील पर समूचे देश ने एकजुट होकर लॉकडाउन और कोरोना गाइडलाइन्स का पालन कर कोरोना के खिलाफ जंग जीतने में अकल्पनीय सहयोग दिया, वहीं भारत सरकार ने भी न सिर्फ देश को वैक्सीनेटेड करने का काम किया बल्कि वैक्सीन डिप्लोमैसी के तहत अफ्रीका सहित कई पड़ोसी देशों को भी वैक्सीन मुहैया कराई। यही नहीं ऑपरेशन सागर (operation sagar) और आपरेशन वंदे मातरम (operation vande matram) के अंतर्गत भी भारत सरकार ने कई रिकॉर्ड कायम किए।

हालांकि इस दौरान अर्थव्यवस्था के डगमगाते पहिए के कारण सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली मोदी सरकार कई बार सवालों के कठघरे में खड़ी होती नजर आती है, लेकिन दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का वैश्विक मंचों पर लगातार उभरना, आतंकवाद (terrorism) जैसे मुद्दों पर बेबाकी से अपनी आवाज उठाना, हरित ऊर्जा (renewable energy) की तर्ज पर अंतर्राष्ट्रीय सौर्य संगठन (International solar alliance) की नींव रखना और जलवायु परिवर्तन के तहत पैरिस समझौते (paris agreement) को सख्ती से लागू करना पीएम मोदी के नए भारत की संकल्पना को साकार करता है।

बतौर प्रधानमंत्री मोदी जी न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भा खासे लोकप्रिय हैं। यही कारण है कि मशहूर टाइम पत्रिका ने 2020 में लगातार पांचवीं बार पीएम मोदी का नाम दुनिया की सौ प्रभावशाली शख्सियतों की फेहरिस्त में शुमार किया है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाद पीएम मोदी इस लिस्ट में शामिल होने वाले तीसरे राजनेता हैं।

reference-
Narendra Modi essay in Hindi

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