शीत ऋतु पर निबंध | Winter Season Essay in Hindi | Essay On Winter Season In Hindi | सर्दी के मौसम पर निबंध

शीत ऋतु साल के सबसे ठंडे दिनों में से एक होती है। पृथ्वी पर मुख्य रुप से छह ऋतुएं बेहद अहम मानी जाती हैं – ग्रीष्म काल, शीत काल, वसंत ऋतु, हेमंत ऋतु, वर्षा ऋतु और शरद ऋतु। जहां ग्रीष्म काल को गर्म मौसम और तपती धूप के लिए जाना जाता है, वहीं शीत काल ठंडी हवाओं, धुंध, कोहरा और कुछ जगहों पर बर्फबारी के लिए मशहूर है।

इसके अलावा वसंत ऋतु और शरद ऋतु, जिसे पतझड़ भी कहा जाता है, गर्मी और सर्दी के मध्य की ऋतुएं होती हैं, जिनमें गर्म और सर्द हवाओं का मिलाजुला रुप देखने को मिलता है। वहीं हेमंत ऋतु सर्दी के आगमन का संकेत देती है, तो वर्षा ऋतु मूलसलाधार बारिश के लिए जानी जाती है।

शीत ऋतु मुख्य रुप से चार महीने- नवम्बर से फरवरी तक रहती है। इसका समय सूर्य की गति पर निर्भर करता है। जब सूरज धरती के उत्तरी ध्रुव (northern hemisphere) में होता है, तब उत्तरी ध्रुव में सूरज की उपस्थिति के कारण ग्रीष्म ऋतु और दक्षिणी ध्रुव (southern hemisphere) में सूर्य की अनउपस्थिति के चलते शीत ऋतु का वर्चस्व कायम रहता है।

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इसी कड़ी में 23 सितम्बर (equinox) को सूरज भूमध्य रेखा (equator) को पार कर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करता है और उत्तरी ध्रुव में शरद ऋतु के साथ शीत ऋतु का भी आगाज होता है। वहीं इसके ठीक विपरीत प्रक्रिया 21 मार्च (equinox) को सूर्य द्वारा पुनः भूमध्यरेखा करने पर होती है और दक्षिणी ध्रुव में शीत ऋतु की शुरुआत होती है।

हालांकि सूरज की गति अलावा भूमध्यसागर से आने वाली ठंडी हवाएं भी शीत ऋतु को मजबूत बनाने का काम करती हैं। वैज्ञानिक भाषा में इन हवाओं को जेट स्ट्रीम (jet streams) के नाम से भी जाना जाता है, जोकि पश्चिम दिशा से पूर्व दिशा की ओर बहती हैं।

जेट स्ट्रीम के चलते अमेरिका, रुस और यूरोप के कई हिस्सों में टॉर्नेडो (tornado) के रुप में भयानक चक्रवाती तूफान (temperate cyclones) आते हैं। तो वहीं भारत सहित कई देशों में हिमालय पर्वतों की श्रृखंला के चलते इन तूफानों का असर काफी कम रहता है। बावजूद इसके पश्चिम से आने वाली ठंडी हवाएं उत्तर भारत में भारी मात्रा में बर्फबारी, ओले और बारिश को बढ़ावा देती हैं, जिसे भारत में पश्चिमी डिस्टर्बेंस (western disturbance) के नाम से जाना जाता है।

Essay On Winter Season In Hindi
Essay On Winter Season In Hindi

भारत में अमूमन सर्दियों का आगाज नवम्बर के महीने से होता है। वहीं दक्षिण भारत के मुकाबले उत्तर भारत में सर्दी का कहर काफी ज्यादा रहता है। वहीं दुनिया की कई जगहें ठंड के कारण जम जाती हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा सर्द मौसम रुस के सायबरिया में देखने को मिलता है, जहां तापमान माइनस पच्चीस डिग्री तक रहता है। वहीं भारत में सबसे ज्यादा सर्दी कश्मीर के द्रास इलाके में पड़ती है।

हालांकि अब तक का सबसे ठंडा मौसम जुलाई 2011 में न्यूजीलैंड में देखने को मिला था। इस दौरान समुद्र से घिरा न्यूजीलैंड पूरी तरह से जम गया था। समुद्र का पानी बर्फ की सतह में तब्दील हो गया था और तापमान माइनस में चला गया था।

शीत ऋतु के पैर पसारने के साथ-साथ दिन छोटे और रात लम्बी होने लगती है। यह प्रक्रिया 25 दिसम्बर (winter solstice) तक चलती है। जिसके बाद दुनियाभर में 25 दिसम्बर को क्रिसमस दिवस (christmas day) के रुप में मनाया जाता है।

दिन लगा अब जल्दी जाने, रात लगी अब पैर फैलाने

सुबह-शाम को कोहरा छाए, हाथ-पैर सब लगे ठंडाने।

सांसें लगीं धुआं उड़ाने, धूप लगी अब सबको भाने

गर्म-गर्म चाय को पीकर, सभी लगे स्वयं को गरमाने।

शीत ऋतु लोगों को घरों में रहने के लिए मजबूर कर देती है। इस दौरान गांवों में आग के अलाव और शहरों में रुम हिटर आम हो जाता है। वहीं दुनिया के कई लोग घूमने के लिए शीत ऋतु का बेहद बेसब्री से इंतजार करते हैं।

शीत ऋतु के दौरान यूरोप पर्यटकों की पसंदीदा जगहों में से एक हैं। जहां स्वीटजरलैंड की वादियों का लुत्फ उठाने से लेकर अमेरिका के कैलिफोर्निया, नॉर्वे, स्वीडन, अर्जेंटीना, स्लोवानिया और तुर्फी में बर्फबारी का आनन्द लेने के लिए हर साल लाखों की तादाद में सैलानी आते हैं। मशहूर शायर ख्वाजा मीर कह गए हैं-

सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहां

ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहां

वहीं भारत में भी धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर के गुलमर्ग, सोनमर्ग, हिमाचल प्रदेश के शिमला, मनाली, कुल्लू, उत्तराखंड के औली, गढ़वाल, पौड़ी और उत्तर-पूर्व भारत के दार्जलिंग, सिक्किम, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में भारी संख्या में पर्यटकों का जमावड़ा लगता है।

शीत ऋतु में बर्फबारी का लुत्फ उठाने के अलावा कई सैलानी बर्फ में रोमांच करने का भी भरपूर आनन्द लेते हैं। इस दौरान पर्यटकों एक-दूसरे को बर्फ के गोले मारते हैं। साथ ही स्केटिंग, स्कींग, आइस हॉकी, स्नो बोर्डिंग, स्की जंपिंग, ब्रूम बॉल, अल्पाइन स्केटिंग, स्पीड स्केटिंग जैसे खेल पर्यटकों के बीच आम होते हैं।

भारत सहित दुनिया के कई देशों में शीत ऋतु का खासा महत्व है। शीत ऋतु के दौरान नवम्बर से फरवरी के बीच  दुनिया के कई देशों में अलग-अलग त्योहार मनाए जाते हैं। इसी कड़ी में सर्दी के मौसम में आइसलैंड में होने वाला लाइट महोत्सव, नीदरलैंड में मनाया जाने वाला फ्रोजन डेड दिवस, जापान में स्पैरो स्नो महोत्सव, वेनिस में आयोजित होने वाला कार्निवाल और चीन का स्नो स्कल्चर शीत ऋतु के मशहूर त्योहारों में से एक है।

भारत में भी सर्दियों के आगाज के साथ ही त्योहारों की शुरुआत हो जाती है। शारदीय नवरात्री से शुरु होकर त्योहारों की फेहरिस्त दशहरा, गणेश चतुर्थी, करवाचौथ, धनतेरस, दीपावली, विश्वकर्मा पूजा, गोवर्धन पूजा, भाईदूज, छठ, क्रिसमस दिवस, मकर सक्रांति, माघ स्नान, कुंभ मेला, लोहड़ी और वसंत पंचमी पर जाकर खत्म होती है।

वहीं शीत ऋतु के दौरान देश में स्थानीय स्तर पर भी गुजरात का पतंग महोत्सव, पंजाब में लेहड़ी, बंगाल में माघ बीहू, तमिलनाडू में पोंगल, बीकानेर में ऊंट महोत्सव, मनाली में विंटर कार्निवाल, जैसलमेर में रेगिस्तान महोत्सव, गोवा में कार्निवाल महोत्सव, गुजरात स्थित कच्छ के रण में आयोजित महोत्सव और राजस्थान में माउंट आबू महोत्सव जैसे मशहूर त्योहारों का आयोजन किया जाता है।

अमूमन शीत ऋतु के दौरान ज्यादातर गेंहू की खेती की जाती है। हालांकि कई जगहों पर मौसम के मुताबिक कुछ स्थानीय फसलें भी उगाई जाती हैं। इसी कड़ी में भारत में शीत ऋतु के दौरान गेहूं, ज्वार, बाजरा, मक्का, सोयाबीन जैसी फसलों के खेती होती है। वहीं सब्जियों में लैकी, गोभी, आलू, मटर, प्याज, गंजी, गाजर और लहसन धनिया जैसी फसलें उगाई जाती हैं।

इस दौरान कशमीर सहित ठंडी जगहों पर बारी मात्रा में सेब की पैदावार होती है। इसके अलावा काजू, बादाम, पिस्ता, खजूर, अखरोट और केसर जैसे ड्राई फ्रूट्स में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में पाए जाते हैं।

शीत ऋतु के दौरान जहां कई पशु-पक्षी अपने बसेरों में ठिठुरे बैठे रहते हैं, वहीं कुछ प्रवासी पक्षी दूर देशों से मीलों का सफर तय कर एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं। इसी कड़ी में भारत में भी कई प्रवासी पक्षी मसलन साइबेरियन क्रेन, ब्लू थ्रोट, ग्रेट वाइट पेलिकेन और एशियाटिक स्पैरो हॉक जैसे अनगिनत पक्षी चिलिका झील, कुल्लूरु झील और साम्भर झील जैसे वैटलैंडस पर आते हैं। इन पक्षियों का दीदार करने दूर-दूर से हजारों की संख्या में सैलानी आते हैं।

शीत ऋतु के विषय में कवियत्री निधी अग्रवाल लिखतीं हैं-

मौसम ने ली है अंगड़ाई,

आई देखो ठंडी है आई,

बंद हो गए पंखे सारे, निकल गयी सबकी रजाई।

पानी को छूने से लगने लगा है डर, ठंडी हवा से तन-मन हो जाता है सिहर,

बिन सूरज दादा के तो, आने लगती है कपकपाई।

इस मौसम में तो बस अच्छी लगती है, कॉफ़ी की चुस्की और चाय की गरमाई,

साथ अगर पकौड़ों का हो तो, हो जाता है अपना सुखदाई

Essay On Winter Season In Hindi FAQ


सर्दी कौन से महीने में होती है?

उत्तरी ध्रुव (northern hemisphere) में शीत ऋतु (winter season) दिसम्बर, जनवरी और फरवरी के महीने तक रहती है और दक्षिणी ध्रुव (southern hemisphere) में शीत ऋतु जून, जुलाई और अगस्त के महीने में आती है।

भारत में कौन कौन सी ऋतु है?

भारत में मुख्य रुप से छह ऋतुएं पायी जाती हैं- ग्रीष्म ऋतु (summer season), शरद ऋतु (autumn season), हेमंत ऋतु (pre winter season), शीत ऋतु (winter season), वसंत ऋतु (spring season) और वर्षा ऋतु (monsoon season)

सबसे ज्यादा सर्दी कौन से महीने में पढ़ती है?

शीत ऋतु साल के ठंडे महीनों में से एक होती है। उत्तरी ध्रुव (northern hemisphere) में साल का सबसे ठंडा महीना दिसम्बर और जनवरी होता है। 22 दिसम्बर (winter solstice) को साल का सबसे ठंडा दिन माना जाता है। वहीं दक्षिणी ध्रुव (southern hemisphere) में साल का सबसे ठंडा महीना जून होता है।

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