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World Heritage Taj Mahal- विश्व विरासत ताजमहल

किसी भी भारतीय के मन में सबसे पहले ताजमहल का नाम आता है, जब भी वह आगरा का नाम सुनता है। वहीं किसी भी विदेशी पर्यटक के लिए ताजमहल वह पहली इमारत है, जिसे वो घूमना चाहता है। और ऐसा होना जायज़ भी है। दुनिया के सात आश्चर्यजनक अजूबों में से एक और यूनेस्को की विश्व विरासत की सूची में इसका नाम दर्ज होना सब कुछ बयां करता है।

मुझें नहीं लगता कि ताजमहल को किसी प्रकार के परिचय की आवश्यकता है। इसकी सौंदर्यता को इसी बात से समझा जा सकता है कि विश्व के कई देशों के राष्ट्रों के अध्यक्षों के साथ साथ फिल्म, खेल और अन्य जगत के जाने माने लोग नहीं खुद को इसके साक्षी बनने से नहीं रोक सके। आज यह भारत का ही नहीं बल्कि विश्व पर्यटकों के बीच एक लोकप्रिय इमारत है।

Excellent architecture- उत्कृष्ट वास्तुकला

शाहजहां के समय में मुगल वास्तुकला अपने चरम सीमा पर थी। शाहजहां वो शासक थे, जिन्होंने अपने शासन काल में ना जाने कितने ही इमारतों का निर्माण करवाया। उनमें से एक सबसे बेहतरीन उदाहरण ताजमहल है। इसका निर्माण कार्य सन् 1631 से शुरू किया गया। हालांकि ढांचे का निर्माण 1643 में पूर्ण हो गया था लेकिन आगे के दस साल इसको निखारने में लगा दिया गया। और अंततः सन् 1653 में यह पूर्ण रूप से तैयार हो गया।

अगर मुगल वास्तुकला में बने सभी इमारतों को देखा जाए तो यह इमारत सूची के सबसे ऊपर आयेगी। यह निःसंदेह मुगल वास्तुशिल्प का नायाब नमूना है। लगभग 22000 मजदूरों और 1000 हाथियों ने इसके निर्माण में सहायक बनीं। आपको यकीन नहीं होगा लेकिन उस समय में इसकी बनावट की कुल लागत 32 मिलियन रूपए आई, जो भारतीय रुपयों के 1.4 अरब के बराबर है।

Dome- गुंबद

सबसे शानदार इसका गुंबद है जो मकबरे का विस्तार करता है। गुंबद की लंबाई लगभग 35 मीटर (115 फीट) ऊंचा है जो आधार की लंबाई के माप के करीब है, और बेलनाकार है। इसके ऐसे आकार के कारण, गुंबद को अक्सर एक प्याज गुंबद या अमरूद (अमरूद गुंबद) कहा जाता है। इसके शीर्ष पर एक चांद के आकर की आकृति है जो इस्लामिक धर्म में महत्व का प्रतीक है। इसमें कुल चार मीनारें है, प्रत्येक 40 मीटर (130 फीट) से अधिक ऊँची हैं, इसके चारों मीनार मुख्य इमारत को एक मनमोहक रूप प्रदान करते हैं। देखने मात्र से ही कोई भी भव्यता का अंदाज़ा लगा सकता है।

External appearance- बाहरी स्वरूप

पूरी इमारत सफेद संगमरमर से निर्मित है, जिसको राजस्थान के मकराना से आयात किया गया था। ये संगमरमर आज भी पूरे देश में प्रचलित है। यमुना नदी के किनारे पर एक 50 मीटर ऊंचाई वाले चौकोर आकृति पर इसकी संरचना की गई है। मुख्य कब्र के प्रवेश द्वार धनुष के आकार का है, जिसके दो तरफ दो समान आकर के मेहराब द्वार है। इसको “पिशाक” कहा जाता है।

Internal form- आंतरिक स्वरूप

द्वार से अंदर प्रवेश करते ही एक अष्टकोणीय कक्ष है, जिसमें सजावट छिद्रों द्वारा किया गया है। इसके केन्द्र में शाहजहां और मुमताज के पार्थिव शरीर को दफन किया गया था। मुख्य रूप सी इसका निर्माण मुमताज महल के कब्रगाह के रूप में की गई थी परन्तु बाद में शाहजहां ने भी खुद को मुमताज महल के साथ दफनाए जाने की इच्छा जताई जिसके फलस्वरूप उनको ठीक मुमताज के बगल में दफन किया गया। शाहजहां की कब्र पर लिखा है –

“उसने हिजरी के 1076 साल में रज्जब के महीने की छब्बीसवीं तिथि को इस संसार से नित्यता के प्रांगण की यात्रा की।”

Mughal Bagh- मुगल बाग

ताजमहल परिसर के चारो तरफ एक चौकोर बगीचा है जिसको चारबाग़ के नाम से जाना जाता है। यह कुल 300 वर्ग मीटर में फैला हुआ है, जिसकी सुंदरता देखते ही बनती है। ताजमहल के बिल्कुल सामने एक फव्वारों वाला छोटा तालाब सा है, जिसमें जब ताज की प्रतिबिंब पड़ती है तो यह इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करती है। अगर आप मुगलों द्वारा बनवाए गए किसी भी बाग को देखेंगे तो सबसे एक चीज सामान्य होगी, एक चौकोर बाग और केन्द्र में कोई मक़बरा या इमारत। पर यहां ऐसा नहीं है, यहां इमारत बाग के आखिरी हिस्से में है।

बाग के मदर तमाम किस्म के पेड़ पौधे और भांति – भांति के फूल लगे हुए है। इस बगीचे के रखरखाव में कई कर्मी और माली तैनात है, जो इसकी सुंदरता को कभी कम नहीं होने देते।

Other buildings- अन्य इमारतें

ताजमहल तीन तरफ से बड़े बड़े सुरक्षा दीवारों रूपी इमारतों से ढका हुआ है और इसके चौथे तरफ यमुना नदी का किनारा है। इसके सामने वाली इमारत मुख्य द्वार या दरवाज़ा है, जो लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित है। ये द्वार अत्यंत विशाल है और जैसे ही आप इसके करीब जायेंगे आपको बहुत ही बारीकी से की गई कारीगरी दिखेगी। नमाज़ के दौरान पढ़े जाने वाली आयतें यहां उकेरी गईं है।

ताजमहल के पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में दो इमारतें है जो दिखने में बिल्कुल एक दूसरे जैसी हैं। ये दोनों भी लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बने हुए है। पूर्वी हिस्से वाली इमारत को जवाब कहते हैं जिसका उपयोग आगंतुक कक्ष के रूप में की जाती है। पश्चिमी हिस्से में बनी इमारत एक मस्जिद है, और इसमें एक मेहराब कम है। हर शुक्रवार के दिन काफी मात्रा में मुस्लिम लोग यहां नमाज अदा करने आते है।

ताजमहल को प्रेम की निशानी के तौर पर देखा जाता है। शाहजहां अपनी बेगम मुमताज महल से बहुत प्रेम करते थे, उनको उनसे बहुत अधिक लगाव था। 14 वें बच्चे को जन्म देने के उपरांत ही मुमताज की मृत्यु हो गई। इससे बादशाह शाहजहां बहुत आहत हुए और उन्होंने उनकी याद में एक इमारत बनवाने का प्रण लिया। उनके इसी प्रण को आज हम ताजमहल के रूप में देखते हैं।

ताजमहल के निर्माण पूर्ण होने के पश्चात शाहजहां के पुत्र औरंगजेब ने उन्हें पद से हटा दिया और स्वयं बादशाह बन गया। उसने अपने पिता को ताजमहल के समाने निर्मित आगरा किले में नजरबंद कर दिया और उनके मृत्यु के पश्चात ताजमहल में उनको भी दफन करवा दिया।

एक अन्य बात कहीं जाती है कि ताज के निर्माण में सहयोग देने वाले सभी मजदूरों और कारीगरों के हाथ काट दिए गए थे, ताकि वे इस तरह किसी अन्य इमारत का निर्माण ना कर सकें। इस बात का कोई साक्ष्य नहीं मिलता है।

A major tourist destination- एक प्रमुख पर्यटन स्थल

यह देश का एकमात्र पर्यटन स्थल है, जहां प्रत्येक वर्ष 20 से 40 लाख पर्यटक आते है और इसमें से 2 लाख तो विदेशी पर्यटक होते है। सात अजूबों की सूची के लिए विदेश के कई इमारतों के साथ इसके लिए भी वोट डाले गए थे और 10 करोड़ मतों के साथ इसमें सूची में अपनी जगह बनाई।

यहां सिर्फ पानी की बोतल, कैमरा, मोबाइल और महिलाओं के बटुए को ले जाने की अनुमति है। बाकी सभी चीज़े पूर्णतया प्रतिबंधित हैं।

Tickets and times- टिकट और समय

ताजमहल सूर्योदय के आधे घंटे बाद खुलता और सूर्यास्त से आधा घंटा पहले बंद होता है।

टिकट भारतीय पर्यटक – ₹50 (₹200 अतिरिक्त मुख्य कब्रगाह के लिए)।

टिकट विदेशी पर्यटक – ₹1100 (₹200 अतिरिक्त मुख्य कब्रगाह के लिए)।

इसके पूर्वी और पश्चिमी गेट के पास से टिकट खरीदा जा सकता है। आप चाहें तो ऑनलाइन भी टिकट की खरीददारी कर सकते हैं।

Some key information- कुछ मुख्य जानकारी

  • टूर गाइड आसानी से उपलब्ध है।
  • इसके 500 मीटर की दूरी में किसी वाहन की अनुमति नहीं है। पार्किंग से आप बैटरी बस या गोल्फ कार्ट ले सकते हैं।
  • कृपया परिसर को साफ रखने में मदद करें।
  • अंदर एक संग्रहालय है, जिसमें प्रवेश निःशुल्क है।
  • हर महीने के पूर्णिमा के दिन, चांद की दूधिया रोशनी में भी ताज को देखा जा सकता है, उसके लिए आपको टिकट के लिए पहले आवेदन करना होता है। (भारतीय – 510, विदेशी – ₹750)

Where to stay?- कहां ठहरें?

आगरा एक ऐतिहासिक शहर और मुख्य पर्यटन केंद्र है। यहां देश विदेश से बहुत अधिक संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते है। आगरा में सस्ते हॉस्टल से लेकर मंहगे पांच सितारा होटल तक है। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार रुकने की जगह का चयन कर सकता है।

कैसे पहुंचे?- How to reach

सड़क मार्ग द्वारा

दिल्ली – आगरा रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग से देश के कोने कोने से संपर्क में है। यहां कुल तीन मुख्य बस अड्डे हैं – अंतर्राज्यीय बस टर्मिनस (आईएसबीटी) और इदगाह बस स्टैंड। राज्य परिवहन निगम की बसें लगातार संचालित होती हैं। प्राइवेट (निजी) भी  यहां पहुंचने के विकल्प हैं।

रेल मार्ग द्वारा

रेल नेटवर्क के माध्यम से दिल्ली सभी मुख्य और बड़े रेलवे स्टेशनों से जुड़ा हुआ है। यहां के पांच स्टेशन – आगरा कैंट रेलवे स्टेशन, आगरा किला रेलवे स्टेशन, राजा की मंडी, आगरा सिटी और इदगाह आगरा रेलवे स्टेशन है।

हवाई मार्ग द्वारा

आगरा पहुंचने का निकटतम हवाई अड्डा दिल्ली हवाई अड्डा है। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के ही नहीं बल्कि विश्व के तमाम शहरों से जुड़ा हुआ है।  सभी प्रमुख एयरलाइंस अपनी सेवाएं दिल्ली के लिए देती हैं। हवाई अड्डे से आप अपनी सुविधा के अनुसार टैक्सी, कैब, ट्रेन और बस आदि की सहायता से आगरा तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

Last word- अन्तिम शब्द

हर व्यक्ति को अपने जीवनकाल में एक बार इस ऐतिहासिक धरोहर का साक्षी अवश्य बनना चाहिए। जब आप इसको सामने से स्वयं देखा जाएगा, तब इसकी खूबसूरती का एहसास होगा। ताजमहल के ऊपर महान शायर कैफ़ी आज़मी जी की एक बड़ी ही मशहूर नज़्म है जिसकी कुछ पंक्तियां मैं पढ़ना चाहूंगा –

ये धड़कता हुआ गुम्बद में दिल-ए-शाहजहाँ

ये दर-ओ-बाम पे हँसता हुआ मलिका का शबाब

जगमगाता है हर इक तह से मज़ाक़-ए-तफ़रीक़

और तारीख़ उढ़ाती है मोहब्बत की नक़ाब

चाँदनी और ये महल आलम-ए-हैरत की क़सम

दूध की नहर में जिस तरह उबाल आ जाए

ऐसे सय्याह की नज़रों में खुपे क्या ये समाँ

जिस को फ़रहाद की क़िस्मत का ख़याल आ जाए

दोस्त मैं देख चुका ताज-महल

…..वापस चल ।

Reference

Written by Utkarsh Chaturvedi

नमस्कार, मेरा नाम उत्कर्ष चतुर्वेदी है। मैं एक कहानीकार और हिंदी कंटेंट राइटर हूँ। मैं स्वतंत्र फिल्म निर्माता के रूप में भी काम कर रहा हूँ। मेरी शुरुवाती शिक्षा उत्तर प्रदेश के आगरा में हुई है और उसके बाद मैं दिल्ली आ गया। यहां से मैं अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहा हूँ और साथ ही में कंटेंट राइटर के तौर पर काम भी कर रहा हूँ।

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