भीष्म पितामह के जन्म की कथा | देवव्रत की कहानी | The story of the birth of Bhishma Pitamah | devvrat ki kahani in Hindi

भीष्म पितामह पांडवों के कौन थे, देवव्रत को शिक्षा किसने दी, भीष्म पितामह को कितने तीर लगे थे, देवव्रत पाठ के प्रश्न उत्तर, देवव्रत का नाम भीष्म कैसे पड़ा, devvrat ne kya pratigya ki, देवव्रत की भीष्म प्रतिज्ञा, भीष्म पितामह अर्जुन के कौन थे, The story of the birth of Bhishma Pitamah, Ganga and King Shantanu katha, facts of mahabharata


देवव्रत की कहानी | The story of the birth of Bhishma Pitamah

राजा शांतनु और गंगा के बेटे का नाम देव व्रत रखा गया देवव्रत के पैदा होते ही गंगा उसे साथ में लेकर शांतनु को छोड़कर चली गई थी। एक दिन शिकार खेलते समय शांतनु ने देखा कि किसी ने बाणो का बांध बनाकर गंगा की धारा रोक दी है।

वे बहुत चकित हुए। उनकी निगाह धनुष बाण लिए एक सुंदर बालक पर पड़ी। तभी अचानक नदी से गंगा निकलकर आई और बोली, “ हे राजन,  यह हमारा पुत्र देवव्रत है इसने  वेदों, शास्त्रों और युद्ध कला की शिक्षा पाई है। अब आप इसे अपने साथ ले जा सकते हैं।”

story of the birth of Bhishma Pitamah
story of the birth of Bhishma Pitamah

 शांतनु देवव्रत को अपने साथ ले आए और उसे हस्तिनापुर का युवराज बना दिया। कुछ ही दिनों में शाल्व के राजकुमार ने हस्तिनापुर पर हमला कर दिया। देवव्रत ने अपनी वीरता से उसे हरा दिया। शांतनु को अपने बेटे पर बहुत गर्व हुआ।

इसी देवव्रत ने शांतनु का विवाह सत्यवती से करवाने के लिए आजीवन अविवाहित रहने की भीषण प्रतिज्ञा की थी। जिसके बाद इसका नाम भीष्म पड़ा। भीष्म ने अंतिम समय तक अपने पिता के वंश की रक्षा की थी।

यहाँ पढ़ें : रविवार की कहानी
राजा रन्तिदेव की कथा
वीर ध्रुव की कहानी
शिवी राणा का महान बलिदान की कहानी
ब्रह्मा जी की कहानी

Bhishma Pitamah Ka Janm Kaise Hua | भीष्म पितामह का जन्म कैसे हुआ था | गंगा पुत्र भीष्म की कहानी |

story of the birth of Bhishma Pitamah

reference
story of the birth of Bhishma Pitamah

Leave a Comment