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आयुर्वेद अनुसार मानसिक स्वास्थ्य एवं डिप्रेशन के लिए योग – Yoga for Depression and Mental wellbeing according to Ayurveda in Hindi

डिप्रेशन – जिसे हिंदी में अवसाद भी कहते है, आजकल की युवा पीढ़ी में तेज जीवनशैली की वजह से सामान्य होता जा रहा है। डिप्रेशन और मानसिक रोगों की जागरूकता की कमी की वजह से अधिकतम लोगों को पता ही नहीं होता की वे मानसिक रोग से पीड़ित है।। हम सभी के जीवन में कोई न कोई ऐसी परिस्थिति जरूर आती है जहा हम अत्यधिक दुःख का अनुभव करते है। लेकिन क्या आप जानते है की अगर यह दुःख ज़्यादा समय तक टिका रहे तो डिप्रेशन को जन्म देता है। आज हम देखेंगे की हम किस तरह से योग और प्राणायाम की मदद से कैसे डिप्रेशन से छुटकारा पा सकते है।

आयुर्वेद में स्वास्थ्य का वर्णन करते हुए अष्टांग हृदय में बताया गया है की प्रसन्न इंद्रिय, आत्मा, मन और रोगों से मुक्त शरीर ही स्वस्थ व्यक्ति की निशानी है। इसीलिए शरीर के साथ साथ मानसिक रोगों पर ध्यान देना अनिवार्य हो जाता है। आयुर्वेद चिकित्सा ने हमेशा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर भी उतना ही ध्यान दिया है। इसके अतिरिक्त, आयुर्वेद में जैसे शरीर दोष – वात, पित्त और कफ बताया गया है वैसे ही तीन मानसिक दोष का भी वर्णन किया गया है। जिनके असंतुलन से मानसिक विकार की उत्पत्ति होती है।

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आयुर्वेद अनुसार हम ३ मुख्य घटक से बने हुए होते है – १. मनस २. शरीर ३. आत्मा और ४. इन्द्रिया। जिनमे ज्ञानेद्रियाँ और कर्मेन्द्रियों का समावेश भी हो जाता है। इन प्राथमिक के संतुलन की गतिशीलता ही हमारे स्वास्थ्य नियंत्रित करती है। इन घटक में से मनस का असर हमारी मानसिक स्थिति पर अधिकतम होता है। इसे हम आम भाषा में मन भी कहते है। मनस तीन मानसिक दोष का स्थान है, जिन्हे कही जगह पर मानसिक गुण भी कहा गया है। यही मानसिक दोष के असंतुलन से मानसिक विक़ार की उत्पत्ति होती है।

मानसिक स्वास्थ्य एवं मानसिक त्रिदोष – Mental wellbeing and three mental doshas

सत्व, रज और तमस तीनों मानसिक दोष है जो की हमारी मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रखने में मदद करते है और उनके वृद्धि से रोगों की उत्पत्ति होती है। मानसिक और शारीरिक दोष एक दूसरे को कई हद तक प्रभावित करते है। शारीरिक दोष के असंतुलन से मानसिक दोष पर भी असर पड सकता है और यह विपरीत रूप से भी सच है।

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सत्व सबसे से शुद्ध दोष है इसलिए इसको मानसिक गुण बताया गया है जिसकी वृद्धि होने पर कोई मानसिक रोग की उत्पत्ति नहीं होती। सत्व को पवित्रता एवं ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। यह तीनों दोष के आधार पर किसी भी व्यक्ति की मानसिक प्रकृति भी तय की जाती है। रज और तमस गुण की वृद्धि से कई मानसिक रोग जैसे की डिप्रेशन (अवसाद), एंग्जायटी (चिंता), रेस्टलेसनेस (व्याकुलता) आदि की उत्पत्ति होती है। नीचे दिए गए कोष्ठक में मानसिक दोष एवं उनकी विशेस्ताएं बताई गई है।

दोषविशेषताउदहारण
सत्वपवित्रता और ज्ञानसात्विक मनुष्य – किसी फल या किसी भी तरह के लाभ की अपेक्षा के बिना समाज की सेवा करना
रजकार्य और इच्छाएंराजसिक मनुष्य – स्वयं के लाभ हेतु कोई भी कार्य करना
तमसअज्ञानता और दुष्कर्मतामसिक मनुष्य – खुद के स्वार्थ के हेतु समाज अथवा अन्य किसी व्यक्ति या जीव को हानि करना
मानसिक त्रिदोष

प्राणायाम और योग – डिप्रेशन का रामबाण इलाज

हमने देखा की सभी मानसिक रोगों की उत्पत्ति मानसिक दोष में असंतुलन की वजह से होती है और डिप्रेशन उनमें से एक है। डिप्रेशन को हिंदी में अवसाद भी कहते है। अधिक समय तक दुःख का अनुभव करना यह डिप्रेशन का मुख्य लक्षण है। आयुर्वेद में स्वस्थवृत्त अनुसार योग करने से नहीं केवल शारीरिक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है लेकिन यह मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रखने में भी मदद करता है। योग करने से मानसिक मन में स्थिरता प्राप्त होती है और मानसिक दोष – रज और तमस का शमन होता है।

Boston University School of Medicine (BUSM) के शोधकर्ताओं के द्वारा प्रसिद्ध Journal of Psychiatric Practice में भी योग और प्राणायाम को डिप्रेशन के लिए फ़ायदेमंद बताया है। प्राणायाम जिसे अंग्रेजी में Breathing Exercises भी कहते है, मानसिक स्थिति को संतुलित करने मे बहुत कारगर साबित हुआ है। हर रोज सुबह १० मिनट प्राणायाम करने से शरीर से मानसिक परिस्थिति संतुलित होती है और दोष का शमन होता है।

डिप्रेशन के लिए प्राणायाम- Pranayam for depression

प्राणायाम रोज करने से शरीर में नई ऊर्जा आती है और मानसिक शांति की प्राप्ति भी होती है। प्राणायाम हर रोज सुबह करना चाहिए। सुबह के समय हमारे शरीर में सत्व गुण सबसे ज़्यादा होता है जिसकी वजह से सुबह जल्दी उठकर प्राणायाम और योग करने से कई फायदे होते है। इसके अतिरिक्त सुबह के समय, वातावरण में प्रदूषण की मात्रा कम होने की वजह से शुद्ध सांसें मिलती है जो की शरीर एवं मन के लिए बहुत लाभदायक है। मानसिक रोगों के लिए अनुलोम विलोम भ्रमरी प्राणायाम को सबसे श्रेष्ठ मन माना जाता है पर आप दूसरे प्राणायाम भी कर सकते है।

अनुलोम विलोम कैसे करे? – How to do Anulom Vilom?

डिप्रेशन के लिए योग
अलोम बिलोम: डिप्रेशन से बचने के लिए

अनुलोम विलोम करने के लिए सबसे पहले अपने योगामेट पर पद्मासन में बैठ जाए और निम्नलिखित तरीके से प्रक्रिया करे:

  1. सबसे पहले अपने दोनों हाथों को घुटनो पर रख दे।
  2. अब अपने अँगूठे की मदद से दाहिने नथुने को दबाइये और साँस धीरे धीरे अंदर ले।
  3. अब अँगूठे और ऊँगली की मदद से दोनों नथुनों को दबाइये और सांसों को रोके रखे।
  4. अब बाये नथुने को बंध रखते हुए, दाहिने नथुने से सांस छोड़े।
  5. इसी तरह अब बायें नथुने से सांस लेकर दाहिने नथुने से छोड़नी है और एक साइकिल पूरा करना है।

ऊपर बताये गए स्टेप्स को ४-५ बार दोहराना है। ऐसा करने पर मन में शांति की अनुभूति होती है और मानसिक परिस्थिति बेहतर बनती है।

भ्रमरी प्राणायाम कैसे करे? – How to do Humming Bee breathing exercise

 डिप्रेशन के लिए योग
भ्रामरी प्राणायाम: डिप्रेशन से बचने के लिए

प्राणायाम करने के लिए सबसे पहले एक शांत और आरामदायक जगह का चयन करे। भ्रमर का मतलब होता है भवरा। इस प्राणायाम में हमें मुँह से भवरे की तरह गुनगुनानेकी आवाज़ करते हुए सांस को बहार निकलना है। भ्रमर प्राणायाम करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया करे:

भ्रामरी प्राणायाम
  1. सबसे पहले आंखें बांध करके आरामदायक स्थिति में बैठ जाए।
  2. अपने नाक की मदद से सांस अंदर ले और अपने होठों को हल्का सा बंध रखते हुए मुँह से भवरे जैसी गुनगुनानेकी आवाज़ के साथ सांस को धीरे धीरे बहार छोड़े।
  3. यह प्रक्रिया १०-१५ मिनट तक करें।

भ्रमर प्राणायाम करते समय पूरा ध्यान गुनगुनानेकी आवाज़ पर केंद्रित करना है। क्षमता से ज़्यादा लम्बे समय तक सांस न छोड़े अन्य था हानि हो सकती है। भ्रमर प्राणायाम करने से डिप्रेशन एवं एंग्जायटी में काफी हद तक राहत मिलती है।

डिप्रेशन के लिए योग – बलासन – Child pose Yoga for Depression

 डिप्रेशन के लिए योग
बालासन: डिप्रेशन से बचने के लिए

बलासन करने से मन शांत होता है और स्ट्रेस एवं एंग्जायटी (चिंता) से राहत मिलती है। इसमें आपके शरीर का नीचला और पिछला भाग हलके से स्ट्रेच होता है जिससे आपके को राहत मिलती है। शरीर में शांति की अनुभूति होने से डिप्रेशन से लड़ने में आपको मदद मिलती है। बलासन को सबसे आसान आसनो में से एक माना जाता है।

  1. सबसे पहले, अपने आपको घुटनो के बल निचे बैठा दे।
  2. अब, अपने हाथों को घुटनो पर रख कर दोनों पैर को अपनी कमर के हिसाब से एक दूसरे से दूर र्फैलाना है।
  3. अब, अपने शरीर के ऊपरी हिस्से को आगे की और अपने घुटनो के बिच में धीरे धीरे मोड़े और अपने सर को ज़मीन पर टीका दे।
  4. अपनी हथेलियों को भी आगे की और लाकर अपने सिर के दोनों साइड निचे की ओर ज़मीन पर रख दे और इसी परिस्थिति में ५-१० मिनट तक आसन बनाये रखे।

डिप्रेशन के लिए योग – सेतु बंधासन – Bridge pose Yoga for Depression

 डिप्रेशन के लिए योग
सेतु बंधासन: डिप्रेशन से बचने के लिए

सेतु बंधासन शरीर के पिछले भाग में स्थित मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और कमर दर्द में भी राहत प्रदान करता है। डिप्रेशन, एंग्जायटी और स्ट्रेस जैसी परिस्थितियों में यह बहुत कारगर साबित हुआ है।

  1. सेतु बंधासन करने के लिए सबसे पहले पीठ के बल लेट जाना है। अपनी हथेलियों को नीचे की और रखते हुए अपने हाथों को दोनों साइड ज़मीन पर रखे।
  2. अपने घुटनों की मदद से अपने पैरो को ऊपर की और उठाये और ध्यान रखे की घुटने सीधे एड़ी पर ही हो और पैर एक दूसरे से थोड़ी दूरी पर हो।
  3. अब धीरे से अपनी पीठ को भी ऊपर उठाये और ध्यान दे की दोनों जांघ एक दूसरे से समानांतर हो।
  4. थोड़ी देर तक इसी आसन में आप को टिकाये रखिये।

डिप्रेशन के लिए योग – हलासन – Plow pose Yoga for Depression

डिप्रेशन के लिए योग
हलासन: डिप्रेशन से बचने के लिए योग

हलासन हमारे तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को शांत करता है और थकान एवं तनाव को भी दूर करता है। यह आसन थाइरोइड ग्रंथि को भी उत्तेजित करता है जिससे शरीर के मूड एवं ऊर्जा स्तर में भी सुधर आता है।

  1. सबसे पहले, अपने हाथों को साइड में रखते हुए और हथेलियों को नीचे की ओर रखते हुए पीठ के बल लेट जाए।
  2. जब आप सांस ले तब अपने पेट की मांसपेशियों की मदद से अपने पैरो को ऊपर – ९० डिग्री के एंगल पर उठाने की कोशिश करे।
  3. सामान्य तरीके से सांस लेना जारी रखे और अपने हाथों की मदद से अपने पिछले हिस्से को सहारा देते हुए, उन्हें ऊपर की ओर उठाये।
  4. अब अपने पैरो को पूरा १८० डिग्री पूर्ण करते हुए अपने पैरो के अँगूठे को अपने सिर के ऊपर ज़मीन को स्पर्श करादे।
  5. इसी परिस्थिति को १-२ मिनट देर तक बनाये रखे और फिर आराम से आरामदायक स्थिति में पहोचा दे।

इसके अतिरिक्त आप मानसिक स्वास्थ्य बनाये रखने के लिए और डिप्रेशन, एंग्जायटी, स्ट्रेस आदि रोगों से छुटकारा पाने के लिए ध्यान का प्रयोग भी कर सकते है। यहाँ दिखाए गए डिप्रेशन के लिए योग मात्र आपकी शिक्षा के लिए है, कृपया इन्हे करने से पहले योग विशेषज्ञ की सलाह ज़रुर ले।

Reference –

wikipedia. “Yoga as Therapy.” Remedial Yoga, Wkipedia, 2020

Written by Vishal Dave

I am Vishal Dave from Surendranagar, Gujarat. I am currently pursuing a bachelor's degree in Ayurveda and I am very much passionate about writing.

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