Y S Jagan Mohan Reddy – (Chief Minister of Andhra Pradesh)

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पिछली दो शताब्दियों से देश का नेतृत्व कर ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का हिस्सा बनना किसी के लिए भी फक्र की बात होती है। खासकर ऐसे समय में जब एक प्रख्यात पार्टी होने के साथ-साथ देश की बागडोर भी कांग्रेस के हाथों में हो। ऐसे में भारतीय राजनीति की एक शख्सियत जिसने न सिर्फ कांग्रेस का दामन छोड़ कर अपना एक अलग अस्तित्व स्थापित करने की राह चुनी बल्कि एक अलग मुकाम बनाने में कामयाब भी रहे।

उन्होंने अपने गृह राज्य आंध्र प्रदेश में क्षेत्रिय पार्टी की नींव रखी और महज कुछ ही सालों में बतौर मुख्यमंत्री न सिर्फ राज्य की राजनीति बल्कि देश की सियासत में एक मशहूर हस्ती बन कर उभरे। आंध्र प्रदेश की कमान संभाल कर समूचे देश की सियासत में अपनी खास छाप छोड़ने वाली उस शख्सियत का नाम है येदुगूरी संदिंटि जगन्मोहन रेड्डी (y s jagan mohan reddy biography)

नाम (name)वाई.एस.जगन्मोहन रेड्डी
जन्म तिथि (birthday) 21 दिसंबर 1972
जन्म स्थान (Place)कड्डप्पा, आंध्र प्रदेश
आयु (age)48
पिता (father) वाई.एस.राजशेखर रेड्डी
माता (mother)वाई.एस.विजयाम्मा
पत्नी (wife)भारती रेड्डी
बहन (sister) वाई.एस.शर्मीला रेड्डी
राजनीतिक पार्टी (party) युवाजना श्रामिका रैतु कांग्रेस पार्टी (YSRCP)
y s jagan mohan reddy

y s jagan mohan reddy family निजी जिंदगी

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येदुगूरी संदिंटि जगन्मोहन रेड्डी(y s jaganmohanreddy full name) का जन्म 21 दिसंबर 1972 को आंध्र प्रदेश के कड्डप्पा जिले में हुआ था। उनकी माता वाई.एस.विजयाम्मा और पिता वाई.एस.राजशेखर रेड्डी आंध्र प्रदेश की नामचीन राजनीतिक शख्सियतों में से एक हैं।

जगन्मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। जिसके बाद उन्होंने कॉमर्स विषय में स्नातक(y s jaganmohanreddy educational qualification)की डिग्री हासिल की।

ईसाई परिवार(y s jaganmohanreddy religion) से ताल्लुक रखने वाले जगन्मोहन रेड्डी 28 अगस्त 1996 को भारती रेड्डी के साथ शादी के बंधन में बंधे(y s jaganmohanreddy marriage)। जगन्मोहन और भारती रेड्डी की दो बेटियां(y s jaganmohanreddy daughter) हैं। वहीं उनकी बहन वाई.एस.शर्मीला रेड्डी भी एक मशहूर राजनीतिक हस्ती हैं।

Y S Jagann mohan Reddy का राजनीतिक जीवन

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जगन्मोहन रेड्डी के पिता राजशेखर जगन्मोहन रेड्डी ने सिर्फ आंध्र प्रदेश(y s jagan mohan reddy andhra pradesh) की सियासत के कद्दावर नेता थे बल्कि दो बार राज्य के मुख्यमंत्री भी रह चुके थे। राजशेखर रेड्डी ने बतौर मुख्यमंत्री साल 2004 से 2009 तक राज्य की कमान संभाली।

यही वो दौर था जब जगन्मोहन रेड्डी भी सियासी गलियों से रूबरू हो रहे थे। 2004 में ही जगन्मोहन रेड्डी ने कांग्रेस का प्रचार करना शुरू कर दिया था। दरअसल साल 2004 के लोकसभा चुनावों में जगन्मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के कड्डप्पा जिले में कांग्रेस के चुनाव प्रचार की अगुवायी की।

साल 2009 तक जगन्मोहन रेड्डी आंध्र की राजनीति में एक जानी-मानी हस्ती बन चुके थे। यही कारण था कि इसी साल होने वाले आम चुनावों(y s jagan mohan reddy election) में उन्होंने कड्डप्पा जिले से ही जीत हासिल की और कांग्रेस पार्टी से ही बतौर सासंद संसद में दस्तक दी।

वाई. एस. राजशेखर रेड्डी का निधन

साल 2009 में जगन्मोहन रेड्डी सासंद चुने जाने का जश्न मना ही रहे थे कि कुछ ही दिनों बाद उनके पिता और आंध्र प्रदेश तात्कालीन मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया।

जाहिर है मुख्यमंत्री की मृत्यु के बाद गद्दी के अगले वारिस की तलाश शुरू हो चुकी थी। इसी दौरान पार्टी के कुछ नेताओं ने जगन्मोहन रेड्डी का नाम आगे रखा। उस समय तक जगन्मोहन रेड्डी भी राज्य की एक प्रख्यात राजनीतिक शख्सियत बन चुके थे, जिसके चलते पार्टी ने उन्हें समर्थन भी दे दिया था।

मगर, अभी कांग्रेस हाईकमान की मुहर लगनी बाकी थी और आखिर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी सचिव राहुल गांधी ने जगन्मोहन रेड्डी के मुख्यमंत्री बनने से एतराज जताया। जिसके बाद के. रोसैया को राज्य का नया मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया गया।

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जगन्मोहन रेड्डी की ओदर्पू यात्रा (y s jagan mohan reddy rally)

जगन्मोहन रेड्डी ने पिता की मृत्यु के छह महीने बाद ही आंध्र प्रदेश में ओदर्पू यात्रा का शंखनाद कर दिया। इस यात्रा के दौरान जगन्मोहन रेड्डी ने हर उस शख्स के घर का दौरा किया, जिन परिवारों को राजश्खर रेड्डी की मौत का गहरा सदमा लगा था।

दरअसल राजशेखर रेड्डी आंध्र की सियासत के कद्दावर नेता थे। ऐसे में उनकी अचानक मौत की खबर सुन कर कुछ लोग बिमार पड़ गए तो कुछ ने सदमे में जिंदगी का ही साथ छोड़ दिया।

इसी कड़ी में जगन्मोहन रेड्डी की ओदर्पू यात्रा ने सत्ता के गलियारों में जमकर सूर्खियां बटोरी, लेकिन यात्रा के बीच में ही केंद्र में बैठी कांग्रेस सरकार ने जगन्मोहन रेड्डी के नाम यात्रा रोकने का फरमान सुना दिया। हालांकि जगन्मोहन रेड्डी ने इसे निजी मसला करार देते हुए यात्रा जारी रखी।

जगन्मोहन रेड्डी ने छोड़ा कांग्रेस का साथ (y s jagan mohan reddy vs congress)

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वाई.एस.राजशेखर रेड्डी की मौत के बाद से ही जगन्मोहन रेड्डी और कांग्रेस के बीच तल्खी की सुगबुगाहटें जोर पकड़ रही थी और 29 नवंबर 2010 में इन अफवाहों पर उस वक्त विराम लग गया जब जगन्मोहन रेड्डी ने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया।

इस्तीफे के महज कुछ ही दिनों बाद 7 दिसंबर 2010 को उन्होंने 45 दिनों के भीतर नई पार्टी के गठन की घोषणा कर दी।

YSR कांग्रेस का गठन (y s jagan mohan reddy ysr party)

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जगन्मोहन रेड्डी ने मार्च 2011 में अपने वादे को अमली जामा पहनाते हुए पूर्वी गोदावरी जिले में युवाजना श्रामिका रैतु कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के रूप में नई पार्टी के नाम की घोषणा की।

जगन्मोहन रेड्डी द्वारा नई पार्टी के गठन के फैसले पर जनता ने भी बहुत जल्द मुहर लगा दी। महज कुछ ही दिनों बाद कड्डप्पा जिले में हुए उपचुनावों में जगन्मोहन रेड्डी ने 545,043 वोटों के साथ जीत का परचम लहराया।

जगन्मोहन रेड्डी पर अवैध संपत्ति रखने का आरोप (y s jagan mohan reddy vs cbi)

साल 2012 में आंध्र प्रदेश के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी के बेटे जगन्मोहन रेड्डी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा। केंद्रीय जांच एंजेसी (CBI) ने जगन्मोहन रेड्डी पर 1,172 करोड़ रुपए की अवैध रकम लेने और बदले में राज्य सरकार द्वारा जमीन, खादानों की खुदाई जैसी अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देने का चार्ज लगाया।

27 मई 2012 को CBI ने जगन्मोहन रेड्डी को गिररफ्तार कर लिया और 28 मई को उन्हें 14 दिनों के लिए रिमांड पर भेज दिया गया। इस गिरफ्तारी के बाद केस की जांच जारी रही और जगन्मोहन रेड्डी को 16 महीनों तक जेल में रहना पड़ा।

हालंकि इस दौरान उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में तीन बार अपील की लेकिन उनकी तीनों अपील खारिज कर दी गयी। नतीजनत 16 महीनों बाद ही जगन्मोहन रेड्डी को जमानत मिली और वो जेल से रिहा हो सके।

आंध्र प्रदेश के मंत्रियों पर लगी जांच की आंच

मार्च 2012 में आंध्र प्रदेश की सरकार उस समय सवालों के कठघरे में आ गयी, जब राज्य सरकार के छह बड़े मंत्रियों और आठ अधिकारियों को भी भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।

आंध्र के सियासी भूचाल पर बेहद करीब से नजर रखती भारतीय जनता पार्टी ने जगन्मोहन रेड्डी की गिरफ्तारी की मुखालफत की। बीजेपी ने सवाल उठाया कि, एक जैसे जुर्म होने के बाद भी CBI ने कांग्रेस नेताओं और जगन्मोहन रेड्डी के बीच में भेदभाव किया है।

इसके साथ ही बीजेपी ने कांग्रेस समर्थक सुशील कुमार शिंदे और विलासराव देशमुख पर भी भ्रष्टाचार का आरोप होते हुए सख्त कार्यवाही न करने के लिए भी CBI को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया।

तेलंगाना के विरोध में जगन्मोहन रेड्डी (y. s. jagan mohan reddy jail)

भ्रष्टाचार के केस में जेल की सलाखों के पीछे होने के बावजूद जगन्मोहन रेड्डी बाहरी दुनिया की सारी जानकारी रखते थे, खासकर अपने गृह राज्य आंध्र प्रदेश की।

यह वही दौर था, जब आंध्र प्रदेश में तेंलगाना के रूप में अलग राज्य की मांग जोर पकड़ रही थी और केंद्र की तरफ से हरी झंडी मिलने की सुगबुगाहटें तेज हो रहीं थी। इसी बीच जगन्मोहन रेड्डी तक भी यह खबर पहुंच चुकी थी और आंध्र प्रदेश के मशहूर सासंद जगन्मोहन रेड्डी राज्य के बंटवारे के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठ गए।

जगन्मोहन रेड्डी का साथ देते हुए उनकी मां और राज्य की सांसद विजयाम्मा ने भी भूख हड़ताल शुरू कर दी। हालांकि इसी बीच जगन्मोहन रेड्डी की तबीयत बिगड़ गयी। 125 घंटे की हड़ताल के बाद लो ब्लड प्रेशर और शुगर कम होने के चलते जगन्मोहन रेड्डी को ओस्मानिया जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जेल से रिहा होने के बाद जगन्मोहन रेड्डी ने राज्य में 72 घंटे का बंद बुलाया और इसी के साथ तेंलगाना के गठन का विरोध करते हुए जगन्मोहन रेड्डी और विजयम्मा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

2014 के विधानसभा चुनावों में YSR का प्रदर्शन (YSR 2014 election)

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साल 2014 में पूरे देश में विधानसभा चुनावों का आगाज हुआ। मतदान के पहले आंध्र प्रदेश में YSR की लहर के कयास लगाए जा रहे थे। कई राजनीतिक जानकारों ने YSR की जीत की भविष्यवाणी भी कर दी थी, लेकिन YSR ने महज 45 प्रतिशत वोट शेयर के साथ कुल 175 सीटों में से 67 सीटों पर ही जीत हासिल की।

वहीं तेलगु देशम पार्टी ने 47 फीसदी वोट शेयर के साथ राज्य में जीत का परचम लहराया और चंद्रबाबू नायडू को राज्य का मुख्यमंत्री चुना गया(y s jagan mohan reddy vs chandra babu naidu)

जगन्मोहन रेड्डी की पदयात्रा (y s jagan mohan reddy praja sankalpa yatra)

बेशक 2014 के आम चुनावों में जगन्मोहन रेड्डी सत्ता का हिस्सा न बन सके लेकिन आंध्र विधानसभा में बतौर विपक्षी नेता उन्होंने जमकर सूर्खिया बंटोरी।

इसी कड़ी में जगन्मोहन रेड्डी ने 7 नवंबर 2017 को प्रजा संकल्प यात्रा का बिगुल फूंक दिया। पदयात्रा के नाम से मशहूर इस यात्रा में जगन्मोहन रेड्डी ने 3,648 किलोमीटर का पैदल सफर तय किया।

इस पदयात्रा का नारा “रावाली जगन, कावाली जगन” आंध्र प्रदेश के लोगों के बीच आम हो चला था। इस नारे का मतलब था, जगन्मोहन रेड्डी की राज्य में वापसी। लिहाजा आंध्र के 13 जिलों से होते हुए 430 दिनों के बाद यह यात्रा 9 जनवरी 2019 को खत्म हुई।

जगन्मोहन रेड्डी – आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री (y s jagan mohan reddy chief minister)

2019 में जगन्मोहन रेड्डी की पदयात्रा खत्म होने के महज कुछ ही दिनों बाद राज्य विधानसभा चुनावों (y s jagan mohan reddy assembly)का एलान हुआ। चुनावों के आगाज के साथ जहां देश में मोदी लहर की गूंज थी, तो वहीं आंध्र में जगन लहर दस्तक दे चुकी थी।

अप्रैल-मई के महीने में राज्य में मतदान हुआ और इस बार परिणाम YSR के पक्ष में था। YSR ने राज्य में एतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 175 में 151 सीटों पर जीत हासिल की और साथ ही 2019 के आम चुनावों में भी YSR का ही बोलबाला रहा। आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभा सीटों में से 22 लोकसभी सीटें YSR के खाते में आ गयीं।

इसी के साथ 30 मई 2019 को जगन्मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर राज्य की बागडोर अपने हाथ में ले ली।

बिजनेसमैन के रूप में जगन्मोहन रेड्डी (y s jagan mohan reddy business)

राजनीति से परे जगन्मोहन रेड्डी एक बिजनेस मैन भी हैं। जगन्मोहन रेड्डी ‘साक्षी अखबार’ और ‘साक्षी टीवी’ के मालिक हैं, जो तेलगु भाषा(y s jagan mohan reddy telugu) में संचालित होता है। इसके अलावा जगन्मोहन रेड्डी भारती सीमेंट के चीफ प्रमोटर भी हैं।

Reference –
1 December 2020, biography of y s jagan mohan reddy, wikipdeia

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