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अजाक्षीर: आयुर्वेद में बकरी का दूध पीने के फायदे और नुकसान – Benefits and side effects of Goat’s milk (Aja Ksheera) in Ayurveda

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दूध का सेवन विश्व भर में सदियों से प्रचलित है। अलग अलग जगहों पे अलग अलग पशुओं के दूध का सेवन किया जाता है। हमारे देश में गाय और भैंस के दूध के साथ साथ बकरी के दूध का सेवन भी किया जाता है। दूध का सेवन आम तौर पर बच्चों में सबसे अधिक पाया जाता है। बकरी के दूध को आयुर्वेद में अजाक्षीर कहते है।

अजा मतलब बकरी और क्षीर मतलब दूध। आचार्य चरक द्वारा रचित चरक संहिता में क्षीर वर्ग में अलग अलग पशुओं के दूध का वर्णन किया गया है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में कई रोगों में बकरी के दूध का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

चरक संहिता में बकरी के दूध की अपार उपयोगिताओं का वर्णन किया गया है। आज हम बकरी के दूध के औषधीय गुण और उसके आयुर्वेद चिकित्सा में उपयोग के बारे में चर्चा करेंगे।

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अजाक्षीर: बकरी के दूध की आयुर्वेदिक विशेषताएँ

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  • लघु गुण: लघु गुण की वजह से बकरी का दूध बाकियों के मुकाबले आसानी से पाचन हो जाता है। इसीलिए, बच्चों, बुजुर्ग और जिनमे पाचन शक्ति कमजोर होती है उसमे भी आसानी से पाचन हो जाता है। बकरी का दूध बच्चों के लिए श्रेष्ठ माना गया है। गाय के दूध की तुलना में बकरी के दूध में लिपिड्स का कद छोटा होने की वजह से यह आसानी से पाचन होता है।
  • शीत वीर्य : बकरी के दूध का वीर्य शीत होता है। जिसकी वजह से शरीर की गर्मी का शमन होता है और शरीर ठंडा पड़ जाता है। शीत वीर्य होने की वजह से इसका उपयोग रक्तपित्त (शरीर के अलग अलग हिस्सों से खून बहना) जैसी बिमारिओं में भी होता है।
  • ग्राही : ग्राही का मतलब वो आयुर्वेदिक औषधि जो भूख बढ़ाती है और पाचनक्रिया में मदद भी करती है। बकरी का दूध पाचनतंत्र में स्थित मलादि पदार्थों से जुड़ कर उनको आगे धकेलता है और पाचनप्रक्रिया में मदद करता है। इसके अतिरिक्त बकरी के दूध के सेवन से पाचनतंत्र में मिनरल्स का अवशोषण बढ़ता है।
  • शोष हर : बकरी का दूध ठंडा होने की वजह से शरीर की प्यास बुझाता है और शरीर को पोषण भी मिलता है।
  • स्तन्य सात्म्य : बकरी का दूध बच्चों को स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए फ़ायदेमंद है।
  • त्रिदोषहर : बकरी का दूध तीनो दोषों का शमन करता है, अर्थात यह तीनों शारीरिक दोष – वात, पित्त और कफ का शमन करता है।

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बकरी तथा गाय के दूध के पोषक तत्वों की तुलना :

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Aja ksheera: बकरी का दूध पीने के फायदे एवं उपयोग

1. बकरी का दूध – डेंगू के लिए रामबाण इलाज :

डेंगू के मरीज़ों में बकरी का दूध बेहद असकारक साबित हुआ है। बकरी के दूध में भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम और कैल्शियम पाए जाते है जो की प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने में मदद करते है।

डेंगू में बकरी का दूध कैसे पीना चाहिए?
  • डेंगू में मरीज़ो को दवाइयों के अलावा ओर भी सहायक उपचार करने की सलाह दी जाती है। आम तौर पर रोज़ाना एक गिलास बकरी के दूध का सेवन करने से डेंगू में काफी सहायता मिलती है। बकरी का दूध डेंगू के मरीज़ों के लिए रामबाण इलाज माना जाता है।

2. बकरी का दूध – टीबी (क्षयरोग) के लिए :

बकरियां टीबी (क्षयरोग) जैसी बिमारिओं से इम्यून होती है और उन्होंने कई रोगों के विरुद्ध एंटीबाडीज मौजूद होती है। यह एंटीबाडीज उनके दूध में भी उपलब्ध होती है, जो हमें रोगों के खिलाफ पैसिव इम्युनिटी बनाने में मदद करती है। बकरी के दूध का सेवन फेफड़ों के टीबी (क्षयरोग) में बहुत कारगर साबित हुआ है। क्षयरोग में बकरी के दूध का सेवन हल्दी के साथ करने से फायदा होता है।

3. बकरी का दूध – दस्त के लिए :

बकरी के दूध में एंटी माइक्रोबियल लीसोजाइम्स पाए जाते है जो की दस्त मिटाने में मदद करते है। आयुर्वेद में दस्त का वर्णन अतिसार के नाम से किया गया है। चरक और सुश्रुत संहिता सहित कई अन्य संहिताओं में भी बकरी के दूध को खुनी दस्त के लिए रामबाण इलाज बताया गया है।

दस्त में बकरी का दूध कैसे पीना चाहिए?
  • बकरी के दूध को शहद या शक्कर के साथ ठंडा ही लेना चाहिए। इससे शरीर को ऊर्जा एवं ठंडक मिलती है।
  • बकरी के दूध को चावल की लाल रंग की प्रजाति (रक्त शाली) के साथ लेने से भी अतिसार में राहत मिलती है।
  • एक भाग काले तिल को चार भाग शक्कर के साथ मिलाकर उसका बकरी के दूध के साथ सेवन करने से खुनी दस्त में राहत मिलती है।

4. बकरी का दूध – रक्तपित्त के लिए :

हमारे शरीर में जब पित्त दोष बढ़ जाता है और रक्त को दूषित करता है तब दूषित रक्त धातु शरीर के अलग अलग भागों से बहार आती है जिसे आयुर्वेद में रक्तपित्त कहते है। रक्तपित्त में शरीर के अलग अलग छिद्रों में से खून निकलने लगता है।

रक्तपित्त में बकरी के दूध का सेवन अति उत्तम बताया गया है। रक्तपित्त में बकरी के दूध से बने घी को मधुका और दूध के साथ उबालकर दिया जाता है।

5. बकरी का दूध – मजबूत हड्डियों के लिए :

कैल्शियम मजबूत हड्डियों के लिए अनिवार्य है और उसकी कमी की वजह से ऑस्टियोपोरोसिस और कमजोर हड्डियों जैसी परेशानियों की उत्पत्ति हो सकती है। एक अनुसंधान के अनुसार, गाय के दूध के मुक़ाबले बकरी के दूध में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है।

6.    बकरी का दूध – बवासीर के लिए :

आयुर्वेद में बवासीर को अर्श भी कहते है। बवासीर के इलाज में बकरी के दूध को एक अच्छा उपाय बताया गया है। आयुर्वेद में बवासीर के लिए बकरी के दूध का उपयोग कई तरीकों से बताया गया है। इसको अन्य आयुर्वेदिक औषधियों के साथ अनुपान के रूप में भी लिया जा सकता है।

बवासीर में बकरी का दूध कैसे पीना चाहिए?
  • वास्तुक (बथुआ) के जूस के साथ बकरी के दूध का सेवन करने से बवासीर में राहत मिलती है।
  • बकरी के दूध में हल्दी और काला नमक मिलकर भी बवासीर में लाभ होता है।

7. बकरी का दूध – गठिया (गाउट) के लिए :

गाउट को आयुर्वेद में “वातरक्त” कहा गया है। जब शरीर में वातदोष बढ़ कर रक्त धातु को दूषित करता है, जो जॉइंट्स में पहुँच कर ठोस पत्थर जैसा बन जाता है, जिसे गाउट अथवा गाउटी आर्थराइटिस भी कहते है। आयुर्वेद में गाउट के मरीज़ो को बकरी के दूध का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

गाउट में बकरी का दूध कैसे पीना चाहिए?
  • तिल और मधुक को बकरी के दूध के साथ पेल कर, उसकी पेस्ट को जोड़ों पर लगाने से गाउट से होने वाले जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है।
  • सहचर और जीवंती के मूल को बकरी के दूध के साथ पेल कर, उसकी पेस्ट को जोड़ों पर लगाने से गाउट से होने वाले जोड़ों के दर्द से राहत मिलती है।

इसके अतिरिक्त, आयुर्वेद संहिताओं के अनुसार बकरी का दूध का उपयोग और कई बिमारिओं जैसे की उदररोग, शोष, गुल्म आदि रोगों में बताया गया है।

बकरी के दूध का सेवन कैसे करे?

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इन्फेक्शन्स से बचने के लिए बकरी के दूध को हमेशा सेवन करने से पहले उसको उबालना चाहिए। अगर हो सके तो पास्चराइस्ड दूध का सेवन ही करें।

६ मास से कम आयु के शिशुओं को यह दूध न दे। छोटे बच्चों को हमेशा बकरी के दूध में ३ गुना पानी मिलाकर ही पिलाना चाहिए।

बकरी का दूध पीने के नुकसान :

हमने देखा की बकरी का दूध कैसे हमें कई रोगों से लड़ने में बचाता है और हमारे स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने में मदद करता है लेकिन कई मामलो में इसके कुछ गंभीर साइड इफेक्ट्स भी देखने को मील सकते है जैसे की :

  • दस्त
  • उलटी होना
  • पेट में दर्द
  • ब्रूसेलोसिस
  • पक्षघात
  • किडनी फेलियर
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गाय के कच्चे दूध के सेवन से उपरोक्त साइड इफेक्ट्स देखने को मिल सकते है, जो की बहुत घातक साबित हो सकते है। इन्फेक्शन से बचने के लिए हमेशा दूध को उबालकर ही पीना चाहिए। इसके अलावा, बकरी के दूध में भारी मात्रा में चरबी और कोलेस्ट्रॉल पाए जाते है, जिसके अत्यधिक सेवन से मोटापा एवं हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी व्याधियों की उत्पत्ति हो सकती है।

आखिर में, बकरी के दूध के अनेक फायदे है लेकिन इसके शरीर पर होने वाले दुष्प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, इसे हमेशा उबालकर ही पीना चाहिए। बकरी के दूध का सेवन करने से पहले हमेशा अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर ले। अगर सही तरीके से सेवन किया जाये तो बकरी का दूध अमृत समान है।

Written by Vishal Dave

I am Vishal Dave from Surendranagar, Gujarat. I am currently pursuing a bachelor's degree in Ayurveda and I am very much passionate about writing.

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