मधुमेह का आयुर्वेदिक प्रबंधन एवं घरेलू उपचार- Ayurvedic Management & Home Remedies for Diabetes in Hindi

मधुमेह आज डायबिटीज नाम से तीव्रगति से बढ़ रहा है । आजकल नईपीढ़ी में मधुमेह की समस्‍या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है । नई पीढ़ी का गलत खान-पान और अनियंत्रित जंक फूड खाने की आदतें युवा पीढ़ी को भी अपने चेट में लेती जा रही है । शारीरिक श्रम का अभाव इस रोग को बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रहा है । मधुमेह को धीमी मौत मतलब साइलेंट किलर भी कहा जाता है। यह रोग जब एक बार किसी को हो जाये तो उसे फिर जीवन भर छोड़ती नहीं। इस रोग के संबंध सबसे बुरी बात यह है कि यह शरीर में अन्य कई बीमारियों को भी जन्‍म देती है।  इस आलेख में डाइबिटीज की जटिलता एवं इसके आयुर्वेद प्रबंधन के साथ कुछ घरेलु उपचार पर विचार करते हैं ।

डाइबिटीज क्‍या है – What is Diabetes in Hindi?

जब शरीर के पैंक्रियाज में इंसुलिन का पहुँचना कम हो जाता है तो रक्‍त में ग्‍लूकोज का स्‍तर बढ़ जाता है । इसी स्थिति को डायबिटीज कहते हैं । वास्‍तव में इंसुलिन एक ऐसा हार्मोन है जो पाचक ग्रंथी द्वारा बनता है, जो भोजन को एनर्जी में बदलने का काम करता है और शरीर में शुगर की मात्रा को संतुलित रखता है । जब इंसुलिन पैंक्रियाज में नहीं पहुँच पाता तो र्शकरा नियंत्रित नहीं रह पाता और इसका स्‍तर बढ़ जाता है ।

डाइबिटीज के लक्षण – Symptoms of Diabetes in Hindi

डाइबिटीज के रोगी में सामान्‍य रूप से ये लक्षण पाये जाते हैं-

  1. भूख-प्‍यास अधिक लगना ।
  2. बार-बार पेशाब होना ।
  3. शरीर में थकान का बना रहना ।
  4. चर्म रोग होना । जैसे त्‍वचा का खुश्‍क एवं खुरदुरी होना, खुजली होना ।
  5. घावों को जल्‍दी न भरना ।
  6. ऑंखों की शक्ति कमी का अनुभव होना ।
  7. याददाश्‍त कमजोर होना ।
  8. बालों का झड़ना ।
  9. लीवर का कमजोर होना ।
डाइबिटीज के लक्षण - Symptoms of Diabetes

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डाइबिटीज होने के कारण – Causes for Diabetes in Hindi

डाइबिटीज ज्‍यादातर वंशानुगत और अनियमित जीवनशैली के कारण होता है । यदि परिवार में दादा-दादी, माता-पिता को डाइबिटीज है तो उसके संतान को डाइबिटीज होने की आशंका बनी रहती है ।  किन्‍तु इसका सबसे बड़ा कारण शारीरिक श्रम, मेहनत, कसरत, व्‍यायाम का अभाव और फास्‍ट फूड और ज्‍यादा मीठा खाने की आदत को माना जाता है । यदि मानसिक एवं शरीरिक श्रम का संतुलन हो तो इस रोग से बचा जा सकता है ।

डाइबिटीज की जटिलता – Risk of Diabetes in Hindi

डाइबिटीज को साइलेंट किलर कहा जाता है क्‍योंकि यह धीरे-धीरे शरीर में  कई गंभीर रोगों को जन्‍म दे सकता है । हाईब्‍लड़प्रेशर, पौरूषशक्ति में कमी, ऑंख की शक्ति में कमी इसका दूरगामी परिणाम होता है ।

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यदि पैंक्रियाज में इंसुलिन का स्‍तर बहुत कम हो जाये तो लकवा, हार्टअटैक, का खतरा सामान्‍य व्‍यक्ति से कई गुना अधिक बढ़ जाता है । लंबे समय तक शुगर रहने पर ऑंखों को  स्‍थायी नुकसान हो सकता है ।

डाइबिटीज का आयुर्वेदिक प्रबंधन – Ayurvedic Management of Diabetes in Hindi

आयुर्वेद में मधुमेह का विस्‍तार से उल्‍लेख किया गया है । आयुर्वेद में हमारे ऋषियों ने हजारों साल पहले ही इस रोग का उपचार खोज लिया है । आज जिसे टाइप-1 डाइबिटीज कहते हैं, उसे आयुर्वेद में सहज प्रेमह कहा है, वही आज जिसे टाइप-2 डाइबिटीज कहते उसे आयुर्वेद में स्‍थूलक प्रमेही कहा गया है । आयुर्वेद के अनुसार टाइप -1 डायबिटीज वात (वायु और गैस ) दोष का असंतुलन है, जबकि टाइप -2 डायबिटीज कपा (जल और पृथ्वी) दोष की अधिकता है।  आयुर्वेद में अवलोकन और संकल्‍पना पर जोर दिया जाता है । आयुर्वेद के अनुसार मधुमेह की चिकित्‍सा रोगी की प्रकृति पर निर्भर करती है । सभी रोगियों पर एक ही प्रकार की औषधि कारगर नहीं होते ।आयुर्वेद के अनुसार पथ्‍य-अपथ्‍य, पंचकर्म और औषधि की प्रक्रिया कही गई है । 

Home Remedies for Diabetes in Hindi

पथ्‍य-अपथ्‍य – Dietary disorder in Hindi

आयुर्वेद में आहार संबंधी सुझाव दिये गये हैं, जो मधुमेह को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में हमारा मदद करता है । मधुमेह रोगियों को वसायुक्त, तली-भुनी और ऑयली खाने से बचना चाहिए और ताज़े त‍था मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए, खासकर वह खाद्य पदार्थ जिनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है ।

पंचकर्म – Panchkarma in Hindi

आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्‍सा पद्धति वर्तमान में बहत प्रचलित है । इस विधि में पांच क्रिया शामिल है जिसमें पहला वमन कफ प्रधान रोगों के लिये वमन (Vomit) कराया जाता है । दूसरा है विरेचन इसविधि में पित्‍त दोष के निवारण हेतु विरेचन (Purgation) कराया जाता है । तीसरा है वस्ति वात रोगों के उपचार के लिये वस्ति कराया जाता है जिसमें एक छोटी से उपकरण को मल द्वार की सहायता से अंदर प्रविष्‍ट कराकर बहार निकाला जाता है । चौथा है-रक्‍तमोक्षण इस विधि अशुद्ध रक्‍त को शुद्ध किया जाता है इसके या शिरा को काट कर अशुद्ध रक्‍त बाहर निकालते है अथवा रक्‍तचूषक प‍रजीवी जंतु का सहारा लिया जाता है । पॉंचवा है-नस्‍य इस विधि नाक के छिद्रों द्वारा औषधि प्रविष्‍टकराकर कंठ एवं मस्तिष्‍क का उपचार किया जाता है । पंचकर्म से शरीर बलिष्‍ठ होता है, रोगप्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है । इस विधि से कई असाध्‍य रोगों को भी ठीक किया जा सकता है ।

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औषधियां – Diabetes Medicines in Hindi

आयुर्वेद में मधुमेह के लिये कई औषधियों का उल्‍लेख मिलता है । ये औाषधियां आज वैज्ञानिक शोधों द्वारा भी प्रमाणित हो रहे हैा । डज्ञइबिटीज के कई रोगियों में पाया गया है उन पर एलोपैथिक दावा ज्‍यादाकारगार नहीं होता । इसी कारण सरकार ने वैकल्पिक चिकित्‍सा के रूप में आयुर्वेद के जड़ी-बुटियों पर आधारित आधुनिक दवाएं विकसिंत करने पर जोर दे रही हैं । इसी का परिणाम है कि वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने BGR-34 नामक डाइबिटीज के लिये आयुर्वेदिक दवा विकसित की है । इसे टाइप-2 डाइबिटीज के प्रबंधन में प्रभावी पाया गया है । इस औषधि में आयुर्वेदिक औषधि मेथी, दारूहरिद्रा, विजयासर, मजीठ, मेठिका और गुड़मार को सम्मिलित किया गया है ।

करेला, आंवला और एलोवेरा जैसे और कई आयुर्वेदिक जडी-बुटी है जिसमें डाइबिटीज को नियंतत्र करने की क्षमता है । करेले में पॉलीपेप्‍टाइड-पी पाया जाता है जो एक प्रकार इंसुलिन जैसा ही यौगित है, जो डाबिटीज विरोधी के रूप में जाना जाता है । आंवला फाइबर युक्‍त होता है, डाइबिटीज में फाइबर युक्‍त खाद्य इसके नियंत्रण में बहुत सहायक है ।

Ayurvedic Treatment for Diabetes | Swami Ramdev

Ayurvedic Treatment for Diabetes

डाइबिटीज के लिये  घरेलू उपचार (आयुर्वेदिक होम रेमेडीज) – Home Remedies for Diabetes in Hindi

  1. ताम्रजल का सेवन-  तांबे में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-एंफ्लामेंटरी गुण पाये जाते जो मधुमेह के प्रबंधन में सहायक है । इसलिये तांबे के पात्र में रातभर पानी रखकर सुबह उपठकर खाली पेट इस पानी को पीना चाहिये ।.
  2. मेथी बीज का सेवन- इंटरनेशनल जर्नल फॉर विटामिन एंड न्यूट्रिशन रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार मेथीबीज को आइप-2 डाइबिटीज को नियंत्रित करने में सहायक पाया गया है । 10 ग्राम मेथी को पानी भिगाकर प्रतिदिन भिगे बीज को खाना उस पानी का सेवन करना बहुत ही लाभकारी है । गर्मपानी भिगाना ज्‍यादा फायदेमंद पाया गया है ।
  3. ऐलोवेरा का सेवन-एलोवेरा में मौजूद इमोडिन तत्व शरीर में ग्लूकोज के स्तर को कम करने में सहायक होता है । प्रतिदन एलोवेरा को चाय  जैसे सेवन किया जा सकता है । इसके पीने से 2 तरह के फाइबर मि‍लते हैं. पहला मूसिलेज और दूसरा ग्लूकोमेनन. एलोवेरा में क्रोमियम और मैग्नीज जैसे तत्व होते हैं, जो इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करते हैं ।
  4. गुडमार की पत्‍ती 30 ग्राम, नीम की पत्‍ती 30 ग्राम, तुलसी की पत्‍ती 30 ग्राम, सदाबहार की पत्‍ती 30 ग्राम, बेल की पत्‍ती 30 ग्राम, जामुन की गिरी 50 ग्राम, तजकलमी 20 ग्राम, वंशलोचन 20 ग्राम, जायफल 10 ग्राम,जावित्री 10 ग्राम, इलायची 10 ग्राम, निौला की गिरी 20 ग्राम, काली मिर्च 30 ग्राम, तेजपत्र 30 ग्राम, करेला बीज 20 ग्राम, और मामज्‍जक 30 ग्राम इन सभी को सुखाकर बारीक चूर्ण बनाकर बबूल की गोंद से 3-3 ग्राम के अनुमान में गोलियां बना लें । इन गोलियों को प्रतिदिन सुबह-शाम एक-एक गोली का सेवन करें । इसके प्रयोग से निश्चित रूप से मधुमेह में लाभ होगा शुगर लेबल नियंत्रित रहेगा ।
  5. गिलोय, पनीरडोंडे, चिरायता, बबूल की छाल, गूलर की पत्‍ती, गोरखमुंडी, और अर्जुन की पत्‍ती को समान मात्रा में लेकर आपस में अधकूटा करके आठ गुने पानी से 24 घंटे के भिंगाने के लिये छोड़ दें । इसे भिगे हुये मिश्रण को आग में तब तक पकावें जब तक पानी का चौथाई हिस्‍सा न बच जाये । फिर इसे छान कर अलग कर लें । इस छनित को फिर तब तक पकावें जब तक चासनी नूमा गाढ़ा न हो जाये । गाढा हो जाने के बाद इसमें हल्‍दी चूर्ण मिलाकर 1-1 ग्राम की गोलिां बना लें ।  इन गोलियों में से  2-2 गोली सुबह-शाम मेथीजल (मेथी को भिगाने से प्राप्‍त जल) से लें ।  इस प्रयोग से मधुमेह काफीहद तक नियंत्रित किया जा सकता है ।

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डाइबिटीज के लिये आसन एवं व्‍यायाम – Yoga and Exercises for Diabetes

डाइबिटीज से पीडि़त व्‍यक्तियों को प्रतिदिन सुबह 5-7 किलोमीटर तक पैदल चलना सबसे बड़ा व्‍यायाम होता है । डाइबिटीज के रोगियों को सुबह घूमना अपने आदत में शामिल कर लेना चाहिये । इस वर्कआउट के साथ-साथ भस्त्रिका योगाआसन, और हलासन एवं सर्वांग आसन अच्‍छे से सीख कर करना चाहिये । ऐसा करने से इंसुलिन का पुनिर्माण होने लगता है । इसके नियमित किये जाने से कुछ वर्षो में यह जड़ से समाप्‍त हो सकता है ।

आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुकूल अपने खान-पान एवं दिनचर्या को ढालने पर निश्चित रूप से मधुमेह को नियंत्रित किया जा सकता है । उपरोक्‍त घरेलू उपायों में से जिसको जो अनुकूल लगे प्रयोग में ला सकता है । मुख्‍य रूप से भोजन पर नियंत्रण और वर्कआउट शुगर को नियंत्रित करता तथ आयुर्वेदिक उपचार इसे जड़ से समाप्‍त कर सकता है ।

NOTE: आवश्‍यक है कि अपने शरीर का परीक्षण किसी योग्‍य वैद्य से करा कर शरीर की प्रकृति निर्धारित करें फिर उस प्रकृति के अनुसार औषधि करें ।

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