कौवे और उल्लू का युद्ध पंचतंत्र की कहानी | kauwa aur ullu ka yudh Panchtantra ki kahani in Hindi

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kauwa aur ullu ka yudh Panchtantra ki kahani

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कौवे और उल्लू का युद्ध पंचतंत्र की कहानी | kauwa aur ullu ka yudh Panchtantra ki kahani in Hindi

जंगल में एक विशाल बरगद के पेड़ पर कौवों का एक झुंड रहा करता था। पेड़ के पास एक गुफा थी। जहां उल्लूओ ने अपना घर बना लिया था। कौवो और उल्लूओ मैं लंबे समय से दुश्मनी चल रही थी। रात के अंधेरे में कौवे उल्लूओ को देख नहीं पाते थे। इसका फायदा उठाते हुए, उल्लू कौवो का शिकार करते थे।

कौवों के राजा ने अपने मंत्रियों से इस समस्या के बारे में चर्चा की। उनमें से कुछ ने राजा को अपने दुश्मन से डटकर मुकाबला करने की सलाह दी। कुछ ने बरगद का पेड़ छोड़ किसी नई जगह बस जाने की बात राजा के सामने रखी तो कुछ ने उल्लू के साथ समझौता करना ही एकमात्र उपाय बताया।

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इन सभी बातों ने राजा को भ्रमित कर दिया। तब राजा अपने सबसे पुराने मंत्री के पास विचार विमर्श करने पहुंचे। मंत्री ने राजा से कहा, “राजन, हम उल्लूओ जैसे शक्तिशाली दुश्मन से नहीं लड़ सकते, और ना ही हम उनसे शांति की उम्मीद कर सकते हैं। यदि हमें उनसे जीतना है तो हमें उनकी कोई कमजोरी ढूंढ कर उन्हें हराना होगा। यदि हमें सुरक्षित रहना है तो उन्हें हराना ही होगा।”

वृद्ध मंत्री ने राजा को अपनी योजना के बारे में बताया, “मुझे पूरा विश्वास है कि उल्लूओ ने हम पर नजर रखने के लिए जासूस छोड़े होंगे आपको मुझ पर सभी के सामने हमला करना होगा उसके बाद आप बाकी कौवों के साथ पहाड़ों पर आश्रय ले लें। वहां आप सभी सुरक्षित रहेंगे और वहां रहकर तब तक प्रतीक्षा करें जब तक यहां वापस आकर उल्लूओ को हराना संभव ना हो जाए। इस बीच मैं उल्लूओ से दोस्ती कर लूंगा। उनका विश्वास जीतकर उनके बीच रहूंगा और उनकी कमजोरी ढूंढ लूंगा।”

राजा ने वृद्ध मंत्री की योजना से सहमति जताई। राजा ने अपने कुछ मंत्रियों के साथ वृद्ध मंत्री पर हमला कर, उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। फिर कौवों का झुंड, पहाड़ों पर चला गया। जासूस उल्लूओ ने इस घटनाक्रम के बारे में उल्लूओं के राजा को जानकारी दी। उल्लूओं का राजा, बूढ़े कौवे को देखने आया।

बूढ़े कौवे ने उल्लूओ के राजा से कहा, “कौवों के जिस राजा ने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया है मैंने उसे बर्बाद करने की शपथ ली है। अगर आप मुझे आश्रय दे, तो मैं स्वस्थ होने के बाद आपको उनके निवास पर ले जाऊंगा।”

उल्लूओ ने बूढ़े कौवे की बात पर विश्वास करके उसे अपने पास आश्रय दे दिया। बूढ़े कौवे ने उल्लुओं के राजा की चापलूसी कर उनका विश्वास जीत लिया। फिर उसने घोषणा की, “महाराज, मैं आपकी उदारता के लिए आपका आभारी हूं। मैं दिन के समय गुफा के प्रवेश द्वार पर पहरेदारी करूंगा।”

उल्लूओ का राजा इस बात के लिए मान गया। वृद्ध कौवा गुफा के प्रवेश द्वार पर पहरा देने लगा। एक दिन, जब सभी उल्लू गुफा के भीतर सो रहे थे, वृद्ध कौवे ने ढेर सारे सूखे पत्ते इकट्ठे कर उन्हें गुफा के प्रवेश द्वार पर फैला दिया। फिर वहां पहाड़ पर अपने मित्र कौवों के पास गया। और कौवों से अपनी चोंच में दबाकर जलती लकड़ियों को लाने के लिए कहा।

कौवो ने जलती लकड़ी लाकर गुफा के प्रवेश द्वार पर बिखरे सूखे पत्तों पर गिरा दी। पत्तियां जलने लगी। भीषण आग और पत्तियों के धुएं की वजह से सभी उल्लू गुफा में ही मारे गए। कौवों ने उल्लुओं को परास्त कर दिया।

नैतिक शिक्षा :– हमें अपने शत्रुओं पर कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए।

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