The Emperor’s New Clothes Story In Hindi | राजा के नए कपड़े की कहानी | Raja ke naye kapde Ki Kahani, Best Fairy Tale

राजा के नए कपड़े – Pariyon Ki Kahani | Story In Hindi | Hindi Fairy Tales | Emperor’s New Clothes

The Emperor’s New Clothes Story In Hindi

The Emperor’s New Clothes Story In Hindi | राजा के नए कपड़े की कहानी

बहुत समय पहले की बात है एक गांव में एक राजा रहता था। नए कपड़ों का बहुत शौक शौक था वह प्रतिदिन नए कपड़े पहनता था गांव वालों का कहना था कि वह हर घंटे अपने कपड़े बदलता रहता है। वह प्रजा की देखभाल करने की बजाय सारा धन अपने कपड़ों पर ही खर्च कर देता था। वह सिर्फ अपने कपड़ों के बारे में ही सोचा करता था।

The Emperor's New Clothes Story In Hindi
The Emperor’s New Clothes Story In Hindi

एक दिन वहां गांव में दो ठग दूसरे राज्य से आए। लोगों को उनका पहनावा समझ ही नहीं आ रहा था। अपने कपड़ों की इतनी तारीफ की कि गांव वाले उनके झांसे में आ गए उन्होंने लोगों को कहा हम लोग बहुत बड़े दर्जी हैं। यह कपड़े केवल उन्हीं लोगों को दिखाई देते हैं जो बुद्धिमान हैं। 

यह बात राजा तक पहुंच गई कि वह जादुई कपड़े बनाते हैं। उन कपड़ों को केवल बुद्धिमान लोग ही देखते हैं। कोई मूर्ख व्यक्ति नहीं देख सकता। राजा कपड़ों के शौकीन थे साथ ही उन्होंने सोचा कि इन कपड़ों के माध्यम से उन्हें यह भी पता चलेगा कि उनके मंत्रियों में से कौन बुद्धिमान है। 

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राजा ने ठगों को अपने महल में बुलवाया और अपने कपड़े बनाने के लिए बहुत सारा धन और रेशम के कपड़े भी दिए ठगों ने सारा धन और कपड़े अपने कमरे में मंगवाए। वह दोनों रात भर कपड़े बुनने का दिखावा करते और सारे रेशम के कपड़े अपने पास रख लेते। यह दोनों कई रातों तक कपड़े बनाने का दिखावा करते रहे। 

1 दिन राजा ने सोचा कि उन दोनों को काम करते-करते बहुत दिन हो गए ऐसा कैसे हो सकता है कि अभी तक कपड़े तैयार नहीं हुए। राजा ने अपने मंत्रियों को काम की प्रगति देखने के लिए उस कमरे में भेजा। मंत्रियों को कुछ दिखाई नहीं दिया पर भयभीत होकर उन्होंने राजा को कहा कि कपड़े बहुत सुंदर बन रहे हैं ताकि कोई उन्हें मूर्ख ना समझे।

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यह बात सुनकर  राजा बहुत उत्सुक हो गया और वह कपड़े देखने के लिए गया परंतु राजा को कुछ भी दिखाई नहीं दिया। उसने मन ही मन सोचा, “ क्या मैं मूर्ख हूं?” परंतु राजा ने भी भयभीत होकर सबसे यही कहा की कपड़े बहुत सुंदर बन रहे हैं।

 अगली सुबह राजा अपने मंत्रियों के साथ ठगों के कमरे में गए और जैसे ही वह कमरे में गए ठगों ने उन्हें ड्रामा करते हुए कपड़े उठा कर दिए और कहां, “महाराज, आपके कपड़े तैयार हैं।” सभी ने राजा को नए कपड़े पहनने के लिए कहा। 

ठगों ने कहा महाराज आप अपने कपड़े उतार दीजिए ताकि हम आपको नए लिबास पहना सके और सब इस तरह व्यवहार करने लगे कि राजा ने सच में नए कपड़े पहन लिए और सब उनकी तारीफ करने लगे। सभी ने राजा से नए कपड़े पहन कर राज्य में घूमने की प्रार्थना की एक मंत्री ने कहा राजा आपका रथ तैयार है।

मूर्ख कहलाने के भय से सभी शांत थे राजा  रथ पर बैठकर राज्य भ्रमण करने के लिए निकल पड़े। सभी गांव वाले भी इस भय से कि कोई उन्हें मूर्ख ना समझे राजा के कपड़ों की तारीफ करने लगे।

परंतु अभी एक बच्चे ने कहा था राजा ने तो कुछ भी नहीं पहना। बच्चे के पीछे सभी धीरे-धीरे बोलने लगे कि राजा ने तो कुछ भी नहीं पहना तभी उनमें से एक ने जोर से कहा कि राजा ने तो कुछ भी नहीं पहना है। और फिर सब यही बात बोलने लगे कि राजा ने तो कुछ भी नहीं पहना राजा को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई क्योंकि उसे पता था कि उसकी प्रजा सच कह रही है। कपड़ों के प्रति लगाव समाप्त हो गया था।

Reference-
10 May 2021, The Emperor’s New Clothes Story In Hindi, wikipedia

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