हेमंत ऋतु पर निबंध | Pre-Winter season Essay in Hindi | Hemant Season Essay in Hindi

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शीत ऋतु के पहले पड़ने वाली ऋतु को हेमंत ऋतु कहते हैं। धरती पर मुख्य रुप से छह ऋतुएं बेहद अहम मानी जाती हैं – ग्रीष्म काल, शीत काल, वसंत ऋतु, हेमंत ऋतु, वर्षा ऋतु और शरद ऋतु। जहां ग्रीष्म काल को गर्म मौसम और तपती धूप के लिए जाना जाता है, वहीं शीत काल ठंडी हवाओं, धुंध, कोहरा और कुछ जगहों पर बर्फबारी के लिए मशहूर है।

इसके अलावा वसंत ऋतु और शरद ऋतु, जिसे पतझड़ भी कहा जाता है, गर्मी और सर्दी के मध्य की ऋतुएं होती हैं, जिनमें गर्म और सर्द हवाओं का मिलाजुला रुप देखने को मिलता है। वहीं हेमंत ऋतु सर्दी के आगमन का संकेत देती है, तो वर्षा ऋतु मूलसलाधार बारिश के लिए जानी जाती है।

चाय की चुस्कियां लेती हो मजलिसे,

तन को बेचैन करती कोहरे ओढ़ें

आती सुबह शुष्क हवाओं संग,

कैसी कहर ये ठंड की पड़ी

जहां देखो दुबकी पड़ी है जिंदगी।

अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक हेमंत ऋतु का आगाज अक्टूबर के मध्य से दिसम्बर के महीने के मध्य तक  जाता है। वहीं हिन्दू पंचाग के अनुसार अगह्न और पूस के महीने में हेमंत ऋतु की शुरुआत होती है। वास्तव में ऋतुओं की शुरुआत और समाप्ति मुख्य रुप से सूर्य की गति पर निर्भर करता है।

जब सूरज धरती के उत्तरी ध्रुव (northern hemisphere) में होता है, तब उत्तरी ध्रुव में सूरज की उपस्थिति के कारण ग्रीष्म ऋतु और दक्षिणी ध्रुव (southern hemisphere) में सूर्य की अनउपस्थिति के चलते शीत ऋतु का वर्चस्व कायम रहता है।

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इसी कड़ी में 23 सितम्बर (equinox) को सूरज भूमध्य रेखा (equator) को पार कर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करता है और उत्तरी ध्रुव में शरद ऋतु के साथ शीत ऋतु का भी आगाज होता है। वहीं इसके ठीक विपरीत प्रक्रिया 21 मार्च (equinox) को सूर्य द्वारा पुनः भूमध्यरेखा करने पर होती है और दक्षिणी ध्रुव में शीत ऋतु की शुरुआत होती है।

हेमंत ऋतु पूर्ण रुप से शीत ऋतु के आगमन का ही संकेत देती है। वसंत ऋतु और शरद ऋतु के बाद हेमंत ऋतु साल के सबसे खूबसूरत दिनों में से एक है। इस दौरान मौसम में नमी रहती है। जहां सुबह और शाम के समय ठिठुरने वाली ठंड पड़ती है, तो दूसरी तरफ दिन में सूरज की तेज धूप भी काफी चुभती है। मशहूर कवि पंकज सिंह के शब्दों में-

धैर्य धरती का परखने

और सूखी हड्डियों में कंप भरने

हवाओं की तेज़ छुरियाँ लपलपाते

आ गए हैं

शरद के बादल

हेमंत ऋतु को शरद ऋतु और शीत ऋतु के मध्य का समयकाल माना जाता है। इस दौरान तापमान ज्यादातर सामान्य रहता है। चूंकि यह शीत काल के पहले का दौर है, तो हेमंत ऋतु में तापमान 10 डिग्री सेलसियस से 20 डिग्री सेलसिलयस के बीच ही रहता है। अमूमन हेमंत ऋतु के शुरुआत में पारा ज्यादा ही रहता है लेकिन इसके अंत तक शीत ऋतु के दस्तक देने के चलते पारे में भारी गिरावट दर्ज की जाती है।

हेमंत ऋतु के दौरान दिन छोटे और रात बड़ी होना शुरु हो जाती हैं। चांदनी रात की जगह कोहरा ले लेता है। वहीं शरद ऋतु में पत्तियां छोड़ चुके पेड़-पौधे फिर से हरे-भरे होकर रंग-बिरंगे फूलों की चादर ओढ़ लेते हैं। हेमंत ऋतु को फूलों की ऋतु भी कहा जाता है, क्योंकि यही वह समय है जब गुढ़हल, गुलाब, चमेली, बेला, जूही जैसे फूलों से पेड़ों की डालियां लद उठती हैं।

Pre-Winter season Essay in Hindi

हालांकि हेमंत ऋतु में मौसम का अचानक गर्मी से सर्दी में परिवर्तित होने के कारण इस दौरान खांसी, बुखार, जुकाम और फ्लू जैसी बिमारियां आम हो जाती हैं। तापमान जैसे-जैसे गिरना शुरु होता है, बिमारियों के वायरस दोगुनी गति में पैर फैलाने लग जाते हैं। यही कारण है हेमंत ऋतु और शीत ऋतु में खुजली जैसे विभिन्न चर्म रोगों की संख्या में भारी इजाफा होता है।

इसके अलावा हेमंत ऋतु में डेंड्रफ, बाल टूटना, थकान, आलस, शरीर में दर्द, खुजली, होठ फटना, पैर की एड़ियां फटना जैसी समस्याएं होनी शुरु हो जाती है। वहीं मौसम के अचानक करवट लेने के चलते मधुमेह और दिल के मरीजों को दिल का दौरा पड़ने की सम्भावना काफी हद तक बढ़ जाती है।

सिमट गयी फिर नदी, सिमटने में चमक आयी

गगन के बदन में फिर नयी एक दमक आयी

दीप कोजागरी बाले कि फिर आवें वियोगी सब

ढोलकों से उछाह और उमंग की गमक आयी

वहीं कुछ वैज्ञानिक शोधो के अनुसार, हेमंत ऋतु में लोगों का पाचन तंत्र एक-दम दुरुस्त रहता है। इसीलिए हेमंत ऋतु के आगाज के साथ ही एक तरफ त्योहारों की लम्बी लाइन लग जाती है, तो दूसरी तरफ हर घर में लजीज पकवानों की महक सीधा दिल पर दस्तक देती है।

हेमंत ऋतु में हिन्दू धर्म के कई महत्वपूर्ण त्योहार मसलन दशहरा, गणेश चतुर्थी, करवाचौथ, धनतेरस, दीपावली, विश्वकर्मा पूजा, गोवर्धन पूजा, भाईदूज और प्रमुख रुप से बिहार में छठ का पर्व बेहद धूम-धाम से मनाया जाता है।

इस त्योहारों के दौरान घरों में कई स्वादिष्ट पकवान परोसे जाते हैं। वहीं मीठे में गुड़ की गजक, तिल के लड्डू, मेवों की मिठाईयां और सेव जैसे मिष्ठान बांटे जाते हैं। इसी कड़ी में शीत ऋतु के करीब आने के साथ-साथ उत्तर भारत के ज्यादातर घरों में सरसों के साग और बाटी चोखा का जमकर लुत्फ उठाया जाता है।

सुबह सूरज आकर, धूप की चादर खोले

जाड़ा पंजों के बल चलता, अपनी राह को होले।

धूप की गर्मी में सिक जाएं, घर के कोने खुदरे

एड़ी तलवों और उंगलियों, की हालत भी सुधरे।

लेकिन वहीं प्राकृतिक प्रेमियों के लिए हेमंत ऋतु किसी वरदान से कम नहीं है। ठंडी हवाएं, हर तरफ फैली हरियाली, सूरज की सुनहरी धूप इस ऋतु की सुंदरता में चार चांद लगा देती है। इसी दौरान देश के कई कोनों में स्थानीय पर्व भी मनाए जाते हैं।

स्थानीय त्योहारों की इस फेहरिस्त में बीकानेर में होने वाला ऊंट महोत्सव, मनाली में विंटर कार्निवाल, जैसलमेर में रेगिस्तान महोत्सव, गोवा में कार्निवाल महोत्सव, गुजरात स्थित कच्छ के रण में आयोजित महोत्सव और राजस्थान में माउंट आबू महोत्सव जैसे मशहूर त्योहार शामिल हैं।

हेमंत ऋतु के दस्तक देते ही तक शीत ऋतु के आगमन का संकेत पाकर जहां कुछ पशु-पक्षी अपने बसेरों में भोजन एकत्रित करना शुरु कर देते हैं, वहीं कुछ प्रवासी पक्षी दूर देशों से मीलों का सफर तय कर एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं।

इसी कड़ी में भारत में भी कई प्रवासी पक्षी मसलन साइबेरियन क्रेन, ब्लू थ्रोट, ग्रेट वाइट पेलिकेन और एशियाटिक स्पैरो हॉक जैसे अनगिनत पक्षी चिलिका झील, कुल्लूरु झील और साम्भर झील जैसे वैटलैंडस पर आते हैं। इन पक्षियों का दीदार करने दूर-दूर से हजारों की संख्या में सैलानी आते हैं। जमील मलिक के शब्दों में-

यूं तो घर ही में सिमट आई है दुनिया सारी

हो मयस्सर तो कभी घूम के दुनिया देखो

माना जाता है कि भारत भ्रमण के लिए हेमंत ऋतु सबसे बेहतरीन ऋतुओं में से एक है। यही कारण है कि घुमक्कड़ प्रवृति के लोग हेमंत ऋतु में दुनिया के कई कोनों का लुत्फ उठाने चल पड़ते हैं। हिमालय की गोंद में बसे हिल स्टेशन से लेकर गोवा के बीच तक हर तरफ पर्यटकों की भीड़ होती है।

हेमंत ऋतु के दौरान जहां शिमला, मनाली, मसूरी और कूल्लू जैसे हिल स्टेशनों पर बड़ी संख्या में सैलानियों का जमावड़ा लगता है, वहीं उत्तर-पूर्व भारत में चैरी ब्लॉस्मस का अद्भुत अनुभव लेने और असम के अंबुचाची मेले से लेकर सिक्किम महोत्सव, नागांलैंड के हॉर्नबिल महोत्सव तक का आनन्द लेने लाखों की तादाद में पर्यटक एकत्रित होते हैं।

Pre-Winter season Essay in Hindi FAQ


शीत ऋतु और शरद ऋतु में अंतर

हेमंत ऋतु (pre winter season), शरद ऋतु (autumn season) और शीत ऋतु (winter season) के बीच का समय होता है। हेमंत ऋतु शीत ऋतु से कम ठंडी होती है। जहां शीत ऋतु में तापमान बेहद कम हो जाता है, वहीं हेमंत ऋतु में औसत तापमान 27 डिग्री सेलसियस तक रहता है।

भारत वर्ष में कितनी ऋतु होती है?

भारत के चार प्रमुख ऋतुएं हैं- ग्रीष्म ऋतु (summer season), शीत ऋतु (winter season), वसंत ऋतु (spring season) और शरद ऋतु (autumn season) हैं। इसके अलावा वर्षा ऋतु (monsoon season) और हेमंत ऋतु (pre winter season) को मिलाकर कुल छह ऋतुएं भारत में होती हैं।

ठंड का मौसम कब से शुरू होता है

भारत में शीत ऋतु की शुरुआत हेमंत ऋतु के बाद दिसम्बर के महीने से होती है। शीत ऋतु मुख्य रुप से दिसम्बर और जनवरी के महीने में रहती है, जिस दौरान भारतीय उपमहाद्वीप में कड़ी ठंडी पड़ती है।

हेमंत ऋतु विशेष

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