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कब्ज का घरेलू उपाय – Home Remedies For Constipation in Hindi – कब्ज का आयुर्वेदिक इलाज

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कब्ज (Constipation) एक बड़ी ही जटिल समस्या है। बच्चों से लेकर बड़ो तक सब को यह परेशान कर सकती है। मलत्याग करना एक बड़ी ही महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। जैसे किसी भी जगह को स्वच्छ रखने के लिए समयसर उसकी सफाई रखनी जरुरी होती है, ठीक उसी तरह हमारे शरीर में से टॉक्सिक अथवा अनावश्यक पदार्थो को निकाल ने के लिए शौचक्रिया जरुरी है।

आज हम देखेंगे की कब्ज क्या होता है? कब्ज के कारण और लक्षण क्या है? और कब्ज के घरेलू उपाय क्या है।

कब्ज क्या है? What is Constipation

कब्ज में मरीज का पेट ठीक से साफ़ नहीं होता अथवा शौचक्रिया अनियमित हो जाती है और मल कठिन हो जाता है। इसके कारण मरीज को कई समस्याए हो सकती है। आयुर्वेद में कब्ज को विबंध कहा गया है। कब्ज के कारण मरीज को आलस, पेट में भारीपन, बेचैनी, आदि समस्याओ का सामना करना पड़ सकता है।

सामान्य तौर पे एक स्वस्थ व्यक्ति हररोज शौचक्रिया के लिए जाता है। लेकिन एक कब्ज से पीड़ित व्यक्ति अनियमित रूप से शौच के लिए जाता है – जैसे की दो-तीन दिन में एक बार। यह समय लंबा भी हो सकता है।

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कब्ज का कारण और लक्षण – Causes and Symptoms of Constipation

कब्ज के कई कारण हो सकते है। यह एक रोग कम और अनुचित जीवन शैली का प्रतिक ज्यादा है। आयुर्वेद अनुसार हमारे शरीर में जठराग्नि होती है जिसे अंग्रेजी में Digestive Fire भी कहते है। यही जठराग्नि हमारे खुराक को पाचन करने में मदद करती है। कई बार शरीर के आंतरिक कारणों की वजह से यह मंद पड सकती है और कब्ज जैसी जटिल परेशानियों का कारण बन सकती है।

वात दोष का प्रकोप – वात दोष के प्रकोप की वजह से हमारे आंत की दीवाले सुखी पड़ जाती है और खुराक का ठीक से पाचन नहीं कर सकती और कब्ज होता है।

इसके अतिरिक्त कब्ज के कई और कारण भी हो सकते है जैसे की –

  • अधिक मात्रा में हेवी फ़ूड और ठंडा खाना
  • खाने में फाइबर की कमी (हरी सब्जियां, फल आदि)
  • अत्याधिक मात्रा में स्ट्रेस (मानसिक तनाव) लेना
  • डिहाइड्रेशन – शरीर में पानी की कमी
  • हलनचलन की कमी
  • आहार विहार में बदलाव
  • कुछ दवाइओ के दुष्प्रभाव (Side effects)
कब्ज में कई लक्षण देखने को मिल सकते है जैसे की –
  • मल त्याग करने में परेशानी
  • कठोर मल
  • सिर के पिछले हिस्से में दर्द
  • अनियमित शौच के लिए जाना
  • पेट में दर्द एवं गैस प्रॉब्लम
  • पिण्डलियों में दर्द
  • शरीर में भारीपन
  • आलस
  • बेचैनी

अगर आपको भी ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तो आप यहाँ बताये गई आयुर्वेदिक घरेलु उपाय का प्रयोग कर सकते है। आप निचे दिखाई गए उपचारो में से कोई भी एक का प्रयोग कर सकते है।

कब्ज का घरेलू आयुर्वेदिक उपचार | Swami Ramdev

कब्ज का घरेलु उपाय – Home Remedies For Constipation in Hindi

आयुर्वेद में कब्ज को एक गंभीर समस्या माना गया है, जिसके चलते हमारे शरीर में “आम” की उत्पत्ति होती है जिससे की कई बीमारियों का जन्म होता है। आयुर्वेद में कब्ज के इलाज के लिए रेचक द्रव्यों का वर्णन किया गया है। रेचक द्रव्य आम तौर पर वात का शमन करने वाले या फिर पित्त को उत्तेजित करने वाले होते है।

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कब्ज के लिए एरंड का तेल (Castor Oil)

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एरंड को अरंडी, अरंड, और संस्कृत में गन्धर्वहस्त्मक भी कहते है। एरंड का तेल भारत में सदियों से कब्ज के लिए किया जा रहा है। एरंड का तेल एक लुब्रिकेटीव लैक्सटिव की तरह काम करता है, जो की हमारे अंतड़ी की दिवलो को चिपचिपा बनाकर खुराक को आसानी से बहार निकालने में मदद करता है।

एरंडी के तेल का उपयोग आधुनिक डॉक्टरों द्वारा भी किया जा रहा है। एरंडी के तेल में स्नेह गुणधर्म पाया जाता है जो की हमारे पाचनतंत्र में वात दोष का शमन करके कब्ज से राहत दिलाता है। यह बहोत ही गाढ़ा और चिपचिपा होता है जिसको निगलना काफी मुश्किल होता है। इसीलिए, इसको अन्य द्रव्यों के साथ मिलाकर पिने की सलाह दी जाती है।

एरंड के तेल का उपयोग आप किसी भी फ्रूट जूस, फल, दूध, आदि में मिलाकर कर सकते है। सामान्य तौर पर ३ चम्मच (१५ मि।ली) एरंड के तेल का सेवन करने की सलाह दी जाती है। आप रात को एक गिलास दूध में २-३ चम्मच एरंड का तेल मिलाकर भी ले सकते है।

कब्ज के लिए जैतून का तेल (Olive Oil)

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एक अनुसंधान के आधार पर जैतून का तेल जिसे अंग्रेजी में ओलिव आयल भी कहते है, यह कब्ज का एक कारगर इलाज साबित हो सकता है। हालांकि, जैतून के तेल के उपयोग का सीधा वर्णन तो नहीं किया गया है लेकिन माना जाता है की इसकी स्निग्धता और वात दोष का शमन करने वाली क्षमता की वजह से यह एक कारगर रेचक द्रव्य साबित हो सकता है।

ठीक एरंड के तेल की तरह, जैतून का तेल हमारे आंत की सुखी दिवलो को चिपचिपा बनाकर, खुराक को आसानी से आगे बढ़ने में और उसके मलत्याग में मदद करता है। इसमें ढेर सारे पोषकतत्व पाए जाते है जो पाचनतंत्र को उत्तेजित करके खुराक को पाचन करने में सरल बनाता है।

जैतून का तेल आपको किसी भी आयुर्वेदिक स्टोर / जनरल स्टोर पर मिल जायेगा।

आप जैतून के तेल को अपने आहार में मिला सकते है, जैसे की सलाड को इससे गार्निश करें, सब्जी को जैतून में बनाना, आदि। आप रात को एक गिलास गर्म दूध में २-३ चम्मच जैतून का दूध मिला कर भी अगले दिन राहत की सांस ले सकते है।

अधिकतम प्रभाव के लिए, सुबह सबसे पहले खाली पेट एक चम्मच जैतून का तेल । इससे अधिक लेने से दस्त हो सकता है।

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कब्ज के लिए सौंफ (Fennel Seeds)

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सौंफ कब्ज का एक पारंपरिक घरेलु इलाज है। इसे आमतौर पर खाने में बाद मुखवास के रूप में भी लिया जाता है। यह हमारे आंत की मांसपेशियों को रिलैक्स करता है और कब्ज से मुक्ति दिलाता है। सौंफ में एनेथोल (Anethol) नामक एक तत्त्व पाया जाता है जो की यह सब गुणधर्म के लिए जिम्मेदार होता है।

आप सौंफ को अपने भोजन के बाद मुखवास के तौर पर ले सकते है या फिर निचे बताये गए उपचार का भी प्रयोग कर सकते है –

  • एक छोटे बाउल में सौंफ को ले और उसे भुने।
  • भुनने के बाद उसे अच्छे से मिक्सर ग्राइंडर की मदद से ग्राइंड करके एक पाउडर बना ले।
  • अब इस पाउडर को छन्नी की मदद से छान ले और जार में पैक करके रख दे।
  • आप इस पाउडर को हर सुबह गर्म पानी के साथ आधा चम्मच ले सकते है।

कब्ज के लिए अजवाइन (Carom Seeds)

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अजवाइन एक सुगन्धि एवं तीखी औषधि है। यह भारतीय रसोड़ो में उपयोग होने वाले मसलो में से एक है। यह एक बेहतरीन पाचक द्रव्य है जो पाचन प्रक्रिया को मदद करता है। यह औषधि प्राचीन भारत में एसिडिटी, गैस, कब्ज आदि समस्याओ से बचने के लिए भोजन के बाद ली जाती थी।

आप कब्ज के लिए अजवाइन को निम्नलिखित तरीके से ले सकते है –

  • कब्ज से तत्काल राहत पाने के लिए अजवाइन पाउडर को सोंठ पाउडर और काले नमक के साथ मिलाकर खाये।
  • अजवाइन को गुनगुने पानी में डालकर उसमें नमक मिलाकर पीने से एसिडिटी दूर होती है।
  • अजवाइन और सौंफ को उबालकर उसका पानी पिने से कब्ज से तुरंत राहत मिलती है।

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कब्ज के लिए इसबगोल (Psyllium Husk)

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इसबगोल एक पारम्परिक उपाय है जिसका उपयोग कब्ज और दस्त दोनों में किया जाता है। इसमें कई डिएटरी फाइबरस पाए जाते है जो मल को आसानी से त्यागने में मदद करते है। यह सबसे पहले खुराक के साथ अमाशय में जुड़ जाता है और पानी का शोषण करता है। इसकी वजह से मल में नमी की मात्रा बढ़ जाती है और मल आसानी से आगे बढ़ते है।

आधुनिक विज्ञान एवं आयुर्वेद दोनों इसबगोल के इस तथ्य को स्वीकारते है। यह आपको किसी भी आयुर्वेदिक / मेडिकल स्टोर पर मिल जाएगा। आप इसे ५-१० ग्राम की मात्रा में एक गिलास पानी या फ्रूट जूस में मिलाकर ले सकते है। यह एक फायदेमंद, और किसी भी दुष्प्रभाव से मुक्त कब्ज का रामबाण इलाज है।

कब्ज के लिए त्रिफला (Triphala)

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 त्रिफला – यह तीन आयुर्वेदिक औषधियों का समूह है जिसका उपयोग कई बिमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। इसमें आंवला, बहेड़ा (बिभीतकी) और हरड़ (हरीतकी) पाए जाते है। त्रिफला अपने विविध औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है।

त्रिफला एक पाचक और रेचक द्रव्यसंग्रह है। यह हमारे पाचन तंत्र को साफ़ रखने में मदद करता है। इसके तीनों फल हमारे पाचनतंत्र को संतुलित करने में मदद करते है। इसमें हरड़े / हरीतकी पाया जाता है जो की खुद एक रेचक द्रव्य है जिसका उपयोग विरेचन कर्म में किया जाता है। त्रिफला एक लैक्सटिव है और मल को आसानी से बहार निकाल ने में मदद करता है।

आप त्रिफला चूर्ण, या फिर त्रिफला टेबलेट भी ले सकते है। यह आपको किसी भी आयुर्वेदिक स्टोर पर मिल जाएगी। आप त्रिफला को हर रात सोने से पहले दूध के साथ ले सकते है।

कब्ज के लिए हरड़े / हरीतकी (Haritaki)

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हरीतकी जिसे हिंदी में हरड़े भी बोलते है, यह एक रेचक द्रव्य है जिसका उपयोग विरेचन कर्मा में किया जाता है। यह एक शक्तिशाली रेचक द्रव्य है और इसका इस्तेमाल मात्र बहुकालीन कब्ज के लिए ही करना चाहिए। हरड़े आपको किसी भी आयुर्वेदिक शॉप या जनरल स्टोर पर मिल जाएगी।

हरड़े के फल को सूखा कर गाय के घी में भून कर खाना चाहिए। बेहतर परिणाम के लिए, इसे आप रोज सुबह खाली पेट ले सकते है।

कब्ज के लिए एलोवेरा जेल (Aloe Vera Gel)

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एलोवेरा जिसे संस्कृत में घृतकुमारी कहते है, यह एक विविध गुणों वाला औषधीय पौधा है। इसका उपयोग आप विविध तरह के रोगों में ले सकते है। यह स्वाद में कड़वा होने की वजह से वेट-लोस (वजन कम करने) के लिए प्रसिद्द है। यह डायबिटीज के मरीजों में भी कारगर साबित हुआ है।

एलोवेरा का जूस रेचक होता है। एलोवेरा के चिपचिपेपन की वजह से यह हमारे आंत की दिवालो को चिपचिपा बनाता है और मल को आसानी से आगे बढ़ने में मदद करता है। यह हमारे आंतो में स्थित मश्पेशिओं को भी उत्तेजित करता है जिससे मल को गति मिलती है और कब्ज से राहत मिलती है।

पाचनतंत्र को ठीक करने के लिए आप दिन में २००-२५० मिली एलोवेरा जूस का सेवन कर सकते है.

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कब्ज के लिए निम्बू पानी (Lemon Water)

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निम्बू में पाए जाने वाला सिट्रिक एसिड (Citric Acid) हमारे पाचनतंत्र में स्थित टॉक्सिन्स से लड़ने में मदद करता है और कब्ज में आराम दिलाता है. निम्बू पानी कब्ज का एक प्रसिद्द घरेलु उपचार है. यह हमारे पाचनतंत्र में पानी की मात्रा बढ़ा कर भी मल को आगे बढ़ने में मदद करता है.

  • एक गिलास गुनगुने पानी में एक निम्बू निचोड़ कर पि जाए.

यह एक प्रसिद्द एवं कारगर कब्ज उपाय है.

कब्ज के लिए फाइबर युक्त भोजन (Fibre Rich Diet)

home remedies for constipation in hindi , कब्ज का घरेलु उपाय

असामान्य तौर पर कब्ज और अनियमित पाचन तंत्र आपके अनुचित आहार का प्रतिक हो सकते है. खुराक में रेशे (Fibers) की कमी की वजह से भी क्रोनिक कब्ज (Chronic Constipation) हो सकता है. अपने आहार में रेशेदार (Fiber-rich) फल और सब्जियों का समावेश करें.

नीचे कुछ हाई-फाइबर अनाज, सब्जियों एवं फलों के नाम दिए गए है.
  • नाशपति
  • स्ट्रॉबेरीज
  • सेब
  • केले
  • गाजर
  • बीट
  • ब्रोकोली
  • मसूर दाल
  • राजमा
  • मटर
  • चने
  • पॉपकॉर्न
  • मकई
  • बादाम

Home Remedies For Constipation – FAQs

कब्ज से होने वाले नुकसान?

लम्बे समय तक कब्ज रहने पर गंभीर समस्या प्रकट हो सकती है जैसे की भगंदर, अर्श, आदि। इसके अलावा शरीर में टॉक्सिन्स का संचय होता है जिसे आयुर्वेद में “आम” कहते है। यह आम हमारे शारीरिक दोषों को दूषित करके कई अलग अलग बीमारियां जैसे खून की कमी, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर आदि का कारण बनता है।

कब्ज में परहेज?

कब्ज के मरीजों को हल्का एवं आसानी से पचने वाला खुराक खाना है, जैसे कि पुराने चावल, गेहूं, अरहर, मूंग दाल, आदि. साथ ही भारी खुराक जैसे की नए चावल, मटन-चर्बी, नॉन-वेज, डेयरी प्रोडक्ट जैसे की पनीर, बटर, क्रीम, आदि नहीं खाना है. साथ ही समयसर नींद, व्यायाम, और शौच करने जाना अनिवार्य है. कई बार गतिहीन जीवनशैली और अनियमित निंद्रा की वजह से भी कब्ज हो सकता है. आयुर्वेद अनुसार दिनचर्या का पालन करके आप एक बेहतर जीवन शैली पा सकते है.

कब्ज से तत्काल राहत?

कब्ज से तत्काल राहत पाने के लिए अजवाइन पाउडर को सोंठ पाउडर और काले नमक के साथ मिलाकर खाएं। इससे कब्ज में आपको जल्द ही राहत मिलेगी और गैस आदि की समस्या भी दूर हो जाएगी.

Written by Vishal Dave

I am Vishal Dave from Surendranagar, Gujarat. I am currently pursuing a bachelor's degree in Ayurveda and I am very much passionate about writing.

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