चार ब्राह्मण पंचतंत्र की कहानी | char brahman Panchtantra ki kahani in Hindi

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चार ब्राह्मण पंचतंत्र की कहानी | char brahman Panchtantra ki kahani in Hindi

एक गांव में चार ब्राह्मण रहते थे। उनमें से तीन ब्राह्मण किताबों को हर वक्त पढ़ते रहते थे। और सारा वक्त ज्ञान अर्जित करने में लगे रहते थे। चौथा ब्राह्मण समझदार था पर वह किताबों का उतना अध्ययन नहीं करता था। एक बार तीनों ब्राह्मण ने सोचा कि वह दूर यात्रा करके राजा से मिलने जाएंगे। अपनी विद्या से प्रभावित करके उनसे इनाम लेंगे। चौथे ब्राह्मण ने उनसे विनती की, “मुझे भी अपने साथ ले चलो।”

char brahman Panchtantra ki kahani
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उन तीनों ने चौथे ब्राह्मण को अपने साथ ले लिया। रास्ते में जंगल से गुजरते वक्त उन्हें किसी जानवर की हड्डियां दिखी। पहले ब्राह्मण ने हड्डियों को देखा और कहां, “यह तो शेर की हड्डियां है। हमें अपने विद्या के उपयोग से उसे जीवित करना चाहिए।”

पहले ब्राह्मण ने मंत्र उच्चारण से शेर की हड्डियां जोड़ दी। दूसरे ब्राह्मण ने शेर के कंकाल के पास बैठकर अपनी मंत्र शक्ति से हड्डियों पर मास चढ़ा दिया।

चौथा ब्राह्मण अपने दोस्तों की बेवकूफी पर भौचक्का रह गया। वह उन्हें समझाते हुए बोला, “इतना बहुत है अब और कुछ मत करो वरना शेर जीवित होकर हम सब को खा जाएगा।”

अभिमानी दोस्त उसका मजाक उड़ाते हुए बोले, “तुम डरपोक हो। हमारी विद्या से ईर्ष्या करते हो। तुम विद्या अर्जित करके महापंडित हो गए हो। हम अपनी मंत्र शक्ति से शेर को अपना गुलाम बना लेंगे।”

इससे पहले कि तीसरा ब्राह्मण शेर को जीवित कर दें चौथा ब्राह्मण जल्दी से पेड़ पर चढ़ गया। तीसरे ब्राह्मण ने अपना मंत्र पढ़ा। शेर जीवित हो गया। वह भूखा था। तीनों ब्राह्मणों को अपने आगे देख वह उन पर हमला करके उन्हें खा गया। शेर के जाने के बाद चौथा ब्राह्मण पेड़ से उतरा और उदास होकर वापस घर चला गया।

नैतिक शिक्षा :– व्यवहारिक ज्ञान किताबी ज्ञान से बड़ा होता है।

कभी भी अपने आगे दूसरों को मूर्ख नही समझना चाहिए।

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