आयुर्वेद में शिरोधारा क्या है? उसके फायदे एवं प्रक्रिया – What is Shirodhara in Ayurveda? Procedure and Its Benefits

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आयुर्वेद एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा विज्ञान है जिसकी उत्पत्ति आज से तकरीबन ५००० साल पहले हुई। आयुर्वेद में रोगों से मुक्ति पाने और स्वस्थ रहने के लिए कई प्रकार के अलग अलग तौर तरीके बताए गए है। यह विज्ञान रोगी के रोग को दूर करने के साथ साथ स्वस्थ लोगों के स्वास्थ्य का रक्षण करने पर भी अधिक ध्यान देता है। आयुर्वेद में रोग से बचने के लिए कई सारे उपाय एवं विधि बताई गई है।

“Prevention is Better than Cure”

आयुर्वेद अपनी शिरोधारा प्रक्रिया के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। आज हम आयुर्वेदिक शिरोधारा प्रक्रिया के बारे में जानेंगे और साथ ही यह भी देखेंगे कि यह कैसे की जाती है और इसके फायदे क्या होते है।

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शिरोधारा के फायदे shirodhara ke fayde

Shirodhara

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शिरोधारा क्या होती है? – What is Shirodhara?

Shirodhara
Shirodhara

शिरोधारा दो संस्कृत शब्दों से बना है – “शिरो” अर्थात सिर और “धारा” अर्थात बहना। शिरोधारा एक आयुर्वेदिक प्रक्रिया है जिसमे मरीज के सिर पर तेल या फिर अन्य औषधीय द्रव्यों की धारा निश्चित समय तक की जाती है। इसलिए इसे शिरोधारा कहते है। शिरोधारा के दौरान द्रव्य की सामान्य धारा की वजह से मस्तिष्क के भाग मे स्थित दो अति महत्वपूर्ण बिंदुओं उत्तेजित होते है – आज्ञा मर्म और महा मर्म, जिससे मानसिक रूप से चेतना एवं संतुलन की अनुभूति होती है। आज्ञा मर्म को चेतना का द्वार माना गया है और इसे आयुर्वेद में तीसरी आँख (The Third Eye) भी कहा गया है।

आम तौर पर यह मस्तिस्क के रोज जैसे की उन्माद, जड़ते बाल, स्ट्रेस, आदि की चिकित्सा के लिए किया जाता है, लेकिन यह कायाकल्प प्रक्रिया के रूप मे भी किया जाता है। आयुर्वेद अनुसार इसमे इस्तेमाल होने वाले तेल के गुणों की वजह से मस्तीस्क के भाग मे वात और पित्त दोष का शमन होता है और कई रोगों से राहत मिलती है। इसमे इस्तेमाल होने वाले तेल या औषधि मरीज की प्रकृति और विकृति पर निर्धारित होता है।

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शिरोधारा के प्रकार – Types of Shirodhara

आयुर्वेद में शिरोधारा को कई अलग-अलग नाम से जाना जाता है। चरक और सुश्रुत संहिता के अनुसार शिरोधारा को सिरोथरा, शिरो शेक, शिरो परिषेक आदि नाम से जाना गया है। शिरोधारा मे उपयोग में आने वाले द्रव्य के आधार पर कई प्रकार के शिरोधारा बताए गए है। नीचे कुछ शिरोधारा के प्रकार बताए गए है।

स्नेह धारा

आयुर्वेद में स्नेह का मतलब होता है चिपचिपा, संहधारा मे चिपचिपे गुण वाले तेल एवं घी की धारा सिर पर की जाती है। यह प्रक्रिया करने के लिए औषधीय तेलों को अलग अलग सामान्य तेलों के साथ मिलाया जाता है। वात एवं कफ दोष के असंतुलन को ठीक करने के लिए आम तौर पर गर्म तेलों का उपयोग किया जाता है और पित्त दोष के लिए ठंडे तेलों का।

क्षीरधारा

आयुर्वेद में क्षीर का मतलब होता है दूध। क्षीरधारा में मरीज के सिर पर दूध की धारा की जाती है। दूध को अन्य औषधियों के साथ मिलाकर उपयोग में लिया जाता है। क्षीरधारा वात पित्त दोष के रोगों के लिए अति फायदेमंद होता है। इसका उपयोग सिर दर्द, तनाव, अनिद्रा आदि के लिए किया जाता है।

तक्रधारा

“तक्र” अर्थात छाछ। तक्रधारा मे सिर पर छाछ की धारा की जाती है। इससे सिर मे स्थित वात रोग का शमन होता है और वात के रोग जैसे के ऐंगज़ाइटी, सिर दर्द, बेचैनी, अतिरिक्त विचार आदि मे राहत होती है।

शिरोधारा कैसे की जाती है – प्रक्रिया? How is Shirodhara Done?

Shirodhara
Shirodhara

शिरोधारा एक प्रचलित और प्रसिद्ध आयुर्वेदिक कायाकल्प प्रक्रिया है जिसका उपयोग भारत में सदियों से किया आ रहा है। शिरोधारा करने के लिए एक शांत एवं आरामदायक वातावरण का चयन किया जाता है। यह प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होती है।

  1. सबसे पहले, मरीज को अपनी पीठ के बल एक आरामदायक स्थिति में लेटाया जाता है।
  2. लेटने के बाद उसके मस्तिष्क के ठीक ऊपर एक छेद वाले लोटे अथवा अन्य कोई बर्तन में औषधीय तेल या तरल भरा जाता है।
  3. यह औषधीय तेल / तरल बर्तन के छेद से निकल कर एक समान धारा में मरीज के कपाल के बीचों बीच गिरता है।
  4. यह स्थिति में रोगी को ३० से ६० मिनट तक एक शांत एवं आरामदायक वातावरण में रखा जाता है।
  5. सेशन खत्म होने के बाद, रोगी को अच्छे से नाहने भेज दिया जाता है ताकि अतिरिक्त तेल शरीर पर न चिपका रहे।

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शिरोधारा में उपयोग होने वाले द्रव्य – Liquids Used in Shirodhara

शिरोधारा में कई प्रकार के द्रव्यों का उपयोग किया जाता है। यह चिकित्सक पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से शिरोधारा मे तिल के तेल का उपयोग होता है क्योंकि यह अच्छी तरह से अन्य तेलों के साथ मिश्रित हो जाता है। इसमें अन्य कुछ विशेष तेलों / पदार्थों का समावेश भी किया जा सकता है जैसे की:

●     नारियल तेल
●     क्षीरबला तेल
●     महानारायण तेल
●     घी
●     बटर
●     छाछ
●     नारियल पानी
●     शुद्ध पानी

यह प्रक्रिया मूल रूप से कपाल के बीच के हिस्से को द्रव्य की स्थिर धारा की मदद से उत्तेजित करना होता है। इसमें विशेष औषधि मात्र दोषों के शमन के लिए उपयोग होती है। अन्यथा शिरोधारा में कोई विशेष औषधि या तेल की जरूरत नहीं है। यह मानसिक फायदे के लिए शुद्ध जल की मदद से भी किया जा सकता है।

शिरोधारा के फायदे – Health Benefits of Shirodhara

शिरोधारा एक शारीरिक एवं मानसिक रूप से शरीर को आराम देने वाली एवं सुखदायक प्रक्रिया है। इसके कई फायदे देखने को मिलते है। शिरोधारा के कुछ फायदे यहा बताए गए है।

अनिद्रा मे फायदेमंद

एक अनुसंधान के मुताबिक, शिरोधरा करने से अनिद्रा मे फायदा होता है जिसे अंग्रेजी मे इनसोमनिया कहा जाता है। आयुर्वेद कहता है की शरीर मे वात दोष बढ़ने से अनिद्रा जैसी परेशानी होती है। शिरोधारा मे वात दोष का शमन करने वाले तरालों की मदद से इसको काफी हद तक ठीक किया जा सकता है।

व्यग्रता एवं मानसिक तनाव मे उपयोगी

आज कल व्यस्त जीवनशैली की वजह से मानसिक तनाव एवं रोग भी बढ़ गए है। हर कोई व्यक्ति अपने जीवन मे किसीना किसी पल मानसिक तनाव एवं व्यग्रता का अनुभव करता ही है। शिरोधारा का योगा के साथ प्रयोग करके मानसिक तनाव एवं व्यग्रता जैसी बीमारियों मे से राहत मिल सकती है।

बालों के लिए फायदेमंद

शिरोधारा को बालों के लिए अति फायदेमंद माना जाता है। यह मस्तिष्क मे वात-पित्त दोष का शमन करके बालों की जड़ों मे रक्त प्रवाह को बढ़ाता है जिससे जड़ते बाल, रूखे बाल, सफेद बाल आदि परेशनिओ से राहत मिलती है।

ध्यान को बढ़ाता है

शिरोधारा मे हमारे कपाल के बीचों बीच तरल की एक स्थिर धारा की जाती है जिससे हमारा अजना चक्र उत्तेजित होता है। इसे आयुर्वेद मे ‘The Third Eye’ भी कहा गया है। यह वही जगह है जहा पर हमारा पिनीयल ग्लैन्ड मौजूद होता है। इससे हमारे दिमाग मे हॉर्मोन्स का निर्माण बढ़ता है और हमारी मानसिक कार्यक्षमता मे भी सुधार आता है।

वात-पित्त दोष को संतुलित करता है

शिरोधारा मुख्य रूप से वात-पित्त दोष का शमन करने के लिए की जाती है। यह दोष हमारे मस्तिष्क में संचय हो कर कई अलग अलग बीमारियों का निर्माण करते है। नियमित रूप से शिरोधारा करने से वात-पित्त दोष संतुलित रहते है और मानसिक एवं शारीरिक शांति मिलती है।

इन फ़ायदों के अतिरिक्त, शिरोधारा कई अलग अलग बीमारियाँ जैसे की पुराना सिर दर्द, माइग्रैन, फैशल परैलिसिस, अनिन्द्र, उन्माद, व्यग्रता, आदि रोगों मे किया जाता है और फायदेमंद भी होता है।

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FAQs Shirodhara in hindi


शिरोधारा प्रक्रिया कितने देर तक चलती है? – How long is a Shirodhara Treatment?

शिरोधरा प्रक्रिया आम तौर पर ३० मिनट से ६० मिनट तक चल सकती है और यह रोगी एवं उसकी परिस्थिति पर निर्धारित होता है। यह प्रक्रिया ३, ७, १४, या २८ दिन तक की जा सकती है।

क्या शिरोधारा बालों के लिए अच्छा होता है? – Is Shirodhara Good for Hairs?

शिरोधारा बालों के लिए फायदेमंद साबित हुई है। यह प्रक्रिया मस्तिष्क मे स्थित वात-पित्त दोष का शमन करके बालों के मूल मे रक्तप्रवाह बढ़ाकर कोमल एवं स्वस्थ बाल प्रदान करने मे मदद करती है। इसका उपयोग जड़ते बाल, सफेद बाल, रूखे बाल आदि परेशानियों मे अवश्य करना चाहिए।

क्या शिरोधारा घर पर किया जा सकता है? – Can we do Shirodhara at Home?

हा, शिरोधारा घर पर भी किया जा सकता है। आप इसे घरपर सस्ते मे एवं नियमित रूप से कर सकते हो। आपको सिर्फ एक शांत एवं आरामदायक जगह चुननी है और शिरोधारा के लिए बर्तन टाँगने की व्यवस्था करनी है। इसमे, कोई अन्य विशेष आवश्यकता नहीं होती।

शिरोधारा के बाद क्या नहीं करना है? – What should not be done after Shirodhara?

शिरोधारा मुख्य रूप से वात-पित्त का शमन करने वाली प्रक्रिया है। इसको करने के बाद आपको खानपान एवं जीवनशैली मे अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी ताकि इसकी असर बनी रहे। शिरोधारा करने के बाद आपको वात एवं पित्त का प्रकोप करने वाले खुराक का सेवन नहीं करना है। कैफीन युक्त पेय का सेवन नहीं करना है और कोई भी व्यसन सेवन करना है।

शिरोधारा के लिए कौन सा तेल सबसे अच्छा है? – Which Oil is Best for Shirodhara?

आम तौर पर शिरोधारा में कई तरल, तेल एवं पदार्थों का उपयोग होता है, लेकिन शरीर के दोष एवं उनकी स्थिति के अनुसार शिरोधारा के लिए तरल का चयन किया जाता है। लेकिन, आयुर्वेद में तिल के तेल का उपयोग शिरोधारा में सबसे ज्यादा होता है क्योंकि यह तेल अन्य विशेष तेलों के साथ मिल सकता है। इसके, अतिरिक्त इसके उष्ण गुण की वजह से वात दोष का शमन भी होता है। 

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