ब्रह्मा जी की कहानी | brahma story in hindi | story of brahma | 3 भगवान ब्रह्मा की कहानी

ब्रह्मा जी की बेटी कौन है, ब्रह्मा जी की वंशावली, ब्रह्मा जी के कितने सिर हैं, ब्रह्मा जी को श्राप किसने दिया, ब्रह्मा जी की फोटो, ब्रह्मा जी की शादी किससे हुई, ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने का मंत्र, ब्रह्मा जी का मंदिर


1. ब्रह्मा जी का स्वरूप | brahma story in hindi

ब्रह्मा इस सृष्टि के रचयिता है। चार सिर और चार हाथों के साथ कमल पर बैठे दिखाया जाता है। उनके हाथों में कमल, काल की गणना करने के लिए मोतियों की माला, जीवन की रचना के लिए पानी से भरा एक कमंडल और चारों वेद रहते हैं। उनके चारों सिर चारों वेदों–ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के प्रतीक है। उनका वाहन हंस है जो अच्छाई और बुराई में भेद करने की अपनी क्षमता के कारण प्रसिद्ध है।

माना जाता है कि ब्रह्मा का जन्म सृष्टि के आरंभ में विष्णु की नाभि से पुगे कमल से अपने आप हुआ था। सृष्टि के निर्माण में ज्ञान और शिक्षा की देवी सरस्वती सहायता करती है और आवश्यक ज्ञान उपलब्ध कराती है।

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2. ब्रह्मा के 4 सिरों की कहानी | ब्रह्मा जी की कहानी

सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा को 4  सिरों वाला दिखाया जाता है। हालांकि, पहले उनके  पांच सिर थे। जब वे सृष्टि की रचना करने लगे,  तो उन्होंने एक सुंदर स्त्री बनाई और उसे  शतरूपा दिया। परंतु ब्रह्मा जी अपनी ही बनाई स्त्री पर मोहित हो गए। इतनी सुंदर स्त्री उन्होंने पहले कभी नहीं देखी थी। शतरूपा को हर ओर से देखने के लिए उन्होंने अपना दूसरा, तीसरा और चौथा सिर बना लिया।

 शतरूपा जहां भी जाती, ब्रह्मा की आंखें उसे देखती रहती। परंतु एक दिन परेशान होकर वह आकाश की ओर चल दी। उसे देखने के लिए ब्रह्मा जी ने अपना पांचवा फिर भी बना लिया।

 संहारक माने जाने वाले शिव जी भगवान यह सब देख रहे थे। ब्रह्मा की इस चेष्टा से वे बहुत क्रोधित हुए। उनका मानना था कि शतरूपा को ब्रह्मा ने बनाया है इसलिए वह उनकी बेटी के समान हुई। इस तरह शतरूपा की रक्षा करना ब्रह्मा का कर्तव्य हुआ।

 अपनी ही बेटी पर मोहित हो जाना शिवजी जी को अनुचित लगा। उन्होंने ब्रह्मा को सबक सिखाने का निश्चय किया और उनका पांचवा सिर काट डाला।

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3. ब्रह्मा का सबक | भगवान ब्रह्मा की कहानी

ब्रह्मा के बनाए देवता, असुर और मनुष्य हमेशा लड़ते रहते थे।  उनपर पूरी सृष्टि पर कब्जे को लेकर अक्सर लड़ाई होती रहती थी। हर समय चलते रहने वाले इनके युद्ध से तीनों लोकों में अराजकता फैल जाती थी ब्रह्मा को चिंता हुई तो उन्होंने सब को चेतावनी देने का निश्चय किया।

एक दिन उन्होंने जोर से गरज कर “द” ध्वनि निकाली उनकी जोर की आवाज पूरे ब्रह्मांड में गूंज गई। हर कोई ब्रह्मा के पास सहायता के लिए दौड़ पड़ा।

ब्रह्मा ने उन सभी से “द” का अर्थ पूछा। देवताओं ने कहा कि द ध्वनि “दमयत” की तरह लगता है जिसका अर्थ आत्म नियंत्रण होता है। 

मनुष्य ने कहा कि “द” का अर्थ दान होता है जिसका मतलब देना होता है। असुरों ने कहा कि, “द” का अर्थ दयाधर्म या दयावान होता है। ब्रह्मा ने सभी से कहा कि अगर वे आत्म नियंत्रण दान और दया के 3 सिद्धांतों का पालन करेंगे तो उन्हें अच्छा लगेगा।

माना जाता है कि आज भी जब ब्रह्मा “द” ध्वनि निकालते हैं तो जोर से बिजली कड़कती है। इस तरह से वे हमको तीन सिद्धांत याद दिलाने का प्रयास करते हैं।

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