छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – [Chhatrapati Shivaji Terminus – UNESCO World Heritage Site]

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जो भी यहां आया इसकी खूबसूरती का मोहताज हो गया,
सड़क पर सो कर भी यहां का सरताज हो गया…।

chhatrapati shivaji Maharaj terminus – देश का दिल कहे जाने वाले मुंबई शहर पर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है। चकाचौंध से भरी सरपट भागती मायानगरी देश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ सपनों का शहर भी मानी जाती है।

शायद ही कोई शख्स हो जो जिंदगी में एक बार मुंबई का दीदार करने की ख्वाहिश न रखता हो। कोई इस शहर में बसने का ख्वाब देखता है, तो कोई इसके हर कोने का जमकर लुत्फ उठाने को बेताब रहता है। यही कारण है कि मुंबई में देश-विदेश से हर दिन लाखों की संख्या में लोग आते-जाते रहते हैं।

वैसे तो मुंबई में घूमने के लिए टूरिस्ट स्पॉट्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन यहां मौजूद कई शानदार इमारतें इस शहर की पहचान हैं। इसी फेहरिस्त में एक नाम छत्रपति शिवाजी महराज टर्मिनस (CSMT) का भी शामिल है। CSMT को संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को ने साल 2004 में विश्व धरोहर के खिताब से नवाजा हैं।chhatrapati shivaji Maharaj terminus unesco world heritage site in india.

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What is Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus in Hindi?

यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलछत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस
स्थान मंबई
निर्माण समय 1878 – 1888
निर्माणकर्ताफ्रीड्रिक विलियम स्टेवेन्स
वास्तुकलाविक्टोरियन गोथिक स्थापत्य कला
Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – यात्रियों को अपनी सुंदरता से आकर्षित करता रेलवे स्टेशन

chhatrapati shivaji terminus history – छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस का इतिहास

विक्टोरिया टर्मिनस के नाम से मशहूर यह शानदार इमारत मुंबई शहर की पहचान है, जिसका निर्माण भारतीय प्रायद्वीप रेलवे के मुख्यालय के रूप में किया गया था।chhatrapati shivaji Maharaj terminus located

दरअसल ब्रिटिश हुकूमत के दौरान बंबई देश की तीन प्रमुख प्रेसिडेंसी – मंद्रास, बंगाल और बंबई में से एक था। वहीं पश्चिमी तट का हिस्सा होने के कारण सदियों से बंबई को देश कीआर्थिक राजधानी माना जाता रहा है। यही नहीं देश की पहली रेल भी इसी राज्य में दौड़ी थी।

इसी दौरान बंबई स्थित बोरी बंदर रेलवे स्टेशन शहर का मुख्य रेलवे स्टेशन हुआ करता था, जोकि रेल के साथ-साथ समुद्री व्यापार का केंद्र भी था। बदलते वक्त और बढ़ते व्यापार के साथ एक छोटे से रेलवे स्टेशन पर इतने बड़ा व्यापार को संभालना ब्रिटिश हुकूमत के सामने एक बड़ी चुनौती थी।

लिहाजा सरकार ने एक ऐसे रेलवे स्टेशन की नींव रखी, जो न सिर्फ व्यापार की जरूरतों पर खरा उतर सके बल्कि शहर की सबसे खूबसूरत इमारत बनकर भी उभरे। साथ ब्रिटिश सरकार ने इस इमारत को ब्रिटेन की महारानी क्वीन विक्टोरिया का नाम देने का एलान भी कर दिया।

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what is chhatrapatishivaji terminus – छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस का निर्माण

Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus
Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus

मंबई शहर को नए रेलवे स्टेशन की सौगात देने का दारोमदार ब्रिटिश वास्तुकला के जानकार फ्रीड्रिक विलियम स्टेवेन्स को सौंपा गया और फ्रीड्रिक के नेतृत्व में साल 1878 में विक्टोरिया टर्मिनस के निर्माण का आगाज किया गया। chhatrapati shivaji Maharaj terminus in mumbai

लगभग 10 सालों की कड़ी मेहनत के बाद 1887 में जब विक्टोरिया टर्मिनस बनकर तैयार हुआ, तो समूचे देश की नजर इसकी खूबसूरती की कायल हो गयी। दरअसल विक्टोरिया टर्मिनस उस दौर की पहली ऐसी इमारत थी, जिसे बनाने में इतना लम्बा समय लगा था।

इटैलियन-गोथिक वास्तुकला के साथ बेहद बारीकी से तराशा गया विक्टोरिया टर्मिनस जहां एक तरफ अपनी खूबसूरती के चलते सभी की जुबां पर था, वहीं इस टर्मिनस की तुलना लंदन के आलीशान स्टेशन सेंट पैनक्रॉस रेलवे स्टेशन से की जा रही थी, जो 1873 में ही बनकर तैयार हुआ था।

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chhatrapati shivaji Maharaj terminus city – गायब हुई महारानी विक्टोरिया की प्रतिमा

Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus
Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus

विक्टोरिया टर्मिनस के निर्माण के दौरान यहां पर क्वीन विक्टोरिया की एक बेहद खूबसूरत प्रतिमा को भी स्थापित किया गया था। यह मूर्ति इस टर्मिनस के बीच में लगी घड़ी के ठीक नीचे लगाई गई थी।

हालांकि आजादी के बाद भारत सरकार ने 1950 में नए संविधान के आगाज के साथ ही सभी सरकारी सम्पत्तियों से ब्रिटेन से संबंधित सभी प्रतिमाओं को हटाने का फरमान जारी कर दिया। इसी कड़ी में विक्टोरिया टर्मिनस में लगे क्वीन विक्टोरिया के पुतले को भी रानी बाग स्थांतरित कर दिया गया।

वहीं 1980 में सूचना का अधिकार के अंतर्गत प्रतिमा से संबंधित जानकारी मांगने पर पता चला कि क्वीन विक्टोरिया की प्रतिमा रानी बाग से गुम हो गई है।

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chhatrapati shivaji Maharaj terminus and victoria terminus -विक्टोरिया टर्मिनस से छत्रपति शिवाजी टर्मिनस तक

विक्टोरिया टर्मिनस का नाम कई बार बदला जा चुका है। दरअसल सबसे पहले 1853 में बोरी बंदर रेलवे स्टेशन के रूप में मुंबई के सबसे महत्वपूर्ण स्टेशन की नींव रखी गयी, जो भारतीय महाद्वीप रेलवे का मुख्यालय भी था।

जिसके बाद 1888 में स्टेशन के नवीनीकरण के बाद, ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के गोल्डन जुबली के अवसर पर ब्रिटिश शासन ने बोरी बंदर रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर विक्टोरिया टर्मिनस कर दिया।

वहीं 1996 में भारत सरकार ने विक्टोरिया टर्मिनस का नाम बदलकर मराठा शासक छत्रपति शिवाजी के नाम पर रखने का एलान किया और तभी से यह स्टेशन छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के नाम से मशहूर हो गया।

इसी कड़ी में साल 2016 में मोदी मंत्रीमंडल ने एक प्रस्ताव पास करते हुए इसे छत्रपति शिवाजी महराज टर्मिनस का नाम दिया गया। 2017 में महाराष्ट्र सरकार ने भी इस प्रस्ताव को हरी झंडी दिखा दी।

वर्तमान में यह स्टेशन विक्टोरिया टर्मिनस और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के नाम से मशहूर है, वहीं भारतीय रेलवे स्टेशन के औपचारिक नाम छत्रपति शिवाजी महराज टर्मिनस का ही इस्तेमाल करता है।

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chhatrapati shivaji Maharaj terminus mumbaiattack- विक्टोरिया टर्मिनस और मुंबई हमला

साल 2008 में आतंकवादी हमलों की दहशत से विक्टोरिया टर्मिनस भी अछूता नहीं रहा था। 26 नवम्बर की रात ठीक 9:30 बजे दो आतंकवादियों ने हाथ में AK-47 के साथ विक्टोरिया टर्मिनस के पैसेंजर हॉल में प्रवेश किया।

इससे पहले कि वहां मौजूद लोग कुछ समझ पाते दोनों दहशतगर्दों ने सभी लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरु कर दी। लगभग एक घंटे तक गोलियों की दड़दड़ाहट से गूंज रहे विक्टोरिया टर्मिनस में 10:45 पर सन्नाटा पसर गया।

26 दिसम्बर की रात लहूलुहान हुए विक्टोरिया टर्मिनस में कुल 58 लोगों की मौत हो गई ती, तो वहीं 104 लोग गंभीर रूप से घायल थे। इस फायरिंग के दौरान पुलिस ने एक आंतकवादी को मौत के घाट उतार दिया और दूसरे शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया। इस शख्स की शिनाख्त अजमल कसाब के रूप में की गई। कसाब को साल 2010 में फांसी की सजा सुनाई गई और 2012 में उसे फांसी दे दी गई।

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chhatrapati shivaji Maharaj terminus architecture – छत्रपति शिवाजी टर्मिनस की वास्तुकला

बाहर से किसी राजमहल की तरह दिखने वाली इस इमारत का दीदार आज भी बेहद शानदार नजर आता है।विक्टोरियन इटैलियन गोथिक और भारतीय शास्त्रीय वास्तुकला को खुद में समेटेइस इमारत पर लगे पत्थरों को बेहद बारीकी से तराशा गया है।

दरअसल विक्टोरिया टर्मिनस की छत और उनपर लगे नुकीले मेहराब भारतीय शास्त्रीय वास्तुकला को दर्शाते हैं, वहीं इसकी दीवारों पर लकड़ी की नक्काशी, टाइल्स की सजावट, लोहे और पीतल की रेलिंग तथा भव्य सीढ़ियां विक्टोरियान गोथिक स्थाप्तय कला का उदाहरण हैं।

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chhatrapati shivaji Maharaj terminus architecture – विक्टोरिया टर्मिनस का भव्य गुंबज

19वीं शताब्दी में बना विक्टोरिया टर्मिनस उस दौर की उन्नत संरचना और तकनीकि समावेश का बेहतरीन उदाहरण है। इसके ठीक बीच में एक भव्य गुंबज मौजूद है, जो 330 फीट के प्लेटफार्म को आपस में जोड़ता है।

विक्टोरिया टर्मिनस के भीतर कई बड़े-बड़े कमरे भी मौजदू हैं। जहां इस इमारत का आकार हर दिशा में एक जैसा ही है, वहीं बीच में स्थित भव्य गुंबज इसका केंद्र बिंदु प्रतीत होता है। अष्टकोणीय संरचना के रूप में उपस्थित इस गुंबज में एक महिला की विशाल प्रतिमा विद्यमान है, जिसके दाहिने हाथ में मशाल और बाएं हाथ में पहिया है। जिसके कारण इस महिला को प्रगति का प्रतीक माना जाता है।

chhatrapati shivaji Maharaj terminus entry – विक्टोरिया टर्मिनस का प्रवेश द्वार

विक्टोरिया टर्मिनस के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ शेर और चीता की बड़ी सी खूबसूरत मूर्ति मौजूद है। इसके शेर को ब्रिटेन का chhatrapatishivaji terminus lion और चीते को भारत काchhatrapatishivaji terminus tiger प्रतीक कहा जाता है। प्रवेश द्वार के साथ पूरे विक्टोरिया टर्मिनस को बलुआ पत्थरों, चूना और उच्चस्तरीय इटैलियन संगमरमर से तराशा गया है।

इस टर्मिनस के भीतरी भाग को कई रंग-बिरंगे पत्थरों से सजाया गया है, वहीं बाहरी दीवारों पर कई बेहतरीन कलाकृतियों को भी उकेरा गया है।

chhatrapati shivaji Maharaj terminus platforms – छत्रपति शिवाजी महराज टर्मिनस के प्लेटफॉर्म

कुल 18 प्लेटफॉर्म के साथ विक्टोरिया टर्मिनस देश का सबसे खूबसूरत रेलवे स्टेशन होने के साथ-साथ मध्य रेलवे का मुख्यालय भी है।

यहां प्लेटफॉर्म नम्बर 8 से 18 पर दूर-दराज की ट्रेनें मसलन, दुरंतों एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, तेजस एक्सप्रेस और गरीब रथ जैसी ट्रेने फर्राटे भरतीं हैं।

वहीं प्लेटफॉर्म नम्बर 1 से 8 पर मुंबई शहर की लाइफ लाइन मानी जाने वाली लोकल ट्रेनें दौड़तीं हैं, जो पूरे मुंबई शहर को एक धागे में पिरोती हैं। chhatrapati shivaji Maharaj terminus train

chhatrapati shivaji Maharaj terminus – हिन्दी फिल्मों में छत्रपति शिवाजी महराज टर्मिनस

हिन्दी फिल्मों का हब मानी जाने वाली मायानगरी को सपनों शहर कहा जाता है। जाहिर है ऐसे में मुंबई की पहचान विक्टोरिया टर्मिनस भला इस चकाचौंध से कैसे अछूता रह सकता है। दरअसल विक्टोरिया टर्मिनस की झलक बड़े पर्दे पर रिलीज हुई कई बॉलीवुड फिल्मों में देखने को मिल सकती है।

अगर हाल की बात करें तो बॉलीवुड एक्टर सलमान खान स्टारर फिल्म जय हो की शूटिंग इसी लोकेशन पर की गई है, वहीं बी-टाउन के किंग खान की सुपरहिट फिल्म रा.वन में भी विक्टोरिया टर्मिनस को दर्शाया गया है।

chhatrapatishivaji terminus design – छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस की खासियत

अमूमन दुनिया के सभी शहरों में रेलवे स्टेशन शहर के बीच में ही होता है और विक्टोरिया टर्मिनस भी इसी कड़ी का हिस्सा है। लेकिन इससे अलग देश का दिल कहे जाने वाले मुंबई का महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन होने के कारण इसकी लोकेशन और भी ज्यादा अहम बन जाती है।

रेल के रास्ते मुंबई जाने वाले पयर्टकों के लिए मुंबई शहर का लुत्फ उठाना काफी आसान हो जाता है। दरअसल मुंबई के मशहूर पयर्टक स्थल – गेट वे ऑफ इंडिया chhatrapati shivaji Maharaj terminus to gateway of india, ताज होटल, मरीन ड्राइव, जुहु बीच where is juhu beach in mumbai सहित कई खूबसूरत टूरिस्ट प्लेस छत्रपति शिवाजी महराज टर्मिनस रेलवे स्टेशन के बेहद करीब हैं।

Reference-
6/1/2020, Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus, wikipedia

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