चालाकी – जातक कथाएँ | Jatak Story In Hindi | chalaki jatak katha in hindi

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चालाकी – जातक कथाएँ | Jatak Story In Hindi | chalaki jatak katha in hindi

पूर्व समय में वाराणसी में बोधिसत्व सिंह होकर पैदा हुए और हिमालय प्रदेश में पर्वत गुफा में रहने लगे। नजदीकी एक तालाब के आसपास बहुत से सूकर रहते थे। उसी तालाब के आसपास तपस्वी भी परण शालाओं में रहते थे। एक दिन सिंह शिकार से पेट भर कर और तालाब में पानी पीकर आया। 

उसी समय एक मोटा सूकर उस तालाब के आसपास चरता दिखाई दिया। सिंह ने उसे देख सोचा कि इसे किसी दूसरे दिन खाऊंगा। यदि यह मुझे देख लेगा तो फिर नहीं आएगा, उसके ना आने के डर से वह तालाब में उतर एक तरफ को जाने लगा। सूकर ने उसे देखा, तो सोचा, यह मेरे भय के कारण भागा जा रहा है। आज मुझे एक सिंह से जूझना चाहिए। उसने सिर उठाकर सिंह युद्ध के लिए ललकारते हुए कहा, ‘दोस्त, मैं चोपाया हूं। तू भी चोपाया है सिंह। आ रुक, डरकर इसलिए भागता है? ‘

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सिंह ने उसकी बात सुनी तो कहा, ‘दोस्त, आज हमारा तेरे साथ युद्ध नहीं होगा।’ आज से 7 दिन इसी जगह पर संग्राम होगा। इतना कह वह चला गया। 

सूकर प्रसन्न हुआ कि सिंह के साथ युद्ध करूंगा। उसने अपने सब रिश्तेदारों को कह दिया। वे उसकी बात सुनकर डरे। ‘ अब तो हम सभी को नष्ट करेगा। अपनी ताकत को ना पहचान कर सिंह के साथ युद्ध करना चाहता है, सिंह आकर हम सब के प्राण ले लेगा।’

उसने भयभीत हो पूछा, ‘ तो अब क्या करूं?’

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उन्होंने उपाय बताया, “दोस्त तू कर तू उस जगह जाकर जहां यह तपस्वी मल मूत्र त्यागते, हैं 7 दिन तक शरीर में गंदगी लपेटकर शरीर को सुखा। सातवें दिन शरीर को ओस की बूंदों से गीला कर सिंह के आने से पहले ही आकर हवा का रुख देख, जिधर से हवा आती हो, उधर खड़े हो जाना। सिंह सफाई पसंद होता है वह तेरे शरीर की गंदगी को सूंघ तुझे विजय छोड़ चला जाएगा।

उसने वैसे ही किया और साथ में दिन वहां जाकर खड़ा हो गया। सिंह उसके शरीर की गंदगी को सूंघ कर समझ गया कि उसने देह गंध पोता है।

वह बोला, “दोस्त सूकर, तूने अच्छा उपाय सोचा है। यदि तूने गंद ना होता होता तो मैं तुझे यूं ही मार देता लेकिन अब तो मैं तेरे शरीर को ना मुंह से खा सकता हूं, ना पैरों से तुझ पर प्रहार कर सकता हूं। इसीलिए तुझे विजय मानता हूं। हे सूकर, तू अपवित्र गंदे बालों वाला है। तेरे शरीर से दुर्गंध आती है। यदि तुझे युद्ध करने की इच्छा है, तो मैं तुझे विजई मान लेता हूं।’

सूकर ने अपने रिश्तेदारों को कहा, सिंह को मैंने जीत लिया। वे डरे की किसी दिन आकर सिंह हम सब को जान से मार डालेगा और उस दिन से सारे सूकर शरीर पर गंद मलकर रहने लगे।

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