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सिरदर्द के लिए योग: आयुर्वेद के दृष्टिकोण से – Yoga for Headache as per Ayurveda in Hindi

आजकल की व्यस्त जीवनशैली की वजह से मानसिक एवं शारीरिक रोग बढ़ते जा रहे है। मेन्टल स्ट्रेस एवं मानसिक अशांति की वजह से सिरदर्द जैसी बिमारियों की उत्पत्ति होती है। सिरदर्द एक आम बीमारी है। जीवन में हर कोई व्यक्ति इसका अनुभव कोई ना कोई जगह पे करता ही है। योग अनुसार सिरदर्द एक ‘अधिज व्याधि’ है जिसमे मानसिक अव्यवस्था की वजह से ‘प्राण’ के प्रवाह में अड़चन आने की वजह से शारीरिक पीड़ा की उत्पत्ति होती है। स्वस्थ मन एवं प्रसन्न इंद्रिय स्वस्थ व्यक्ति की निशानी है।

कोई भी कार्य में सफलता पाने के लिए स्वस्थ मन एवं प्रसन्न इंद्रिय अनिवार्य है। इसके अलावा, सिरदर्द की वजह से रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कई बाधाएँ भी आ सकती है। सिरदर्द का जिक्र आयुर्वेद में ‘शिराशूल’ से किया गया है। सिरदर्द के अनेक कारण हो सकते है जैसे की मानसिक तनाव, डिहाइड्रेशन, नींद की कमी, थकान वग़ैरा। सिरदर्द का कारण जो भी हो, आयुर्वेद में कई योगासन एवं प्राणायाम बताये गए है जिसकी मदद से सिरदर्द से छुटकारा पा सकते है, चाहे वो सालों पुराना ही क्यों न हो।

                योग के फायदे अनेक है। योग करने से सिर में रक्त संचार बढ़ता है, जो सिरदर्द में लाभदायक है। योग करने से मानसिक तनाव कम होता है और मानसिक शांति की प्राप्ति भी होती है। हर आसन को बेहद ध्यान पूर्वक और लगन से करना चाहिए। कोई भी आसन या योग करने के लिए एकदम शांत वातावरण चुने।

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आयुर्वेद अनुसार सिरदर्द के लिए प्राणायाम -Breathing exercise for headache

आयुर्वेद में प्राणायाम हमेशा सबसे आसान एवं प्रसिद्ध रहा है। प्राणायाम शब्द दो शब्दों से बना है – ‘प्राण’ और ‘आयम’ जिसका मतलब होता है प्राण को दीर्घ बनाना। प्राणायाम में श्वसन क्रिया पर ध्यान दिया जाता है और उसे नियंत्रित किया जाता है। आयुर्वेद अनुसार सही तरीके से श्वसन करने से सभी रोगों का नाश होता है एवं गलत तरीके से श्वसन करने से रोगों की उत्पत्ति होती है।

सिरदर्द के लिए प्राणायाम का प्रयोग अति लाभदायक होता है। पुराने सिरदर्द से पीड़ित मरीज़ों को रोज योगासन करने से पहले ५-१० मिनट प्राणायाम करना चाहिए। सिरदर्द में उपयोगी नाड़ी शोधन प्राणायाम करने की विधि नीचे बताई गई है :

नाड़ीशोधन प्राणायाम (अनुलोम विलोम)

नाड़ी शोधन में शरीर में स्थित नाड़ी (एनर्जी चैनल) की शुद्धि होती है, जिसकी वजह से शरीर में ऊर्जा अच्छे से से बेहती है और सिरदर्द से राहत मिलती है। इसे अनुलोम विलोम भी कहते है। इसे करने से मानसिक तनाव भी दूर होता है।

नाड़ीशोधन प्राणायाम

नाड़ीशोधन प्राणायाम (अनुलोम विलोम) कैसे करे?

अनुलोम विलोम करने के लिए पहले अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा करके आरामदायक स्थिति में (सुखासनामे) बैठ जाए और आँखें बंध करदे।

सिरदर्द के लिए योग

१. अपने दाहिने हाथ को विष्णु मुद्रा में लाकर, उस हाथ की अनामिका और कनिष्ठा को मोड़ देना है। अब ३ लंबी सांस लेकर अपने दाहिने हाथ के अँगूठे से दाहिने नथुने को दबाना है। अब बाएँ नथुने की मदद से एक लंबी एवं आरामदायक सांस लेनी है।

२. अब अपने अँगूठे और उंगलिओ की मदद से दोनों नथुने बंध करके साँस को रोके रखे।

३. अब दाहिने नथुने पर से अँगूठे को हटाकर, बाएँ नथुने को बंध रखते हुए, सांस को धीरे से दाहिने नथुने के द्वारा बहार निकले।

४. अब फिर से बाएँ नथुने को बंध रखते हुए, दाहिने नथुने द्वारा धीरे से लंबी सास अंदर ले

५. अब दोनों नथुने बंध करके सांस को रोके रखे।

५. अब बाएँ नथुने को खोलकर, दाहिने नथुने को बंध रखते हुए, सांस को धीरे से बहार छोड़े।

ऐसा ८ बार तक दोहराना है और इससे शरीर में ताज़गी आ जाती है एवं तनाव से राहत मिलती है।

सिरदर्द के लिए योग:

सिरदर्द के लिए विभिन्न प्रकार के योगासन का प्रयोग चिकित्सको द्वारा किया जाता है। वैज्ञानिक अनुसंधान अनुसार सिरदर्द और आधासीसी जैसी मस्तिष्क की बिमारिओ के लिए प्राणायाम और योगासन कारगर साबित हुआ है। आयुर्वेद चिकत्सको द्वारा कई योगासनों की सलाह दी जाती है।

इनमे से अधिकतम योगासनों में गर्दन और पीठ की मांसपेशियों पर ध्यान दिया जाता है। योग न ही केवल शारीरिक रोगों में असरदार है बल्कि मानसिक एवं आध्यात्मिक शांति पाने में भी योग का महत्व है।

सिरदर्द के लिए पद्मासन योग (Lotus Pose for Headache)

इस आसन की मदद से मन को शांत करके गहरे ध्यान की प्राप्ति की जा सकती है। पद्म का मतलब होता है कमल, इस आसन को नियमित तौर पे करने से कोई भी व्यक्ति कमल की तरह खिल उठता है। तो चलिए देखते है यह आसन कैसे करते है।

Yoga for Headache - sir dard ke liye yoga

पद्मासन कैसे करे?

१. सबसे पहले, अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए और दोनों पैरो को सामने की और रख कर बैठ जाए।

२. अब दाहिने घुटने को मोड़कर, उसे बायीं जांघ पर रख दे। यह सुनिश्चित करे की पैर का तला ऊपर की ओर हो और एड़ी पेट के करीब हो।

३. अब दूसरे पैर के साथ भी यही प्रक्रिया कीजिए।

४. दोनों पैरो को विपरीत जांघों पर रखते हुए, अपना हाथ घुटनो पर रखे।

५. गर्दन और रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखे।

६. यही मुद्रा को बनाये रखे और लंबी एवं आरामदायक सांस ले।

ध्यान दे: अगर दोनों पैर को एक दूसरे के ऊपर रखने में आपको परेशानी हो रही हो, तो आप सिर्फ एक पैर को दूसरे के ऊपर रख कर अर्ध-पद्मासन में भी बैठ सकते है। घुटनों के दर्द से पीड़ित मरीज़ों को ये आसन चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।

सिरदर्द के लिए सुप्त मत्स्येन्द्रासन योग (Supine Spinal Twist Pose for Headache)

सुप्त मत्स्येन्द्रासन शब्द ३ शब्दों से बना है। सुप्त, मत्स्येन्द्र आने आसन जिसमे सुप्त यानि लेटना, मत्स्येन्द्र यानि मछलिओं का देवता और आसन यानि मुद्रा। इस आसन को लेटकर किया जाता है। आयुर्वेद अनुसार इस आसन को करने से कुण्डली शक्ति की जागृति भी होती है। यह आसन करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत भी होती है। तो चलिए देखते है यह आसन कैसे करते है।

Yoga for Headache - sir dard ke liye yoga

सुप्त मत्स्येन्द्रासन कैसे करे?

सुप्त मत्स्येन्द्रासन करने के लिए सबसे पहले साफ़ जगह पर लेटने के लिए चटाई बिछा ले। चटाई बिछा कर उस पर आराम से सीधा ऊपर की और मुँह करके लेट जाए।

१. अपने दोनों हाथों को कंधो की सीध में बहार की ओर फैला दे।

२. अब दाहिने टाँग के घुटने को धीरे से मोड़कर ऊपर की ओर उठा ले और दायें पैर को बायें घुटने पर रख दे।

३.  सांस को छोड़ते हुए, दायें नितंब को उठाकर पीठ को बायीं तरफ मोड़ ले। ऐसा करते वक़्त दोनों हाथों को ज़मीन पर ही रखे।

४. इसी मुद्रा में, दायें घुटने को शरीर की बायीं तरफ ले जाने का प्रयास करे। दायें घुटने को बायीं तरफ ले जाकर सर को दायीं तरफ घुमायें।

५. यह मुद्रा में अधिकतम ४०-६० सेकंड रहकर, यही मुद्रा को दूसरे पैर से विपरीत दिशा में दोहराए।

ध्यान दे: पीठ दर्द, रीढ़ की हड्डी की परेशानी और साइटिका से पीड़ित मरीज़ों को ये आसन केवल आयुर्वेद एवं योग विशेषज्ञ की निगरानी के अंतर्गत ही करना चाहिए।

सिरदर्द के लिए तिर्यक भुजंगासन योग (Twisted Cobra Pose for Headache)

संस्कृत में तिर्यक का मतलब होता है मुँडा हुआ, भुजंग का मतलब होता है सांप और आसन का मतलब होता है मुद्रा। इस योगासन में आपको नीचे की और मुँह करके उल्टा लेटना है। इस आसन में शरीर को काफी मोड़ना होता है इसीलिए बेहतर होगा अगर यह आसन खाली पेट ही किया जाए, इसीलिए तिर्यक भुजंगासन को करने से ४-५ घंटे कुछ नहीं खाना है।

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इस आसन से पाचन क्रिया भी बेहतर होती है। आयुर्वेद में पाचन तंत्र को अधिक महत्व दिया गया है, इसीलिए यह आसन भी महत्वपूर्ण है। तो चलिए देखते है यह आसन कैसे करते है।

Yoga for Headache - sir dard ke liye yoga

तिर्यक भुजंगासन कैसे करे?

तिर्यक भुजंगासन को करने के लिए अपने पेट के बल नीचे लेट जाए। अपने पैरो को साथ रखे और अपनी हथेलिओं को कंधों के समतल एक दूसरे से तक़रीबन २ फ़ीट दूर रखे।

१. सांस अंदर लेते हुए दोनों हथेलिओं पर शरीर के ऊपरी हिस्से का सारा वजन डालते हुए हथेलिओं को ज़मीन की ओर दबाए और अपनी शरीर को धीरे से ऊपर उठाये।

२. अपने मस्तिष्क और शरीर के ऊपरी भाग को ज़मीन से ऊपर उठाये और अपने मस्तिष्क को दायें कंधे की ओर मोड़े और अपने बायें पैर की एड़ी को देखे।

३. ऐसा करते समय दोनों हाथों को एकदम सीधा रखना है और अपनी नाभि को ज़मीन के पास रखना है।

४. इस मुद्रा में थोड़ी देर रहकर अपने मस्तिष्क को आगे की ओर मोड़ ले और धीरे से अपनी कोहनिओं को थोड़ी मोड़कर आरामदायक स्थिति में आइए।

५. इसी प्रकार फिर से यह आसन मस्तिष्क को बायें कंधे पर रखकर दायें पैर की एड़ी को देखते हुए दोहराए।

६. फिर से अपनी कोहनिओं थोड़ा मोड़कर आगे की ओर देखते हुए आरामदायक स्थिति में लौटे।

दोनों तरफ एक-एक बार करने से तिर्यक भुजंगासन का एक दौर पूरा होता है। आप अपनी शक्ति अनुसार चाहे उतनी बार कर सकते है। पीठ और रीढ़ की हड्डी में चोट, गर्भित महिलाएं, पेप्टिक अलसर एवं हर्निया से पीड़ित मरीज़ों को यह आसन नहीं करना चाहिए और करने से पहले आयुर्वेद एवं योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले।

आखिर में, जब आप कई दवाइयाँ लेने के बाद भी सिरदर्द से पीड़ित हो और मानसिक शांति की खोज में हो, तब सिरदर्द के लिए योग एवं प्राणायाम एक उत्तम उपाय बन जाता है। इसके अलावा, हर रोज योग करने से शरीर में नयी ऊर्जा आती है एवं चरबी कम होती है। योग एक फायदे अनेक!

Written by Vishal Dave

I am Vishal Dave from Surendranagar, Gujarat. I am currently pursuing a bachelor's degree in Ayurveda and I am very much passionate about writing.

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