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11 Historical places to visit in Delhi- दिल्ली में घूमनेवाली 11 ऐतिहासिक जगहें

दिल्ली, एक ऐसा शहर जिसको मुगल शासन काल में ही अत्यधिक ख्याति प्राप्त हो गई थी, आज भारत की राजधानी और देश की शान है। यह सिर्फ भारत से नहीं बल्कि पूरी दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करती है। और जो लोग इतिहास और वास्तुकला में तनिक भी रुचि रखते हैं यह शहर उनके लिए भ्रमण करने हेतु एक आदर्श शहर है।

पूरे देश का दिल इस शहर के लिए धड़कता है और शायद इसीलिए यह एक अन्य कहावत – दिल वालों की दिल्ली के नाम से भी प्रसिद्ध है। यूं तो घूमने के लिए इस शहर में इतना कुछ है कि आपको कुछ दिनों की फुरसत चाहिए, पर आज मैं इस लेख के माध्यम से उन सभी ऐतिहासिक स्थानों का बखान करूंगा जिसे मैंने खुद घूमा है और आपको यह भी बताऊंगा की इन स्थानों को आपको अपनी दिल्ली की यात्रा सूची में क्यों शामिल करना चाहिए। तो इंतज़ार किस बात का? चलिए मेरे साथ इस ऐतहासिक शहर के सफ़र पर।

1 – Safdarjung’s Tomb- सफदरजंग का मक़बरा

11 Historical places to visit in Delhi- दिल्ली में घूमनेवाली 11 ऐतिहासिक जगहें

मैं शुरुआत एक ऐसी जगह से करूंगा जो अक्सर काफ़ी पर्यटकों द्वारा अनदेखा कर दिया जाता है। सफदरजंग मक़बरा अपने आप में ही उत्कृष्ट वास्तुकला का जीवंत उदाहरण है। इसका निर्माण नवाब सुजा उद दौला द्वारा सन् 1753-54 के अंतराल में करवाया गया था। उन्होंने अपने पिता मिर्जा अबुल मंसूर खान जिनको सफदरजंग की उपाधि प्राप्त थी, के याद में करवाया था। बीच में स्थित मुख्य मकबरे के आस पास खूबसूरत उद्यान है, जहां अच्छा समय बिताया जा सकता है।

टिकट – भारतीय -₹25, विदेशी – ₹300

समय – सभी दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक।

स्थान – सफदरजंग और अरबिंदो मार्ग के चौराहे पर।

निकटतम मेट्रो – जोर बाग

2- Red Fort- लाल किला

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यमुना नदी का किनारे पर स्थित और यूनेस्को के विश्व विरासत में शामिल लाल किला वह स्थान है, जहाँ हर साल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री झंडा फहराते है और देश को संबोधित करते हैं।

लाल किला, एक किला है जिसका निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया है। मुगल बादशाह शाहजहां ने तब इस ईमारत का निर्माण करवाया जब उन्होंने अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली स्थानांतरित की। यह मुगल सम्राटों का निवास स्थान हुआ करता था। यह दिल्ली का एक मुख्य आकर्षण है।

टिकट – भारतीय – ₹90, विदेशी – ₹950

समय – सभी दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक।

स्थान – नेताजी सुभाष मार्ग, चांदनी चौक, नई दिल्ली।

निकटतम मेट्रो – चांदनी चौक।

3 – Qutub Minar- क़ुतुब मीनार

दिल्ली में मेहरौली इलाके में स्थित विश्व धरोहर कुतुब मीनार एक 73 मीटर ऊंचा टॉवर है, जो जीत की निशानी है। क़ुतुब उद दीन ऐबक ने सन् 1200 में इसका निर्माण प्रारंभ किया जिसको बाद में इल्तुतमिश, अला उद दीन खिलजी और फिरोज शाह तुगलक ने पूरा करवाया। दिल्ली वासियों के लिए यह एक मुख्य पिकनिक स्थल है। इसके आस पास के प्रांगण को कुछ इस तरह सजाया संवारा गया है कि यहां कोई भी एक अच्छा वक़्त बिता सकता है।

टिकट – भारतीय – ₹40, विदेशी – ₹600

समय – सभी दिन सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक।

स्थान – मेहरौली, दिल्ली।

निकटतम मेट्रो – क़ुतुब मीनार।

4- India Gate- इंडिया गेट

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इंडिया गेट मुख्य रूप से एक युद्ध स्मारक है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना की तरफ से लड़ते हुए 70000 भारतीय सैनिकों के अपनी जान गंवाई। भारतीय सैनिको की याद में बना इस गेट की नींव कैनॉट के ड्यूक ने सन् 1921 में रखी। एक अन्य स्मारक, जिसे अमर जवान ज्योति के नाम से जाना जाता है, बाद में यहां स्थापित किया गया। अमर जवान ज्योति उन सैनिकों के बलिदान की याद दिलाता है जिन्होंने सन् 1971 के युद्ध में पाकिस्तान से लोहा लिया। गेट के चारो तरफ एक आकर्षक बगीचा है, जो एक पिकनिक स्थल के रूप में मशहूर है।

टिकट – निःशुल्क।

समय – सभी दिन, सुबह से रात्रि तक।

स्थान – राजपथ के निकट।

निकटतम मेट्रो – प्रगति मैदान।

5- Humayun’s tomb- हुमायूं का मक़बरा

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वास्तुकला प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है। हुमायूं की मृत्यु के बाद उनकी बेगम हमीदा बनी ने इसका निर्माण सन् 1565 में करवाया। कहा जाता है कि इसके अंदर हुमायूं के साथ-साथ 100 से ज्यादा मुगल परिवार की कब्रें है। लाल और सफेद संगमरमर से निर्मित यह इमारत अत्यंत मनमोहक है। इसकी रूप रेखा फ़ारसी वास्तुकार मिराक मिर्जा ने खींची। सन् 1993 में इसको यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल किया गया।

टिकट – भारतीय – ₹40, विदेशी – ₹600

समय – सूर्योदय से सूर्यास्त तक।

स्थान – हज़रत निज़ामुद्दीन दरगाह के निकट।

निकटतम मेट्रो – जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम।

6- JAMA Masjid- जामा मस्जिद

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लाल किले से कुछ ही कदम की दूरी पर स्थित भव्य जामा मस्जिद, शायद भारत की सबसे पुरानी और बड़ी मस्जिद है। इसका निर्माण शाहजहां ने सन् 1644 में शुरू करवाया जो सन् 1650 ने जाकर पूर्ण हुआ। यह इतना विराट है कि इसमें एक साथ 25000 लोग नमाज़ अदा कर सकते हैं। इसमें प्रवेश करने के तीन दरवाज़े है, और यह लाल और सफेद संगमरमर से निर्मित है। यहां पर की गई नक्काशी यह दर्शाती है कि उस समय कारीगर नक्काशी कला में निपुण होते थे। कोई भी इसकी मनमोहकता से बच नहीं सकता है।

टिकट – निःशुल्क।

समय – सभी सात दिन

          सुबह सात से दोपहर तक।

         दोपहर 1:30 से शाम 6 बजे तक।

 पूजा (नमाज़) के दौरान पर्यटक को अनुमति नहीं दी जाती है।

स्थान – लाल किले से पूर्व, नेता जी सुभाष चन्द्र मार्ग पर।

निकटतम मेट्रो – चावड़ी बाज़ार।

7 – old Fort- पुराना किला

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शेर शाह सूरी द्वारा हुमायूं को पराजित करने के बाद विजय रूप में निशानी के तौर पर पुराने किले का निर्माण करवाया गया। पूरा क्षेत्र लगभग 2 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। इस किले में तीन बड़े दरवाज़े है, जो लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपनी राजधानी के तौर पर इंद्रप्रस्थ को बसाया था, बाद में उसी के ऊपर यह किला बनाया गया। पर इसके कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं।

इसके चारों और बहुत हरियाली है और इसके निकट एक सुंदर झील है, जहां आप नौका विहार का आंनद ले सकते हैं।

टिकट – भारतीय – ₹30, विदेशी – ₹300

समय – सभी दिन, सूर्योदय से सूर्यास्त तक।

स्थान – मथुरा रोड पर, दिल्ली चिड़ियाघर के समीप।निकटतम मेट्रो – प्रगति मैदान।

8- Jantar Mantar- जंतर मंतर

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प्रमुख रूप से यह एक खगोलीय वेधशाला है। सूरज, चांद और ग्रहों के समय और गति का सही अनुमान लगाने के लिए जयपुर के महाराजा जय सिंह जी ने इसका निर्माण सन् 1724 में करवाया था। इसमें कई यंत्र है जो समय और ग्रहों की स्थिति बताते है। यह दिल्ली का एक मुख्य आकर्षण है, जहां काफी मात्रा में पर्यटक घूमने आते हैं।

टिकट – भारतीय – ₹25, विदेशी – ₹300

समय – सभी दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक।

स्थान – निकट कनॉट प्लेस, नई दिल्ली।

निकटतम मेट्रो– पटेल चौक, राजीव चौक।

 

9- Agrasen / Ugrasen Ki Baoli- अग्रसेन/ उग्रसेन की बावली

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ऐतिहासिक इमारतों की बात हो रही है और बावली ना आए, यह असंभव है। भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित अग्रसेन या उग्रसेन की बावली, दिल्ली की एक बावली है जिसमे कुल 105 सीढ़ियां है। इतिहासकारों का मत है कि इसका निर्माण महाराजा अग्रसेन ने करवाया, जो महाभारत काल में यहां राज किया करते थे। परन्तु इसके कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हुए है। इसका लाल बलुआ पत्थर से बना होना, इसके लोदी या तुगलक काल के होने का प्रमाण देता है। खैर जो भी हो, यह विशाल बावली एक आकर्षण का केंद्र है, जिसको किसी भी यात्री को अवश्य घूमना चाहिए।

टिकट – निःशुल्क।

समय – प्रतिदिन, सुबह से शाम तक।

स्थान – हैले रोड, दीवानचंद इमेजिंग सेंटर के करीब।

निकटतम मेट्रो – बाराखंबा मेट्रो।

10- Lodhi Garden- लोधी गार्डन

11 Historical places to visit in Delhi- दिल्ली में घूमनेवाली 11 ऐतिहासिक जगहें

कुल 90 एकड़ भूमि में विकसित लोधी गार्डन एक ऐसा स्थान है जहां आपको दिल्ली की भीड़भाड़ के मध्य एक अद्भुत शांति की अनुभूति होगी। इसमें मोहम्मद शाह, सिकंदर लोधी, शीशा गुंबद, बड़ा गुंबद जैसी बहुत सी छोटी छोटी इमारतें हैं। यह परिवार और दोस्तों के साथ वीकेंड पर मौज मस्ती के साथ-साथ इतिहास जानने की अच्छी जगह है। जो चीज इसको सबसे लोकप्रिय बनाती है, वो है इसका हरा भरा वातावरण।

टिकट – निःशुल्क।

समय – सभी दिन प्रातः 6 बजे से शाम 7 बजे तक।

स्थान – मुख्य लोधी रोड, इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के पास।निकटतम मेट्रो – जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम या खान

11- Hauz Khas Fort Complex- हौज खास किला परिसर

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हौज खास किला परिसर का निर्माण अलाउद्दीन ख़िलजी द्वारा अपने शासनकाल के दौरान करवाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सिरी के लिए जल की आपूर्ति करवाना था। इसके उपरांत फिरोजशाह तुगलक ने इसके आसपास मदरसा, मंडप, और कुछ इमारतों का निर्माण करवाया और इसे हौज खास का नाम दिया। यह युवाओं के लिए एक मुख्य आकर्षण का केंद्र है। हौज खास को निहारने के लिए दूर स्थानों से पर्यटक आते है और खुद को यहां के शांत और सुनहरे वातावरण में लिप्त होने देते हैं।

टिकट – भारतीय – ₹25, विदेशी – ₹200

समय – सोमवार से शनिवार, प्रातः 10:30 से शाम 7 बजे तक।

स्थान – हौज खास गांव, हिरण पार्क, हौज खास, नई दिल्ली।

निकटतम मेट्रो – हौज खास।

Where to stay?- कहां ठहरें?

दिल्ली देश की राजधानी होने के साथ – साथ एक ऐतिहासिक शहर और मुख्य पर्यटन केंद्र है। यहां देश विदेश से बहुत अधिक संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते है। दिल्ली में सस्ते हॉस्टल से लेकर मंहगे पांच सितारा होटल तक है। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार रुकने की जगह का चयन कर सकता है।

How to reach- कैसे पहुंचे?

सड़क मार्ग द्वारा

दिल्ली रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग से देश के कोने कोने से संपर्क में है। यहां कुल तीन मुख्य बस अड्डे हैं – अंतर्राज्यीय बस टर्मिनस (आईएसबीटी) कश्मीरी गेट, आनंद विहार बस टर्मिनस और सराई काले खान बस टर्मिनस। राज्य परिवहन निगम की बसें लगातार संचालित होती हैं। प्राइवेट (निजी) भी  यहां पहुंचने के विकल्प हैं।

रेल मार्ग द्वारा

रेल नेटवर्क के माध्यम से दिल्ली सभी मुख्य और बड़े रेलवे स्टेशनों से जुड़ा हुआ है। यहां के तीन मुख्य स्टेशन – नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन और हज़रत निज़ामुद्दीन स्टेशन है।

 हवाई मार्ग द्वारा

दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के ही नहीं बल्कि विश्व के तमाम शहरों से जुड़ा हुआ है। सभी प्रमुख एयरलाइंस अपनी सेवाएं दिल्ली के लिए देती हैं। हवाई अड्डे से आप अपनी सुविधा के अनुसार टैक्सी, कैब, मेट्रो, सिटी बस आदि की सहायता से इन ऐतिहासिक इमारतों तक आसानी से पहुंच सकते हैं।

Last word- अन्तिम शब्द

अगर आप पहली बार दिल्ली आ रहे है तो आपको थोड़ा सा समय यहां की विरासत को देखने के लिए जरूर देना चाहिए, दिल्ली सिर्फ एक शहर नहीं है, एक एहसास है। इस शहर में भ्रमण करने हेतु इतना कुछ है कि एक लेख में सभी चीज़ों को उजागर करना कठिन है। फ़िर भी मैंने पूर्ण प्रयास किया है कि यह लेख आपको आपकी अगली दिल्ली यात्रा में मददगार हो। बाकी यह लेख आपको कैसा लगा, या आपका कोई सुझाव है तो हमें नीचे टिप्पणी बॉक्स में अवश्य बताएं।

Reference

Written by Utkarsh Chaturvedi

नमस्कार, मेरा नाम उत्कर्ष चतुर्वेदी है। मैं एक कहानीकार और हिंदी कंटेंट राइटर हूँ। मैं स्वतंत्र फिल्म निर्माता के रूप में भी काम कर रहा हूँ। मेरी शुरुवाती शिक्षा उत्तर प्रदेश के आगरा में हुई है और उसके बाद मैं दिल्ली आ गया। यहां से मैं अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहा हूँ और साथ ही में कंटेंट राइटर के तौर पर काम भी कर रहा हूँ।

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