अश्वगंधा के फायदे और नुकसान हिंदी में – Benefits of Ashwagandha

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अश्वगंधा एक प्राचीन आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग भारत में सदियों से चला आ रहा है। यह आयुर्वेद में बताये गए “रसायणों” में से एक है जिसका उपयोग मुख्य तौर पर एन्टी-एजिंग यानि की उम्र के साथ होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए किया जाता है। यहाँ अश्वगंधा के फायदे और नुकसान पर हिंदी में विशेष रूप से चर्चा की गयी है। 

अश्वगंधा को अंग्रेजी में “Indian Ginseng” और “Winter Cherry” भी कहा जाता है। इसकी गंध घोड़े जैसी होती है इसीलिए इसे “अश्वगंधा” कहा जाता है। इसका उपयोग मुख्य तौर पे शरीर के सामूहिक स्वास्थय को ठीक रखने के लिए किया जाता है।

आयुर्वेद के मतानुसार यह त्रिदोष होता है और तीनो दोष को संतुलित करने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त, यह वात एवं कफ दोष को संतुलित करने में प्रबल होता है। 

  • वैज्ञानिक नाम: साथनिया सोमनिफेरा
  • परिवार: सोलनसी
  • आदेश: सोलनलीज
  • किंगडम: प्लांटे

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अश्वगंधा के फायदे

अश्वगंधा के फायदे हिंदी में – Benefits of Ashwagandha in Hindi

आयुर्वेद में अश्वगंधा एक बहुत ही महत्वपूर्ण औषधि है जिसका वर्णन अनेक आयुर्वेदिक संहिताओं एवं पुस्तकों में पाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, कई आधुनिक संसोधन ने भी अश्वगंधा के फायदे को समर्थन दिया है। जिसमे से यहाँ कुछ विशेष फायदे निचे बताये गई है। 

मानसिक तनाव के लिए अश्वगंधा

अश्वगंधा एक “Adaptogenic Drug” है जो की मानसिक तनाव (Mental Stress) और व्यग्रता (Anxiety) में काफी हद तक फायदेमंद है। यह हमारे शरीर में मानसिक तनाव से बढ़ने वाले स्ट्रेस होर्मोन्स जैसे की Cortisol के स्तर को घटाकर राहत देता है।

आयुर्वेद के मतानुसार यह औषधि वात दोष को संतुलित करके शरीर में तनाव एवं व्यग्रता की स्थिति को संतुलित करने में मदद करती है। एक साइंटिफिक रिसर्च के अनुसार, अश्वगंधा के सेवन से व्यग्रता (Anxiety) में काफी हद तक राहत मिलती है। इसके साथ ही यह नींद की गुणवत्ता भी बढ़ाता है। इसलिए, अश्वगंधा मानसिक स्वास्थय एवं नींद के लिए फायदेमंद है। 

डायबिटीज के लिए अश्वगंधा

हमारे शरीर में बढे हुए ग्लूकोस (शुगर) लेवल को चिकित्सीय भाषा में डायबिटीज या मधुमेह कहते है। इसके कई कारण हो सकते है, आयुर्वेद के अनुसार यह हमारे शरीर में वात, पित्त और कफ दोष के असंतुलन की वजह से होता है। आयुर्वेद में अश्वंगधा को मधुमेह में उपयोगी कई फार्मूलेशन में उल्लेखित करा गया है।  

इसके अतिरिक्त, यह प्रि-डायबिटीज की चिकित्सा में भी उपयोगी है और शुगर लेवल को काफी हद तक संतुलित करने में मदद करता है। अश्वगंधा में कई ऐसे प्राकृतिक संघटक पाए जाते है जो एंटी-डायबिटिक होते है और डायबिटीज में मदद करते है।

त्वचा के लिए अश्वगंधा

अश्वगंधा एक रसायण होने की वजह से यह त्वचा पर आने वाली झुर्रियों को कम करता है और जवान दिखने में मददरूप है। यह स्निग्ध होता है और त्वचा में से वात दोष का शमन करके मॉइस्चरायज़ करता है।

अश्वगंधा स्ट्रेस को कम करके, होर्मोन्स को संतुलित करके, और प्रतिकारक शक्ति को बढ़ा कर कोशिकाओं को अच्छे से पोषण देता है और एक खिली हुई त्वचा पाने में मदद करता है। इसके अलावा यह चेहरे पर होने वाले दानों (Pimples) को भी मिटाता है और एक संतुलित त्वचा पाने में मदद करता है।

हाई ब्लड प्रेशर के लिए अश्वगंधा

उच्च रक्त चाप यानि हाई ब्लड प्रेशर आज कल एक आम समस्या बनती जा रही है। इसका सीधा संबंध हमारे मानसिक स्वस्थ्य से होता है। अश्वगंधा में मौजूद अडाप्टोजेन्स हमारे शरीर में मौजूद स्ट्रेस और इंफ्लामेशन को कम करके ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है।

यह आयुर्वेदिक औषधि आपके शरीर में तनाव को दूर करके ब्लड प्रेशर को कम करती है। आयुर्वेद में उच्च रक्त चाप एक वात रोग बताया गया है। यह औषधि शरीर में वात दोष को संतुलित करके ब्लड प्रेशर को कम करती है। 

हालांकि इस विषय में अधिक वैज्ञानिक शोध नहीं हुई है, इसका सेवन मात्र इसके फायदे को ध्यान में लेकर करना चाहिए और साथ साथ मुख्य चिकित्सा जारी रखनी योग्य है।

हॉर्मोन्स के लिए अश्वगंधा

अश्वगंधा के फायदे पुरुषों के लिए अधिक है क्योकि यह मेल हॉर्मोन टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाता है। इसका उपयोग टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन की कमी को ठीक करने के लिए किया जाता है। इसके साथ साथ यह एड्रेनल एवं थाइरोइड ग्रंथि को भी संतुलित करता है। 

हलाकि, अश्वगंधा के फायदे महिलाओं के लिए भी जाने गए है। यह निजी परेशानियों को ठीक करने में मदद करता है, लेकिन इसका महिलाओं में यह अन्य होर्मोनेस को असंतुलित कर सकता है। इसीलिए, इसका सेवन करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्स्क की सलाह जरूर लेनी चाहिए। 

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अश्वगंधा का सेवन कैसे करे? – How to Consume Ashwagandha?

अश्वगंधा का सेवन करने से कई फायदे होते है एवं यह हमारे स्वास्थ्य को बनाये रखने में भी मदद करता है। बाजार में आपको यह औषधि कई अलग अलग रूप में मिल जाएगी। आप अपनी मर्जी अनुसार इसका चयन करके इसका सेवन कर सकते है।

निचे कुछ अश्वगंधा का उपयोग कैसे करें के उपाय बताये गए है। 

अश्वगंधा और दूध का सेवन

अश्वगंधा के मूल का चिकित्सा की मुख्य भूमिका होती है। इसका मूल शरीर के लिए फायदेमंद एवं तनाव दूर करने वाले फिटोकेमिकल्स का खजाना होता है। दूध एक पोषक तत्वों से भरा अमृत है जिसमे अश्वगंधा मिला कर पिने से इसके गुण कई गुना बढ़ जाते है।

आप चाहे तो मार्किट में उपलब्ध अश्वगंधा के पाउडर को दूध में मिलाकर ले सकते है या फिर आप अपने तरीके से भी अश्वगंधा के मूल को सूखा कर उसका पाउडर बना सकते है। 

अस्वगंधा और शहद का सेवन

अश्वगंधा चूर्ण या टेबलेट का शहद के साथ उपयोग बड़ा ही प्रचलित है और इसके कई फायदे भी देखे गए है। शहद एक माध्यम के रूप से काम करता है जिसे अंग्रेजी में कैटेलिस्ट भी कहते है जो की अश्वगंधा के गुण को कई गुना बढ़ा देता है। 

सबसे पहले, शहद हमारे शरीर में अश्वगंधा की Bioavailibility को बढ़ता है जिससे हमारे यह हमारे शरीर द्वारा अच्छे से पाचन हो जाता है। इसके अलावा, शहद में भी भरपूर प्रमाण में एंटी-ऑक्सीडेंट्स, एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते है जो अश्वगंधा-शहद के मिश्रण को एक सटीक सेहत प्रदान करने वाला फार्मूला बनाता है। 

शहद स्वाद में भी मीठा होता है जिससे अश्वगंधा के स्वाद को दबाकर इसे और सेवनीय बनाया जाता है। आप अश्वगंधा और शहद का उपयोग बेहतर त्वचा, इम्युनिटी, एवं सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए कर सकते है।

अश्वगंधा टेबलेट्स / कैप्सूल का सेवन

अश्वगंधा कैप्सूल का सेवन कैसे करे? अश्वगंधा टेबलेट्स आपको किसी भी आयुर्वेदिक मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाएगी। इसका उपयोग आप अपनी जरुरत के अनुसार प्रतिन सुबह उठने के तुरंत बाद या फिर रात को सोने से पहले कर सकते है।

बाजार में आम तौर पर यह टेबलेट्स ५०० mg की मात्रा में मिलती है। आप प्रतिदिन ५०० mg से १ g तक अश्वगंधा का सेवन कर सकते है, यानी की एक से दो टेबलेट्स। हलाकि, यह आपकी प्रकृति एवं विकृति पर निर्धारित होता है और यह आपको अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से तय करना होगा।

अश्वगंधा की चाय का सेवन

अगर आप अश्वगंधा को आम तरीके से लेने से ऊब गए है तो आप चाहे तो अश्वगंधा की चाय का सेवन भी कर सकते है। इसके लिए आपको अश्वगंधा चूर्ण को पानी में उबालना होगा। अच्छे से उबलने के बाद आप उसमे दूध और शहद दालकर रेगुलर चाय की तरह पि सकते है। डायबिटीज के मरीज शहद को हटा सकते है। 

अश्वगंधा चाय का प्रतिदिन सेवन करने से अश्वगंधा के सभी लाभ मिलते हैं, शरीर में ताजगी बानी रहती है एवं तंदुरस्ती बानी रहती है। 

अश्वगंधा के नुकसान – Side Effects of Ashwagandha

वैसे तो अश्वगंधा एक फायदेमंद और स्वास्थ्य के लिए उपयोगी औषधि है, लेकिन कुछ परिस्थियों में इसमें साइड इफेक्ट्स (नुकसान) देखने को मिल सकते है। नीचे कुछ अश्वगंधा के नुकसान बताये गए है जो आपको इसे सेवन करने से पहले अवश्य देखने चाहिए। 

  • थाइरोइड को बढ़ाता है – अश्वगंधा थाइरोइड हॉर्मोन को बढ़ता है और इसीलिए यह हाइपो थाइरोइड वाले मरीजों में उपयोगी है। हलाकि, यह हाइपर थाइरोइड वाले मरीजों में तकलीफ दायक बन सकता है।
  • लो ब्लड प्रेशर – अश्वगंधा के अतिरिक्त मात्रा में सेवन या फिर लो ब्लड प्रेशर वाले मरीजों में सेवन करने से ब्लड प्रेशर और कम हो सकता है। इसीलिए, लो ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को इसका सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। 
  • पेट में जलन – अश्वगंधा के सेवन से पेट में जलन या एसिडिटी की तकलीफ हो सकती है। इसीलिए, इसे हमेशा दूध, शहद, या अन्य कोई ठन्डे तरल के साथ लेना चाहिए। 
  • प्रेगनेंसी में – प्रेग्नेंट महिलाओं को अश्वगंधा का सेवन हरगिज नहीं करना चाहिए। इसमें मौजूद टेस्टोस्टेरोन बूस्टिंग घटको की वजह से प्रेगनेंसी में कॉम्प्लीकेशन्स आ सकती है और भ्रूण की मृत्यु भी हो सकती है। 
  • महिलाओं में हॉर्मोन इम्बैलेंस – हॉर्मोन इम्बैलेंस से पीड़ित महिलाओ को अश्वगंधा का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसके सेवन से अतिरिक्त प्रमाण में टेस्टोस्टेरोन बनता है, जो की परिस्थिति को और बिगाड़ सकता है। 

अश्वगंधा के फायदे और नुकसान – FAQs

क्या हम अश्वगंधा के बीज का उपयोग कर सकते है?

नहीं, आम तौर पर अश्वगंधा के मूल का ही चिकित्सीय रूप से उपयोग किया जाता है। अश्वगंधा के बीज का उपयोग नहीं किया जा सकता है। 

अश्वगंधा कितने दिन तक खाना चाहिए?

आप अश्वगंधा का अपनी विकृति के अनुसार कर सकते है। यह दिन ७ के अंदर अंदर ही अपने फायदे दिखाना शुरू कर देता है। वैसे तो आप इसे ३ महीने तक ले सकते है लेकिन विशेषज्ञ की सलाह लेनी उचित रहेगी। 

अश्वगंधा से वजन बढ़ता है क्या?

नहीं, अश्वगंधा से वजह बढ़ता नहीं है। हलाकि, यह दूसरे कई घटको पर भी निर्धारित होता है लेकिन सामान्य तौर पर देखा जाए तो यह एक थाइरोइड हॉर्मोन स्टिमुलेटिंग ड्रग है जो की थाइरोइड को बढ़ा कर वजन कम करने में मदद करता है। 

अश्वगंधा का सेवन कब करें?

रात में सोने से पहले दूध के साथ इसका सेवन फायदेमंद रहता है। इसके अलावा इसे खाना खाने के बाद भी लिया जा सकता है

अश्वगंधा और दूध पीने से क्या होता है?

अश्वगंधा के सेवन से इम्यून सिस्टम मजबूत होने लगेगा. कई लोगों को पाचन से संबंधित समस्याओं से परेशान रहते है, इसलिए रोजाना एक गिलास दूध में एक चम्मच अश्वगंधा और शहद मिलाकर पीने से पाचन तंत्र ठीक रहता है, इससे छुटकारा पाने के लिए रोजाना इस मिश्रण का सेवन करे

अश्वगंधा की तासीर क्या है?

आपको बता दें कि अश्वगंधा की तासीर काफी गर्म होती है। अगर इसका सेवन अधिक मात्रा में कर लिया तो आपको दस्त, नींद ना आना, अफरा, एसिडिटी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

हाइट बढ़ाने के लिए अश्वगंधा का सेवन कैसे करें?

हाइट बढ़ाने के लिए आप अश्वगंधा की गोलियां भी खा सकते हैं जो मेडिकल स्टोर पर आसानी से मिल जाती हैं। आप इन्हें खरीद सकते हैं और रोजाना भोजन के बाद इनका सेवन कर सकते हैं। अश्वगंधा की गोलियों को सेवन एक गिलास गुनगुने पानी के साथ निगल कर सकते हैं। आप अश्वगंधा के पाउडर को मिल्क के साथ खाने के बाद पी सकते हैं।

Reference: Ashwagandha

मेरा नाम सविता मित्तल है। मैं एक लेखक (content writer) हूँ। मेैं हिंदी और अंग्रेजी भाषा मे लिखने के साथ-साथ एक एसईओ (SEO) के पद पर भी काम करती हूँ। मैंने अभी तक कई विषयों पर आर्टिकल लिखे हैं जैसे- स्किन केयर, हेयर केयर, योगा । मुझे लिखना बहुत पसंद हैं।

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