खांसी जुखाम के घरेलु उपाय – Home Remedies For Cough in Hindi

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खांसी जुखाम एक आम समस्या है, जिसकी उत्पत्ति कई कारणों से हो सकती है। आम तौर पर यह सर्दी एवं बारिश की मौसम में वातावरण में नमी की वजह से हो सकती है। आयुर्वेद में खांसी से कई कारण एवं  उपाय बताये गए है।

आमतौर पर शर्दियो में जब भी हमें खांसी-ज़ुखाम आदि की समस्या होती है, तब डाक्टर हमें कई सिरुपस और दवाईआ देते है, जिनके काफी हद तक आराम तो मिलता है लेकिन कई बार वहीं समस्या एक दो हफ्ते बाद फिरसे होती है।

हम सब जानते ही है की आयुर्वेद और एलोपैथिक दवाइओ में जमीम आसमान का अंतर होता है। एलोपैथिक दवाइआ आम तौर पे रोग का जड़ मुड से इलाज करने की वजाए उसके लक्षणों का शमन करती है। वही आयुर्वेद उन्ही रोगों का जड़ मूड से इलाज करने में सक्षम है।

आज हम बात करेंगे खांसी क्यों होती है, उसके प्रकार, एवं घरेलु उपाय

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सर्दी-खांसी क्यों होती है? – Sardi- Khansi kyun hoti hai ?

सर्दी-खांसी एक हमारे शरीर की प्राकृतिक प्रतिक्रिया है जो हमारे श्वसन नलिकाओं में से धुल, इन्फेक्शन्स, एलर्जेन्स आदि को हटाने के लिए होती है। यह हमारे शरीर का बाहरी पदार्थो के विरुद्ध एक प्रतिकारक जवाब होता है।

आधुनिक विज्ञान मानता है की सर्दी-खांसी ज़ुखाम बाहरी वातावरण में से वायरस, बैक्टीरिया, आदि जीवाणुओं के अटैक से होता है। राइनो वायरस (Rhino Virus) सर्दी (Common Cold) के लिए एवं अनेक बैक्टीरिया जैसे की स्यूडोमोनास (Pseudomonas) आदि को आमतौर पे खांसी ले लिए जिम्मेदार माना जाता है।

वही, हमारा आयुर्वेद मानता है की हमारे शरीर में सर्दी खांसी ज़ुखाम आदि की समस्याए हमारे शरीर में स्थित दोषों में होने वाले असंतुलन की वजह से होती है। हमारे शरीर में तीन दोष – वात, पित्त और कफ पाए जाते है। अयोग्य आहार एवं विहार की वजह से इन दोषो में असंतुलन पैदा होता है और रोगो की उत्पत्ति होती है।

आम तौर पर वसंत (रात को) और शिशिर ऋतू में ठंडा खाने से, कोल्ड्रिंक्स पिने से, ठंडे पानी से, शीत वीर्य आहार का सेवन करने से, ठंड़ी हवाए आदि से खांसी-ज़ुखाम आदि की समस्याए होती है।

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खांसी के प्रकार: सुखी खांसी और बलगम वाली खांसी – Types of Cough: Dry Cough And Wet Cough (Productive Cough)

वैसे तो आयुर्वेद में दोषों की स्थिति पर से खांसी के कई प्रकार बताये गए है जैसे की वातज, पित्तज, कफज आदि। लेकिन, आसानी से समज ने के लिए आज हम मुख्य दो प्रकार की खांसी के बारे में बात करेंगे – सुखी खांसी (Dry Cough) और बलगम वाली खांसी (Wet Cough)।

सूखी खांसी क्या है – What is Dry Cough?

जब हमारे शरीर में वात दोष का प्रकोप होता है और फेफड़े  सूखने लगते है तब सुखी खांसी जैसे लक्षण दिखाई देते है। अधिकतर समय, यह समस्या बुज़ुर्गो में वात दोष प्रबल होने की वजह से ज़्यादा देखने को  मिलती है। यह खांसी शिशिर ऋतू में वात दोष का प्रकोप होने की वजह से ज़्यादा होती है।

यह खांसी की एक ख़ास बात है की इसका प्रकोप वात प्राधान्य समय जैसे की सुबह पर ज़्यादा होता है। इसमें बलगम (Sputum) का निकास नहीं होता है जिसकी वजह से हमारी श्वसन नलिकाओं में नुकसान भी हो सकता है।

बलगम वाली खांसी क्या है? – What is Wet Cough?

बलगम वाली खांसी में कफ दोष का प्रकोप होता है और यह कफ बलगम के रूप में बहार निकलता है। यह खांसी आम तौर पर वसंत ऋतू में कफ का प्रकोप होने की वजह से ज़्यादा देखने को मिलती है।

इस खांसी में आपको सफ़ेद, पीला, या फिर हरे रंग का बलगम देखने को मिल सकता है। जिसको आधुनिक विज्ञान इन्फेक्शन का प्रतिक मानता है।

खांसी के घरेलु उपाय – Home Remedies For Cough- Khansi ki Dava

आयुर्वेद आधारित खांसी के इलाज और घरेलु उपचार निचे बताये गए है, जो आपको खांसी में राहत देंगे। निचे बताये गए उपचारो में  से आप कोई भी एक उपचार का प्रयोग अपने लक्षणों के आधार पर कर सकते है।

खांसी के लिए अदरक – Ginger for Cough

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khansi ke liye adrak

अदरक एक गरम औषधि है जो कफ दोष का शमन करती है। इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते है, जैसे की यह एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी बैक्टीरियल, एवं एंटी माइक्रोबियल है। यही सब औषधीय गुण इसे बलगम वाली खांसी का अक्सीर इलाज बनाते है।

आप अदरक को बलगम वाली खांसी में ले सकते है। यह कफ दोष का शमन करके आपको राहत दिलाएगा। आप निचे बताये गई तरिको में से किसी भी एक का प्रयोग कर सकते है।

  • अदरक का सेवन सुबह की चाय में ताजा अदरक का रस डालकर कर सकते है। याद रखे चाय में चीनी कम रक्खे क्योकि चीनी कफ दोष को बढ़ावा देती है।
  • दिन में दो बार, सुबह और शाम, आधा चम्मच शहद में आधा चम्मच अदरक मिला कर सेवन करें।

यहाँ पढ़ें: आयुर्वेदा के अनुसार दिनचर्या

खांसी के लिए तुलसी – Tulsi for Cough

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khansi ke liye tulsi

तुलसी, जिसे अंग्रेजी में हौली बेसिल कहा गया है, यह एक उपचारिक औषधि होने के साथ-साथ आध्यात्मिक महत्व भी रखती है। इसको हिन्दू शास्त्रों में अधिक महत्व दिया गया है। यह माना जाता है की किसी भी आंगन में तुलसी का पौधा होने से उसके वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचय होता है।

आयुर्वेद में तुलसी को एक उष्ण वीर्य वाली औषधि बताया गया है जो की काफ दोष का शमन करती है। इसका उपयोग किसी भी प्रकार के ज्वर (बुखार) में जल्द ही राहत पाने के लिए किया जाता है।

आप तुलसी का निम्नलिखित तरीके से सेवन कर  सकते है।

  • तुलसी के रस को शहद के साथ एक चम्मच दिन में २ बार ले।
  • तुलसी के रस को आप चाय में भी दाल सकते है।
  • किसी भी प्रकार के ज्वर (बुखार) में एक चम्मच तुलसी के स्वरस के साथ शहद मिलाकर पिने से राहत मिलती है।
  • तुलसी अर्क का शहद के साथ सेवन करें।

खांसी के लिए अरडूसी  – Ardusi for Cough

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खांसी के लिए अरडूसी

अरडूसी  को सदियों से खांसी के लिए अक्सीर इलाज माना जाता है। यह एक जादुई औषधि में से काम नहीं है। अरडूसी  में प्राकृतिक तौर पर ब्रोम्हेक्जिन (Bromhexine) जैसे तत्त्व पाए जाते है जो कफ को तोड़ कर उसे बहार निकालने में मदद करते है।

आश्चर्य की बात यह है की Bromhexine जिसका उपयोग बड़ी मात्रा में एलोपैथी में खांसी के लिए उपयोग होता है वह और कुछ नहीं बल्कि एक आयुर्वेदिक औषधि का एक तत्त्व है। अधिकत्तम लोग यह तथ्य से परिचित नहीं है।

अरडूसी  उष्ण औषधि है जो की कफ का नाश करती है और उसके निकास में मदद करती है। आप अरडूसी  का प्रयोग निम्नलिखित तरीके से कर  सकते  है। 

  • अरडूसी  के पत्तों को पानी में मिलकर उसका काढ़ा बनाकर दिन में दो बार सेवन करे।
  • अरडूसी  का स्वरस निकाल कर उसे शहद के साथ ले।
  • आप अलडुसी को चाय में भी दाल सकते हो।

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खांसी के लिए हल्दी – Haldi for Cough

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खांसी के लिए हल्दी

हल्दी आयुर्वेद में प्रसिद्द औषधियों में से एक है। इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते है। इसकी वजह से ही भारतीय खान पान में भी इसका उपयोग सदियों से किया जा रहा है। यह खांसी के लिए एक अक्सीर औषधि है क्यों की यह सुखी और बलगम वाली खांसी दोनों में कारगर साबित हुई है। इसका उपयोग आप निचे दिखाए गए तरीको से कर सकते है।

  • दूध में मिलाकर सुबह शाम दो बार सेवन करें। (सुखी खांसी के लिए)
  • हल्दी को शहद के साथ मिलाकर सेवन करें। (सुखी खांसी के लिए)
  • पानी में थोड़ा नमक और हलदी डालकर सेवन करें।
  • चाय में डालकर सेवन करें।

खांसी के लिए तिल का तेल और सैंधव नमक – Sesame Oil & Rock Salt for Cough

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खांसी के लिए तिल का तेल

तिल का तेल आयुर्वेद में उष्ण माना जाता है। इसका उपयोग आप सुखी और बलगम वाली खांसी दोनों के लिए सैंधव नमक के साथ कर सकते है। नमक छेदन का कार्य करता है और फेफड़ो में जमा कफ को तोड़कर (छेदन) उसे बहार निकलता है।

इसका उपयोग आप निचे बताये गए तरीके से कर सकते है –

  1. एक बाउल में तीन चार चम्मच तिल का तेल ले और उसमे आधा से एक चम्मच सैंधव नमक डाले।
  2. इन दोनों को अच्छे से एक दूसरे के साथ मिला ले और मिश्रण बना ले।
  3. अब इस पेस्ट को अपने फेफड़ो के आसपास मसाज करें।
  4. दिन में यह अलडुसीप्रक्रिया एक दो बार की जा सकती है।

सावधान : तिल का तेल अति उष्ण होता है और इसके अत्यधिक उपयोग से पित्तज परेशानियां जैसे की अलसर, एसिडिटी, सिने में जलन आदि हो सकते है। ऐसा कुछ होने पर तुरंत उसका प्रयोग रोक दे।

याद रखे आपको किसी भी औषधि का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना है। उष्ण औषधीय जैसे की अदरक, तुलसी, दालचीनी, लौंग आदि की वजह से पित्त दोष का प्रकोप हो सकता है और मुँह में अलसर, एसिडिटी, पेप्टिक अलसर, आदि जैसी परेशानिया प्रगट हो सकती है। इसके अतिरिक्त पित्त दोष से पीड़ित रोगिओं को भी इसका सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना है।

सर्दी-खांसी पर सामान्य सलाह

आयुर्वेद अनुसार जीवनशैली में बदलाव लाकर आप सर्दी-खांसी जैसी सामान्य समस्याओ से बच सकते है, जैसे की –

  • आयुर्वेद अनुसार ऋतुचर्या का पालन करें।
  • सुखी खांसी में वात दोष का प्रकोप करने वाली चीज़ वस्तुओ का सेवन न करें।
  • सुखी खांसी में गरम पानी का सेवन न करें।
  • बलगम को यहाँ वहां न निकाले।
  • बलगम वाली खांसी में कफ दोष का प्रकोप करने वाली चीज़ वस्तुए जैसे की ठंडा, हैवी खुराक आदि का सेवन न करें।
  • खांसते समय अपने हाथों या रूमाल की मदद से अपने मुँह को ढँक दे।
  • किसी भी हालत में खांसी को रोकना नहीं है। यह एक अधारणीय वेग है।
  • किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का प्रयोग करते समय अगर कुछ दुष्प्रभाव देखने को मिलता है तो उसका प्रयोग रोक दे।

Sardi Khansi ki Gharelu Upay – FAQ

खांसी जल्दी कैसे ठीक करें?

खांसी को जल्दी ठीक करने के लिए उपरोक्त बताई गयी औषधियों का आप काढ़ा भी बना सकते है। यह काढ़ा खांसी को ठीक करने के साथ साथ आपकी रोग प्रतिकारक शक्ति को भी उत्तेजित करेगा। आप अदरक, हल्दी, तुलसी, लॉन्ग, और निम्बू का उपयोग करके एक बेहतरीन आयुर्वेदिक काढ़ा बना सकते है। 

सूखी खांसी में क्या खाना चाहिए?

सुखी खांसी में आप चिपचिपे, ठंडे और गुरु गुण वाली और वात दोष का शमन करने वाली चीज़ वस्तुए, जैसे की दही, दूध, गाय का घी, मक्खन, आदि ले सकते हो। इसमें आपको ज़्यादा गरम भी नहीं खाना है और ना ही ज़्यादा ठंडा खाना है। सुखी खांसी में खट्टी चीज़े न खाये।

ज्यादा दिन खांसी रहने से क्या होता है?

अगर आपको एक हफ्ते से ज़्यादा खांसी लगातार रहती है तो कृपया अपने नजदीकी अस्पताल में जा कर निदान कराए। यह एक गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। आम तौर पर वातावरण में बदलाव के कारण होने वाली खांसी ३-४ दिन में  ठीक हो जाती है। ज्यादा दिन तक खांसने से फेफड़ो में नुकशान हो सकता है।

खांसी का कारण क्या है?

खांसी के कई कारण हो सकते है जैसे के वातावरण में बदलाव, नमी, एलर्जिक रिएक्शन, अधिक मात्रा में ठंडे पदार्थो का सेवन आदि। आयुर्वेद मानता है की खांसी वातादि दोषो के असंतुलन की वजह से होती है। यही, आधुनिक विज्ञान मानता है की खांसी फेफड़ो में बैक्टीरियल व वायरल इन्फेक्शन की वजह से होती है।

रात को खांसी क्यों आती है?

रात को खांसी आने के कई कारण होते है। आयुर्वेद अनुसार रात को हमारे शरीर में कफ दोष प्राधान्य होता है जिसकी वजह से रात को कफज कास (बलगम वाली खांसी) का प्रकोप ज्यादा होता है। इसके अतिरिक्त, आधुनिक विज्ञान भी यह मानता है की रात को म्यूकस ज्यादा उत्पन्न होता है जिसकी वजह से खांसी ज्यादा आती है।

अधिक खांसी आने पर क्या करें?

अधिक खांसी आने पर अपने पारिवारिक डॉक्टर की सलाह जरूर ले। किसी भी रोग को नजरअंदाज न करे। छोटी छोटी बीमारिया भी एक बड़ी गंभीर बीमारी का पूर्वरूप हो सकती है। जरूर पड़ने पर अपने बलगम का कल्चर रिपोर्ट और अपने फेफड़ो का एक्सामिनेशन भी करवाए।

खांसी में क्या लेना चाहिए?

आम तौर पर खांसी में गुनगुने पानी का सेवन करना चाहिए, लेकिन सुखी खांसी में नहीं करना है। इसके अलावा आप दाल-चावल, सब्जी-रोटी, जैसे सामान्य खुराक खा सकते है। लेकिन ठंडे और हेवी खुराक जैसे की कोल्ड्रिंक, बटर, चीज़, पनीर, ज़्यादा तीखा, मीठा या खट्टा, आदि को बलगम में टालना है।

Reference
Home Remedies for Cough, Patanjali

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