आयुर्वेद अनुसार तेल गण्डूष क्या है? कैसे करे? उसके फायदे एवं महत्व – What is Oil pulling in Ayurveda? How to do it? It’s Importance and Benefits

आयुर्वेद दिनचर्या में कवल और गण्डूष का वर्णन मुँह, मसूड़े एवं दाँतों के रोगों से बचने के लिए किया गया है। कवल का अर्थ होता है कुल्ला करना और गण्डूष में सुबह मुँह में तेल अथवा औषधीय तरल भरकर थोड़ी देर के लिए रखा जाता है। गण्डूष के चार भेद बताये गए है। जिनमें से तेल गण्डूष, जिसे अंग्रेजी में Oil Pulling भी कहते है, आजकल लोकप्रिय होता जा रहा है। मसूड़ों में दर्द, मसूड़ों की सूजन, मुँह में से गंदी बदबू आना, गले में सूखापन आदि परिस्थितियों में गण्डूष का प्रयोग कारगर साबित हुआ है। इसके अलावा इसके और कई फायदे देखने को मिलते है।

तेल गण्डूष क्या है? What is Oil pulling?

आयुर्वेद में गण्डूष का वर्णन मुख रोग एवं मुँह की सफाई के लिए किया गया है। गण्डूष में किसी भी औषधीय तरल को मुँह में थोड़ी देर के लिए ऐसे ही रखा जाता है। आयुर्वेद में अष्टांग संग्रह में गण्डूष के ४ प्रकार बताये गए है, जिनमें से एक स्निग्ध गण्डूष है। स्निग्ध गण्डूष में तेल, घी, शहद आदि चिपचिपे तरल पदार्थों का उपयोग किया जाता है।

तेल गण्डूष में मुँह में एक निर्धारित समय तक तेल को बिना हिलाये रखा जाता है। इससे मुँह, दाँत एवं मसूड़ों की सफाई हो जाती है। आयुर्वेद दिनचर्या में भी इसका वर्णन किया गया है। यह तकनीक आजकल Oil pulling के नाम से पश्चिमी देशों में भी प्रचलित होती जा रही है। इस प्रक्रिया में कई अलग अलग तेल का उपयोग किया जाता है लेकिन अधिकतम समय नारियल के तेल से ही गण्डूष का प्रयोग किया जाता है।

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तेल गण्डूष इसे कैसे करे? How to do Oil Pulling?

तेल गण्डूष कई अलग अलग तेल जैसे की सूरजमुखी का तेल, तिल का तेल, नारियल का तेल, बादाम का तेल आदि तल से किया जा सकता है। नारियल के एंटी बैक्टीरियल गुणों की वजह से नारियल का तेल सर्वश्रेष्ठ माना गया है। बाजार में आपको गण्डूष के लिए विशेष रूप में भी तेल मिल जायेंगे। गण्डूष का प्रयोग ५ साल से काम उम्र वाले बच्चों को नहीं करना चाहिए। अन्य कई स्रोतों पर गण्डूष करने की अन्य प्रक्रिया बताई गई है जो की आयुर्वेदिक शाश्त्रो के मुताबिक नहीं है और उनका कोई वैध संदर्भ नहीं है।

गण्डूष करने के लिए आयुर्वेदिक शास्त्रों में यह विधि बताई गई है:

गण्डूष करने के लिए सबसे पहले आरामदायक स्थिति में सीधा बैठे। गण्डूष करने से पहले कंधो, गालों, कपाल एवं गले पर स्वेदन और मार्दन (तेल से मसाज) करना चाहिए। मसाज करने के बाद तेल को अपने मुँह में पूरी क्षमता तक भर दे। तेल को अपने मुँह में हिलाना नहीं है और एकदम स्थिर ही रखना है जब तक मुँह लार से भर जाये या फिर आँखों एवं नाक में से पानी निकलने लगे, जो की आम तौर पर २० मिनट में हो जाता है।

ध्यान दे: गण्डूष हो जाने के बाद तेल को बहार थूक देना है और निगलना नहीं दे। अगर आपका जबड़ा दर्द करे तो आप २० मिनट की जगह ५ या १० मिनट तक भी कर सकते है।

गण्डूष को रोज सुबह खली पेट दंतधवन से पहले करना चाहिए और ध्यान देना चाहिए की तेल पेट में न जाए। तेल में कई कीटाणुओं एवं विषपदार्थ होने की वजह से निगलने पर अन्य बिमारिओं की उत्पत्ति हो सकती है, इसीलिए प्रक्रिया हो जाने के बाद सावधानी पूर्वक इसे बहार थूक देना चाहिए। इसको श्रेष्ठ तरीके से ज्यादा फायदों के लिए, दिन में ३ बार तक, खली पेट भोजन से पहले, किया जा सकता है।

गण्डूष में उपयोगी तेल – Oils used in Oil Pulling

नारियल का तेल – Coconut Oil

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नारियल का तेल

नारियल का तेल गण्डूष के लिए सर्व श्रेष्ठ माना जाता है। इसमें लॉरिक एसिड नामक तत्व पाया जाता है जो लार के साथ मिलकर सोडियम लौरेट नामक साबुन जैसे तत्व बनता है। जो प्लेक का हटाता है और चमकदार सफ़ेद दांत प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, सोडियम लौरेट के एंटी माइक्रोबियल एवं एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों की वजह से दाँतों एवं मसूड़ों को सूक्ष्म जीवों के खिलाफ सुरक्षा मिलती है और ओरल हायजीन बना रहता है। नारियल तेल का स्वाद भी मोहक होता है। इसमें एंटी माइक्रोबियल, एंटी फंगल एवं एंटी सेप्टिक गुण भी पाए जाते है।

नारियल तेल का उपयोग प्रति दिन किया जा सकता है और मुख्य रूप से मसूड़ों की सूजन (Gingivitis) और मुँह में फंगल इन्फेक्शन (Oral Candidiasis) जैसी बिमारिओ में किया जा सकता है।

जैतून का तेल – Olive Oil

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जैतून का तेल

जैतून के तेल में ७०% मोनोसैच्युरेटेड फैटी एसिड्स पाए जाते है। इसमें और कई जैविक रसायन और विटामिन ए, इ और के पाए जाते है। यह सब घटकों की वजह से जैतून के तेल में एंटी माइक्रोबियल, इम्म्युनोमोड्यूलेटरी एवं एंटीऑक्सीडेटिव गुण पाए जाते है। जैतून के तेल का उपयोग मुख्य तौर पे मुँह की बदबू को मिटाने के लिए किया जाता है। जैतून का तेल प्लेक को मिटाने एवं दाँतों को प्लेक से बचाने के लिए किया जाता है।

तिल का तेल – Sesame Oil

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तिल का तेल

तिल के तेल में सेसमीन, सेस्मोनिल एवं सेस्मिनोल जैसे घटक पाए जाते है जो एंटी ऑक्सीडेंट एवं एंटी बैक्टीरियल गुण वाले होते है। इसके अतिरिक्त बाजार में उपलभ्द Chlorhexidine माउथ वॉश की तुलना में तिल का तेल ५-६ गुना सस्ता होता है।

इसके अलावा और कई तेल जैसे की बादाम का तेल, सूरजमुखी का तेल आदि का उपयोग किया जा सकता है।

तेल गण्डूष के फायदे – Benefits of Oil Pulling

आयुर्वेद में गण्डूष के कई फायदे बताये गए है और उनको आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने भी स्वीकार किया है। मुख्य तौर पर गण्डूष का प्रयोग मुँह एवं दाँतों के रोगों से बचने के लिए एवं उनके इलाज के लिए किया है। माना जाता है की गण्डूष ३० से अधिक रोगों की चिकित्सा में उपयोगी है। आधुनिक ओरल हाइजीन प्रोडक्ट्स एवं दवाओं के अतिरिक्त साइड इफेक्ट्स की वजह से लोगो में गण्डूष (Oil Pulling) प्रचलित होता जा रहा है। गण्डूष के कुछ फायदे नीचे बताये गए है:

ओरल हाइजीन मैंटेन करता है

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ओरल हाइजीन

गण्डूष या फिर Oil Pulling प्रक्रिया में तेल मे से एंटीऑक्सिडेंट्स उत्पन्न होते है जो की सुक्ष्म जीवो को मारकर दाँतों एवं मसूड़ों को इन्फेक्शन से बचाते है। गण्डूष के दौरान, तेल दाँतों एवं मसूड़ों पर एक परत बना देता है और उनको बैक्टीरिया से बचाता है। रोजाना गण्डूष का प्रयोग करने से मसूड़े स्वस्थ एवं गुलाबी रंग के बन जाते है और अन्य रोगों से भी छुटकारा मिलता है।

दाँतों एवं मसूड़ों में सड़न को रोकता है

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दाँतों एवं मसूड़ों में सड़न

गण्डूष करते समय दाँतों एवं मसूड़ों के ऊपर तेल की परत बन जाती है जो की उनको सड़ने से बचाती है। आम तौर पर दाँतों में सड़न दूध का अधिक सेवन करने वाले बच्चों में ज़्यादा पायी जाती है। दूध शक्कर के साथ मिलकर दाँतों में हानिकारक बैक्टीरिया को आमंत्रित करता है। इसीलिए हर बार मीठा दूध पिने के बाद मुँह पानी से अच्छी तरह से साफ़ कर लेना चाहिए।

मसूड़े की सूजन को कम करता है

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मसूड़े की सूजन

मसूड़ों की सूजन को चिकित्सा भाषा में “Gingivitis” भी कहा जाता है। यह आम तौर पर मुँह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया के इन्फेक्शन की वजह से होता है। रोजाना गण्डूष का प्रयोग करने से मुँह में हानिकारक बैक्टीरिया का नाश होता है और मसूड़ों के सूजन में राहत मिलती है। इसके अतिरिक्त, नारियल तेल के एंटी इंफ्लेमेटरी (सूजन घटाने वाले) गुण की वजह से मसूड़ों की सूजन में इसका उपयोग मुख्य तौर पे किया जाता है।

सामान्य स्वास्थ्य में सुधार करता है

आयुर्वेद अनुसार विविध अंग जैसे की गुर्दा, हृदय, फेफड़े, पक्वाशय, मेस्र्दंड आदि हमारी जीभ से जुड़े हुए है। माना जाता है की गण्डूष प्रक्रिया लार के माध्यम से भारी धातुओं (हेवी मेटल्स) को बहार निकालता है जो की शरीर के लिए हानिकारक होते है। इसके अलावा यह शरीर में से और कई विषकतत्व जैसे की केमिकल टॉक्सिन्स, बैक्टीरियल टॉक्सिन्स आदि को निकालने में मदद करता है, जिसकी वजह से पूरे शरीर का शोधन होता है और सामान्य स्वास्थ्य में सुधार आता है।

दाँतों में सफेदी बढ़ाता है

गण्डूष के रोजाना प्रयोग से दाँतों को सड़न एवं अन्य बिमारिओं से राहत मिलती है और धीरे धीरे दाँत अधिक सफ़ेद एवं खूबसूरत बन जाते है।

ऊपर दिखाए गए फ़ायदों के अतिरिक्त गण्डूष करने से साँसों में ताजगी, आवाज में जोश एवं मन को प्रसन्नता प्राप्त होती है। इसके अलावा गले में खराश, सूखा चेहरा, अरुचि, होठों का फटना आदि परिस्थितियों में भी कारगर साबित हुआ है।

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गण्डूष कब नहीं करना चाहिए – Contraindications of Oil Pulling

तेल गण्डूष निम्नलिखित परिस्थितिओं में नहीं करना चाहिए:

  • जहर (विषप्रयोग)
  • बेहोशी (मूर्च्छ)
  • दुर्बलता / कुपोषण
  • ५ साल से कम आयु वाले बच्चें
  • रक्तपित्त
  • आँखों में सूजन
  • अरुचि
  • जो मरीज़ों ने नास्य चिकित्सा ली हो
  • अजीर्ण
  • जबड़े में जकड़न

आखिर में, गण्डूष (Oil Pulling) एक बहोत ही वैज्ञानिक एवं असरदायक प्रक्रिया है जिसके अनेक फायदे है। स्वस्थ दाँतों, मसूड़ों एवं मुँह को रोगों से बचाने के लिए गण्डूष का समावेश हमें हमारे दिनचर्या में करना चाहिए। कई सारे साइड इफेक्ट्स के साथ आने वाले क्लोरहेक्सिडिन जैसे एलोपैथिक माउथ वॉश को अलविदा कहने का समय आ चूका है।

Reference –

Healthline.2020.6 benefits of oil pulling[Accessed 17 November 2020]

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